लोकगीतों की मधुर आवाज़ आज हमेशा के लिए खामोश हो गई है। प्रिय गायक के निधन की खबर से संगीत जगत में गहरा शोक छा गया है। वह आवाज़ जिसने अपने सुरों से पहाड़ की संस्कृति, परंपरा और भावनाओं को हर दिल तक पहुँचाया। आज वही आवाज़ थम गई है।करीब 35 वर्षों तक अपने लोकगीतों के जरिए लोगों के दिलों पर राज करने वाले इस गायक के जाने से संगीत जगत को बड़ा झटका लगा है।उनके गीत सिर्फ मनोरंजन नहीं थे, बल्कि पहाड़ की मिट्टी की खुशबू, लोकजीवन की कहानी और लोगों की भावनाओं की पहचान थे।उनकी सादगी भरी गायकी और दिल को छू लेने वाली आवाज़ ने पीढ़ियों को जोड़ा और आज उनके जाने की खबर से प्रशंसकों और कलाकारों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है क्योंकि जिसने 35 साल तक लोगों का जीत दिल, आज उसका हो गया निधन। दोस्तो ये खबर उत्तराखंड के लोकसंगीत की दुनिया में हड़कंप मचा देने वाली है और यकीन में मानिये हजारों दिनों को तोड़ने वाली है और आंखों को नम करने वाली है। दोस्तो हाल में आपने एक गाना खूब सुना होगा गुनगुनाया होगा। द्वी दीना का ड्यार शेरुआ यो दूनी में ना त्यारा न म्यार शेरुआ यो दुनि में। अजय दीवान का ये गीत काफी लोक प्रिय रहा। आज एक दुखद खबर ये मिली की अयज दीवान की जोड़ी टूट गई, क्योंकि अल्मोड़ा जिले के रहने वाले उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक दीवान कनवाल ने बुधवार की सुबह खत्याड़ी स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।
दोस्तो दीवान कनवाल का अंतिम संस्कार बेतालेश्वर घाट पर हुआ। दीवान कनवाल के निधन के बाद लोक कलाकारों में शोक की लहर दौड़ गई है। वही, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रसिद्ध लोक कलाकार दीवान कनवाल के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि दीवान कनवाल ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक संगीत को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। साथ ही दोस्तो मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि दीवान कनवाल का निधन उत्तराखंड की लोक कला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों एवं उनके प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है। इसके अलावा राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने भी प्रसिद्ध लोक कलाकार दीवान कनवाल के निधन पर दुःख व्यक्त किया है। राज्यपाल ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। अल्मोड़ा के पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान ने भी लोकगायक दीवान कनवाल को श्रद्धांजलि दी है। दोस्तो दीवान कनवाल की ‘द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनी में’ गीत काफी लोकप्रिय हुआ था। दीवान कनवाल की उम्र करीब 65 साल थी। बताया जा रहा है कि दीवान पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। हल्द्वानी स्थित एक निजी अस्पताल में कुछ समय से उनका इलाज चल रहा था। इसके बाद वो अपने खत्याड़ी स्थित आवास में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे, लेकिन बुधवार की सुबह चार बजे के आसपास उनका निधन हो गया। बात अगर दीवान कनवाल के परीवार की करूं तो दीवान कनवाल के दो बेटे और दो बेटियां हैं। उनका बड़ा बेटा अल्मोड़ा में ही निजी नौकरी करता है, जबकि छोटा बेटा मुंबई में कार्यरत है। उनकी पत्नी का बहुत पहले निधन हो चुका था। वर्तमान में उनके घर में वृद्ध मां और बड़ा बेटा रहते हैं। जिला सहकारी बैंक से रिटायर होने के बाद दीवान कनवाल लोकगीतों के सृजन में पूर्णतः समर्पित हो गए थे।
दोस्तो अभी बीते साल की ही तो बात है उन्होंने शेर दा अनपढ़ की याद ताजा करता एक गीत रचा, जो बेहद लोकप्रिय हुआ। दीवान कनवाल जीवन की क्षणभंगुरता को भावपूर्ण ढंग से उकेरते थे। उनके गीत ‘दो दिनों का ड्यार शेरुवा यो दूनी में, ना त्यार ना म्यार शेरूवा यो दुनि में’ आज भी श्रोताओं के दिलों में बसा है। लोक समुदाय ने उनके योगदान को सलाम करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं कुमाऊंनी संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। दोस्तो दीवान सिंह कमवाल जिला सहकारी बैंक अल्मोड़ा में सीनियर ब्रांच मैनेजर के पद से वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त हुए थे, अब हमारे बीच नहीं रहे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह कुमाऊँनी लोकगीतों के सृजन और संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया था। उनके लोकप्रिय गीत ‘दो दिनों का ड्यार शेरुवा यो दूनी में, ना त्यार ना म्यार शेरूवा यो दुनि में’ लोगों के बीच बेहद चर्चित रहे। उनकी आवाज़ में कुमाऊँ की वादियों की मिठास, पहाड़ों की सादगी और लोकजीवन की गहराई साफ झलकती थी। दोस्तो दीवान कनवाल ने आज कुंछे मेत जां, हिट मेरी रंगीली और त्यार पहाड़ म्यार पहाड़ जैसे गीतों के माध्यम से कुमाऊँनी लोकसंगीत को नई पहचान दिलाई।
इसके अलावा दोस्तो दीवान कनवाल लोकगायक और पत्रकार अजय ढोडियाल के साथ मिलकर “शेर दा अनपढ़” की यादों को ताज़ा करता एक भावपूर्ण गीत भी गाया, जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था लेकिन आज उनके निधन की खबर से अल्मोड़ा सहित पूरे कुमाऊँ क्षेत्र में शोक की लहर है। स्थानीय नागरिकों, लोक कलाकारों और कुमाऊँनी संस्कृति प्रेमियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है, लेकिन दोस्तो बात अगर उनके गीतों की होगी तो बचपन में रेडियो से गीत आता था “ओ नंदा सुनंदा तू दैणी है जाए” उसके बाद वीसीडी का जमाना आया तो “आज कुछि मैत जा ” और “के लेखूं अपणा हिया का हाल” जैसे गाने काफी लोकप्रिय रहे । बलि वेदना फिल्म में गाया गया उनका गीत “हिमाले सुकीली काया ” भी लोगों की जुबां पर छाया रहा। बताते चलें कि सन 1980 में आकाशवाणी नजीबाबाद से संगीत में बी ग्रेड किया। रामलीला से जुड़े रंगमंच के क्षेत्र से और यही से संगीत जगत की शुरुआत हुई। वर्तमान में आकाशवाणी दूरदर्शन के ए ग्रेड के कलाकार थे। इसके साथ ही अल्मोड़ा आकाशवाणी में उनकी कई गीतों की रिकॉर्डिंग हैं और अक्सर प्रसारित होती रहती हैं।दोस्तों, आज हमने जाना कि कैसे एक महान लोकगायक ने अपनी मधुर आवाज़ से पहाड़ की संस्कृति को संजोया और अब वह हम सब से हमेशा के लिए विदा हो गए हैं। उनके गीतों में बसी वो मिठास और भावनाएँ हम सबके दिलों में सदैव जीवित रहेंगी। इस कठिन समय में हम उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति दे।