देहरादून: उत्तराखंड भले ही अपराध के लिहाज से एक शांत प्रदेश के रूप में जाना जाता हो, लेकिन यहां हजारों मौतों का एक ऐसा रहस्य भी है, जिनसे प्रदेश की पुलिस आज तक पर्दा नहीं उठा पाई है। मौतों की यह पहेली पिछले 22 सालों से बदस्तूर जारी है। हैरानी की बात यह है कि हजारों लाशों की यह संख्या हर साल एक नया रिकॉर्ड बना रही है। राज्य में ये आंकड़ा 4500 पार पहुंच गया है, मगर अभी तक इस पर सस्पेंस बरकरार है। प्रदेश में मिलने वाले अज्ञात शव कहीं न कहीं उत्तराखंड पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। क्या है राज इन अज्ञात शवों का?
हालांकि पुलिस ने अज्ञात शवों के मामले को दर्ज जरूर किया है और कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले इस बात का इंतजार किया कि इन शवों की शिनाख्त करने के लिए इनके परिजन आएंगे, लेकिन एक समय गुजरने के बाद पुलिस ने इन शवों का दाह संस्कार कर दिया। फिर भी सवाल यह है कि आखिर उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में पिछले 22 सालों में क्यों अज्ञात शव अलग-अलग जगहों पर पुलिस को बरामद हुए हैं। उत्तराखंड पुलिस के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर वी. मुरुगेशन का मानना है कि इसके अलग-अलग कारण हो सकते हैं, लेकिन एडीजी का कहना है कि उत्तराखंड पर्यटन प्रदेश है। यहां पर बाहरी लोगों का बहुत आना-जाना है। वहीं अपना अपराध छिपाने के लिए दूसरे राज्यों से यहां अपराधी किस्म के लोग आते हैं।
उत्तराखंड में अल्मोड़ा में 29, बागेश्वर में 27, चमोली में 72, चंपावत में 152, देहरादून में 820, हरिद्वार में 1,396, नैनीताल में 594, पिथौरागढ़ में 19, पौड़ी में 326, रुद्रप्रयाग में 623, टिहरी में 217, उधम सिंह नगर में 379, उत्तरकाशी में 49 अज्ञात शव मिले हैं। वहीं इस मामले में उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड आईजी दीपक कुमार का मानना है कि यह सच है कि उत्तराखंड जैसे पर्यटन राज्य और उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल से जुड़ी सीमा होने के चलते कई बार वहां के अपराधी अपने साक्ष्य छिपाने के लिए शवों को बॉर्डर के इस पार फेंक कर चले जाते हैं, लेकिन रिटायर्ड आईजी दीपक कुमार का मानना है कि इतनी बड़ी तादाद में शवों का मिलना एक गंभीर बात है। जो अज्ञात शव मिले हैं, यह कहीं न कहीं से गायब हुए हैं। इस पर पुलिस को जांच करनी चाहिए।