दोस्तो उत्तराखंड में विकास की तस्वीर क्या सच में उतनी चमकदार है, जितनी दिखाई जाती है? अगर इसका जवाब जानना है, तो ये वीडियो ज़रूर देखिए जो मै आपको दिखाने जा रहा हूं। दोस्तो हालात ऐसे बन गए हैं कि गांव की चुनी हुई प्रधान को भी अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ रहा है। डासडा गांव की प्रधान वीना देवी ने खुद वीडियो बनाकर सिस्टम से सवाल पूछा है—आख़िर उनकी बात सुनी क्यों नहीं जा रही? जब जमीनी स्तर पर चुने गए प्रतिनिधि ही बेबस नजर आएं, तो फिर आम जनता की सुनवाई का क्या हाल होगा? दोस्तो आज में ज्यादा कुछ नहीं कहुंगा इस खबर के बारे में आज में आपको दिखाउंगा एक वीडियो जो विकास के दावों और हकीकत के बीच का फर्क साफ कर देता है। तो दोस्तो देखा आपने सुना आपने एक ग्राम प्रधान को अपनी ही व्यवस्था से संवाद करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ रहा है। ये सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर सवाल है जो “विकास” के बड़े-बड़े दावे करता है। दोस्तो क्या जिम्मेदार अधिकारी इस वीडियो का संज्ञान लेंगे? क्या डासडा गांव की समस्याओं का समाधान होगा? होगा तो फिर कब होगा।