जी हां दोस्तो क्या बीजेपी विधायक के इस वाले कांड न बीजेपी को फंसा दिया ये वो सवाल है जिसकी झलक अब बीजेपी के अंदर से दिखनी शुरू हो गई। देहरादून से उठी एक चिंगारी अब सियासी तूफान बनती दिख रही है। शिक्षा निदेशक से मारपीट का मामला सिर्फ कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसने सियासत के गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। रायपुर विधायक Umesh Sharma Kau पर दर्ज एफआईआर के बाद सवाल सीधे बीजेपी पर खड़े हो रहे हैं। क्या इस पूरे विवाद ने पार्टी की अंदरूनी बेचैनी बढ़ा दी है? क्या संगठन के भीतर भी उठने लगी है जवाबदेही की आवाज? बताउंगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए।दोस्तो खबर तो ये है कि शिक्षा निदेशक को कूटने के बात बीजेपी विधायक ने सोशल मीडिया पर मांग माफी को शिक्षक संगठनों ने न मानने का फैसला किया साथ ही इधर अब ये मामला अब सिर्फ विपक्ष के हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर से भी संयम और सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है तो क्या शिक्षा निदेशक मारपीट केस में बीजेपी घिरती नजर आ रही है?क्या यह विवाद सियासी रूप से बड़ा मोड़ ले सकता है? वीडियो को अंत तक जरूर देखिएगा दोस्तो। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक पर हुए कथित हमले का मामला अब केवल विपक्षी दलों के आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर से भी कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
वायरल तस्वीरों और वीडियो ने इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है, जिससे सरकार, संगठन और प्रशासन तीनों पर दबाव बढ़ गया है। मामला प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल से जुड़ा है, जिनके साथ कथित मारपीट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इस घटना की जिम्मेदारी भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ पर डाली जा रही है। घटना के बाद से ही विधायक चौतरफा घिरे हुए हैं। विपक्षी दल कांग्रेस जहां उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा संगठन ने भी विधायक से जवाब तलब कर लिया है दोस्तो इस पूरे विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कभी भाजपा में उमेश शर्मा के करीबी रहे हरक सिंह रावत खुलकर सामने आ गए। हरक सिंह रावत ने न सिर्फ उमेश शर्मा की गिरफ्तारी की मांग की, बल्कि उनके पुराने व्यवहार पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है, जब वह भाजपा सरकार में मंत्री थे, तब भी उमेश शर्मा कई बार अधिकारियों पर नाराज होकर मर्यादा लांघते थे और स्थिति को संभालने के लिए उन्हें खुद बीच में आना पड़ता था। इस तरह की घटनाएं उत्तराखंड के लिए ठीक नहीं हैं। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर होती है, बल्कि राज्य का माहौल भी खराब होता है। जब जनप्रतिनिधि ही नियमों और मर्यादाओं की अनदेखी करेंगे, तो आम जनता से कानून मानने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। यह मामला केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं रहा भाजपा के भीतर भी इसे लेकर असंतोष साफ दिखाई देने लगा है। पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता खुलकर यह कहने लगे हैं कि इस तरह की घटनाओं से भाजपा की छवि को गहरा नुकसान पहुंच रहा है।
विधायक उमेश शर्मा पर पहले भी पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ काम करने और उनसे टकराव के आरोप लगते रहे हैं। अतीत में उनके और कार्यकर्ताओं के बीच तनातनी के वीडियो भी वायरल हो चुके हैं, जिससे संगठन में पहले से ही नाराजगी थी जिस तरह से प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के साथ घटना हुई, उससे भाजपा की भारी किरकिरी हुई है। पार्टी ने वर्षों में जो राजनीतिक और नैतिक मर्यादाएं तय की हैं, इस घटना ने उन्हें तोड़ने का काम किया है। यदि भाजपा को अपनी छवि और विश्वसनीयता बचाए रखनी है, तो इस मामले में कठोर कार्रवाई अनिवार्य है, चाहे आरोपी कोई भी हो। दोस्तो ये प्रकरण भाजपा के लिए अंदरूनी तौर पर ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। विपक्ष के आरोपों का सामना करना तो राजनीति का हिस्सा है, लेकिन जब पार्टी के भीतर से ही आवाज उठने लगे, तो मामला गंभीर हो जाता है. खासतौर पर तब, जब घटना एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़ी हो और उसकी तस्वीरें सार्वजनिक मंच पर मौजूद हो फिलहाल पूरा मामला उत्तराखंड की राजनीति का केंद्र बन चुका है। एक तरफ कांग्रेस इसे कानून व्यवस्था का मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रही है, वहीं भाजपा संगठन अपनी छवि को नुकसान से बचाने की कोशिश में है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में कितना सख्त रुख अपनाता है और क्या वाकई कोई ठोस कार्रवाई होती है, या फिर यह विवाद भी राजनीतिक बयानबाजी की भेंट चढ़ जाएगा तो कुल मिलाकर, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक से कथित मारपीट का यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक जांच का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह उत्तराखंड की राजनीति की दिशा और दशा तय करने वाला मुद्दा बनता जा रहा है। Ajay Kumar Naudiyal से जुड़ी वायरल तस्वीरों ने जहां सरकार और प्रशासन को असहज किया है, वहीं Umesh Sharma Kau पर लगे आरोपों ने सत्तारूढ़ दल के भीतर भी हलचल तेज कर दी है।एक ओर Harak Singh Rawat जैसे वरिष्ठ नेता खुलकर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर पार्टी के अंदर से भी सख्त कार्रवाई की मांग सामने आ रही है। साफ है कि यह मामला भाजपा के लिए केवल विपक्ष का हमला नहीं, बल्कि आंतरिक अनुशासन और छवि की परीक्षा भी बन चुका है।अब बड़ा सवाल यही है—क्या पार्टी नेतृत्व इस प्रकरण में उदाहरण पेश करेगा, या फिर यह विवाद भी समय के साथ सियासी शोर में दब जाएगा?फिलहाल निगाहें जांच की दिशा और संगठन के अगले कदम पर टिकी है। क्योंकि इस फैसले से सिर्फ एक विधायक नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक तंत्र की विश्वसनीयता जुड़ी हुई है।