DM के छापे में रिकॉर्ड रूम से CCTV तक खुली पोल | Uttarakhand News

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दोस्तो हल्द्वानी के आरटीओ ऑफिस में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक जिलाधिकारी का काफिला दफ्तर के भीतर दाखिल हुआ। नजारा ऐसा था कि अधिकारी भी सकते में आ गए और दलाल? वो तो मौका मिलते ही रफू-चक्कर हो गए। डीएम के इस औचक छापे में रिकॉर्ड रूम से लेकर सीसीटीवी तक की असलियत सामने आ गई। कहीं फाइलें बिखरी मिलीं, तो कहीं निगरानी सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल, क्या ये कार्रवाई सिर्फ एक दिन का डर बनकर रह जाएगी, या आरटीओ ऑफिस की कार्यप्रणाली में सच में सुधार होगा?इस छापे के बाद क्या-क्या बदलने वाला है। दोस्तो ये खबर नैनीताल के हल्द्वानी से है जहां जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने आज शनिवार को हल्द्वानी स्थित आरटीओ कार्यालय का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की हकीकत परखी. डीएम के कार्यालय पहुंचते ही पूरे परिसर में हड़कंप मच गया बताया जा रहा है कि निरीक्षण की भनक लगते ही कार्यालय परिसर में सक्रिय बिचौलिए मौके से फरार हो गए। जिलाधिकारी ने इस दौरान रिकॉर्ड रूम से लेकर आमजन से जुड़ी सुविधाओं तक का गहन निरीक्षण किया और कई खामियां सामने आने पर कड़ी नाराजगी जताई।

दोस्तो हल्द्वानी आरटीओ में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अचानक जिलाधिकारी का काफिला आरटीओ कार्यालय पहुंचा। इस दौरान कर्मचारियों में हड़कंप मचा तो बिचौलियों में भगदड़ मच गई। निरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड रूम में फाइलों का रख-रखाव संतोषजनक नहीं पाया गया। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि रिकॉर्ड व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी दस्तावेज व्यवस्थित होने चाहिए, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो। दोस्तो जिलाधिकारी ने कार्यालय में तैनात सभी कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से नेम प्लेट और आई कार्ड लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे आमजन को यह पहचानने में आसानी होगी, कि कौन अधिकारी या कर्मचारी है और कौन बाहरी व्यक्ति निरीक्षण के दौरान कार्यालय परिसर में शिकायत पेटिका न मिलने पर डीएम ने नाराजगी जताई और तत्काल शिकायत पेटिका लगाने के आदेश दिए, ताकि लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकें। दोस्तो इस दौरान बिचौलियों को दूर रखने के लिए फ्लेक्सी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली की भी जांच की। उन्होंने निर्देश दिए कि सीसीटीवी कैमरों की कम से कम हर सात दिन की रिकॉर्डिंग नियमित रूप से चेक की जाए, ताकि किसी भी तरह की अनियमित गतिविधि पर नजर रखी जा सके। डीएम ने यह भी आदेश दिए कि कार्यालय परिसर में स्पष्ट रूप से फ्लेक्सी बोर्ड लगाया जाए, जिसमें लिखा हो कि यहां सरकार द्वारा कोई भी निर्धारित एजेंट नहीं है, ताकि बिचौलियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।

दोस्तो इसके अलावा ये भी लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के सख्त निर्देश दिए। चेतावनी दी कि भविष्य में लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। दोस्तों, हल्द्वानी आरटीओ में जिलाधिकारी का ये औचक निरीक्षण सिर्फ एक छापा नहीं था, बल्कि सिस्टम को आईना दिखाने वाली कार्रवाई थी। जिस दफ्तर में आम आदमी अपने काम को लेकर भटकता है, आज वहीं अफसरों और बिचौलियों में हड़कंप साफ दिखाई दिया।रिकॉर्ड रूम की अव्यवस्था हो या सीसीटीवी की निगरानी, नेम प्लेट और आईडी कार्ड की अनदेखी हो या शिकायत पेटिका का न होना—इस निरीक्षण ने कई ऐसी खामियों को उजागर कर दिया, जिनकी वजह से आमजन को रोज़ाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने साफ शब्दों में कह दिया है कि अब आरटीओ कार्यालय में किसी भी तरह की लापरवाही या बिचौलियों की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फ्लेक्सी बोर्ड लगाने से लेकर सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की नियमित जांच तक, प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। अब सवाल ये है दोस्तों—क्या इस कार्रवाई के बाद आरटीओ की तस्वीर बदलेगी? क्या आम जनता को बिना किसी दलाल के अपना काम करवाने में राहत मिलेगी? या फिर ये सख्ती कुछ दिनों बाद फाइलों तक ही सिमट कर रह जाएगी? फिलहाल प्रशासन ने चेतावनी दे दी है—लापरवाही मिली तो कार्रवाई तय है। अब देखना ये होगा कि सिस्टम सुधरता है या फिर एक बार फिर सवालों के घेरे में आता है।