Rishikesh कहीं भारी ना पड़ जाए लापरवाही! | Bajrang Setu | Laxman Jhula | Uttarakhand News

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ऋषिकेश में विकास की बड़ी परियोजना पर सवाल खड़े हो गए है जहां उद्घाटन से पहले ही बहुप्रतीक्षित बजरंग सेतु के कांच के टूटने की घटना ने हर किसी को चौंका दिया है। आखिर क्या वजह रही कि यह हादसा हुआ? और क्यों सुरक्षा कारणों के चलते सेतु पर आवाजाही को तत्काल रोकना पड़ा? कैसे एक बड़ी लापरवाही ने उद्घाटन से पहले ही परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताउंगा आपको पूरी खबर क्या है कहना इस पूरे मामले पर पर्यटकों का और इसे बनेने वाले विभाग। दोस्तो जरा इस बेहद खूबसूरत तस्वीर को देखिए, जहां लोग इसी खूबसूरती से खीचे चले आते हैं। दोस्तो ये देखने में बेहद ही आकर्षक है और यहां पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए एक नई चीज भी कि नीचे गंगा जी बह रही है। ऊपर से आप दीदार कर सकते हैं। दोस्तो ये ऋषिकेश है और ये लक्ष्मण झूला पुल इस पुल ठीक बगल में निर्माणाधीन बजरंग सेतु लेकिन यहां फुटपाथ पर लगा कांच एक बार फिर टूट गया है। फुटपाथ पर लगे एक कांच में जगह-जगह दरारें आ गई हैं। कांच टूटने पर फुटपाथ वाले दोनों किनारों से आवाजाही रोक दी गई।

दोस्तो पहली घटना नहीं है, जब फुटपाथ का कांच टूटा है. इससे पहले भी दो बार फुटपाथ का कांच इसी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिसे निर्माणाधीन कंपनी ने बदलवा दिया था, लेकिन अब इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं, लेकिन जब आप विभाग के आला अधिकारियों का कांच के टूटने को लेकर तर्क सुनेगें तो चौंक जाएंगे वो मै आपको आगे दिखाउंगा लेकिन उससे पहले कैसे पर्यटक भी इस लापरवाही को लेकर सवाल करने लगे हैं। जी हां अब बाहर से जो यहां आया है वो तो हकदार है सवाल करने का लेकिन गजब बात है गुजरात से पहुंचा प्रयटक ये बता रहे हैं कि वो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य से आए हैं, लेकिन दोस्तो इससे इतर मै आपको बताता हूं इस पूल के बनते ही टूटने की पीछे कहानी गौर कीजिएगा। दोस्तो नरेंद्रनगर लोक निर्माण विभाग की ओर से लक्ष्मणझूला पुल के पास साल 2022 में बजरंग सेतु का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। करीब 69.20 करोड़ की लागत से बनने वाला पुल 132.30 मीटर लंबा और पांच मीटर चौड़ा है। पुल के दोनों साइड में करीब डेढ़-डेढ़ मीटर का 65 मिमी की मोटाई वाला पारदर्शी कांच का भी फुटपाथ बनाया गया है। दोस्तो पुल का अभी उद्घाटन तक नहीं हुआ है विभाग की उदासीनता के कारण करीब दो महीने पहले पुल पर देशी, विदेशी पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोगों की आवाजाही शुरू हो गई। फुटपाथ पर करीब 65 मिमी की मोटाई वाला कांच एक बार फिर क्षतिग्रस्त हो गया है। ऐसे में पुल की गुणवत्ता पर स्थानीय लोगों ने भी सवाल खड़ा किया है। साथ बाहर से आने वाला पर्यटक भी खूब तंज कस रह है।

दोस्तो यहां मै आपको ये भी बता दूं कि 16 अप्रैल 2022 को ऐतिहासिक लक्ष्मण झूला पुल को सुरक्षा दृष्टिगत अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया था। आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट के मुताबिक, पुल की तारें पूरी तरीके से जर्जर हो चुके थे। लगातार आवागमन की स्थिति में पुल कभी भी गिर सकता था। इसके बाद तत्कालीन टिहरी डीएम ने आदेश जारी कर 16 अप्रैल को पुल अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया था। दोस्तो बजरंग सेतु के दोनों ओर बनाए गए कांच के फुटपाथ पर चलने के लिए विभाग की ओर से अभी तक कोई मानक तय नहीं किए गए हैं। यह पुल अभी तक जनता के समर्पित भी नहीं हुआ है. पर्यटक फुटपाथ वाले हिस्से में आवाजाही कर यहां फोटो और सेल्फी खींच रहे हैं। वहीं विभाग की ओर से इन लोगों को रोकने के लिए यहां किसी की तैनाती भी नहीं की गई है। विभाग की लापरवाही के चलते इससे पहले करीब 3 जनवरी 2026 को भी फुटपाथ पर बने सेल्फी प्वाइंट के पास एक कांच टूट गया था गनीमत रही कि कोई इससे गिरा नहीं। वहीं इस मामले में विभाग के लोगों का क्या तर्क है। तो दोस्तों, ऋषिकेश के इस बहुप्रतीक्षित बजरंग सेतु को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं जहां एक तरफ इसे पर्यटन के नए आकर्षण के रूप में देखा जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ उद्घाटन से पहले ही बार-बार कांच टूटने की घटनाएं इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पुल अभी जनता के लिए पूरी तरह समर्पित भी नहीं हुआ है, तो फिर उस पर आवाजाही कैसे शुरू हो गई? और क्यों बार-बार चेतावनियों के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नाकाफी नजर आ रहे हैं?अब देखना होगा कि विभाग इन सवालों पर क्या कदम उठाता है—क्योंकि जरा सी लापरवाही यहां किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है।