दोस्तो क्या काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह को अब मिलेगा न्याय? क्या उनकी मौत की सच्चाई सामने आ पाएगी? और आखिर जांच रिपोर्ट में ऐसा क्या है, जिसे अब हाईकोर्ट के सामने पेश करना होगा? दोस्तो इन्हीं बड़े सवालों के बीच सुखवंत आत्महत्या मामले में हाईकोर्ट की सख्ती देखने को मिली है क्या है अब तक सुखवंत केस में जांच का सच कहां तक पहुंची है जांच। क्यों अधूरी तैयारी के साथ कोर्ट पहुंची हाईकोर्ट। दोस्तो सुखवंत सिंह ने आत्महत्या क्यों की थी ये तो याद होगा ही आप सब को या भूल गए एक ऐसा मामला जिसने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया। उस मामले में जांच कहां तक पहुंची होगी बल। आपको मेरे को शायद कोई जांच रिपोर्ट के बारे में कोई नहीं बताए, लेकिन दोस्तो कोर्ट को तो सब बताना पड़ेगा और वो भी एक समय अंतराल के अंदर। अब दोस्तो किसान सुखवंत सिंह केस में कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश देते हुए जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि रिपोर्ट में क्या खुलासा होता है और क्या किसान परिवार को इंसाफ मिल पाता है या नहीं।
दोस्तो काशीपुर के किसान आत्महत्या मामले में नामजद लोगों की गिरफ्तारी पर रोक और दर्ज मुकदमे को निरस्त करने के कई मामलों पर नैनीताल हाईकोर्ट में एक साथ सुनवाई हुई। 0 मामले को सुनने के बाद न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने उनकी गिरफ्तारी के आदेश को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार से अभी तक केस के जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि राज्य सरकार ने शपथ पत्र कोर्ट में पेश किया है, उस पर वे अपना जवाब न्यायालय में पेश करे। दोस्तो अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। 9 अप्रैल को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से अपना पक्ष रखते हुए कहा गया कि मामले में चार्जशीट तैयार हो चुकी है. मामले में 12 लोग नामजद हैं, जिस पर कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में एक अतिरिक्त शपथ पत्र पेश करने को कहा है। सभी पक्षों की सुनने के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 20 अप्रैल नियत की है। दोस्तो इससे पहले कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा था कि वे जांच में सहयोग करें, उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी। राज्य सरकार ने स्थिति से अवगत कराते हुए कहा था कि अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामला गंभीर होने के कारण डीजीपी यानी पुलिस महानिदेशक इस केस की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी है, लेकिन जांच शुरू नहीं हुई है। दोस्तो गौरकरने वाली बात ये कि
10 और 11 जनवरी की रात हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र स्थित एक होटल में काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने आत्मह’त्या कर ली थी। आत्मह’त्या से पहले सुखवंत ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर लाइव आकर कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं दोस्तो सुखवंत ने उधम सिंह नगर के तत्कालीन एसएसपी मणिकांत मिश्रा समेत तमाम पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप भी मढ़े थे। दोस्तो किसान सुखवंत और उसके परिवार का कहना था कि उसके साथ जमीन के मामले में धोखाधड़ी हुई है और उनसे करीब चार करोड़ ठग लिए गए. जब इसकी शिकायत बार-बार पुलिस से की गई तो पुलिस ने उनकी शिकायत पर अमल नहीं किया गया, उल्टा उसे ही डरा धमकाया गया। दोस्तो एक किसान की जान जाने के बाद प्रदेश भर में हड़कंप मचा और दबाव इस बात का था कि जल्द से जल्द कार्रवाई हो किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या करने के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 26 लोगों पर आईटीआई थाने में नामजद मुकदमा दर्ज किया था. यह कार्रवाई मृतक के भाई की तहरीर पर की गई थी। दोस्तो, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि उनका इस केस से कोई लेना देना नहीं है. उन्हें इस केस में गलत तरीके से फंसाया गया है. यह केस दो पक्षों के बीच आपसी जमीन और विवाद से जुड़ा मामला है. किसान ने आत्महत्या की है, इसलिए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए और दर्ज मुकदमे को निरस्त किया जाए, लेकिन सवाल तो ये है कि जिन-जिन लोगों पर आरोप लगे उन सब कार्रवाई कड़ी हुई है या फिर खाना पूर्ती की गई है।
दोस्तो सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण में बड़ा अपडेट ये कि अप्रैल में SIT ने दाखिल की चार्जशीट, 12 आरोपी नामजद किया था। दोस्तो कहा ये गया कि काशीपुर के चर्चित सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है। SIT ने 29 पेज की चार्जशीट न्यायिक मजिस्ट्रेट काशीपुर की अदालत में दाखिल की है, जिसमें 12 आरोपियों को नामजद किया गया है। इस चार्जशीट में 58 गवाहों को शामिल किया गया है। वहीं दोस्तो इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद तत्कालीन एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने सख्त कार्रवाई करते हुए आईटीआई कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह रौतेला और एसआई प्रकाश बिष्ट को निलंबित कर दिया था। साथ ही पैगा चौकी के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले जांच जिला स्तरीय एसआईटी को सौंपी गई, जिसकी निगरानी तत्कालीन एसपी क्राइम निहारिका तोमर कर रही थीं। बाद में पुलिस मुख्यालय ने जांच अपने स्तर पर लेते हुए आईजी नीलेश आनंद भरणे की अध्यक्षता में नई एसआईटी का गठन किया। वहीं कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच सौंपी गई, लेकिन अब मामला हाईकोर्ट में है ..और यहीं ये तय होगी न्याय की अगली राह लेकिन पूरे मामले को लेकर आपकी राय .. क्या कुछ बदलवाव सुखवंत सिंह के जान देकर किए गए खुलासों के बाद या नहीं।