हड़ताल पड़ी भारी! लटकी कार्रवाई की तलवार? | Government Action | Engineers Strike | Uttarakhand News

Spread the love

उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक एक्शन! हड़ताल के बाद सरकार सख्त, 134 इंजीनियरों पर बर्खास्तगी की तलवार लटक गई है। अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे इंजीनियरों को अब नोटिस थमा दिया गया है, जिससे पूरे सिस्टम में हड़कंप मच गया है। क्या ये कार्रवाई आगे और तेज होगी या फिर मामला बातचीत से सुलझेगा? इंजीनियर्स ने आखिर ऐसा क्या किया की सीधे बर्खास्तगी हो रही है। दोस्तो ये खबर हैरान करने वाली है और परेशानी इन हड़ताली इंजीनियर की बढ़ाने वाली है जो बीते 19-20 दिन से हड़ताल पर हैं और सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं, तो प्रदेश में 134 इंजीनियरों पर सेवा समाप्ति की तलवार लटक चुकी है। दोस्तो यहां आपको बता दूं कि उत्तराखंड में सिंचाई विभाग के डिप्लोमा इंजीनियर विभिन्न मांगों को लेकर बीते 23 मार्च से हड़ताल पर हैं। इनमें मैकेनिकल के 60 जबकि सिविल शाखा के 74 कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं। दोस्तो हड़ताल के कारण विभागीय कार्य लगभग ठप हो चुके हैं। इससे विकास कार्यों पर गहरा असर पड़ रहा है, निर्माणाधीन कार्य पूरे नहीं होने से अफसरों पर भारी दबाव पड़ रहा है। इसी को देखते हुए अब प्रमुख अभियंता सुभाष चंद्र ने हड़ताल पर चल रहे सभी 134 इंजीनियरों को नोटिस जारी कर दिए है। नोटिस के माध्यम से इन इंजीनियरों को सेवा समाप्ति की चेतावनी दी गई है, लेकिन दोस्तो आखिर इन सड़क पर मोर्चा खोले इनजीनियर ऐसा क्या मांग रहे हैं जिससे उनको ऊपर ये बर्खास्तगी वाला एक्शन हो रहा है वो पहले बताता हूं। थोड़ा गौर कीजिएगा।

तो दोस्तो अपनी 27 सूत्रीय मांगों को लेकर उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियरो की अनिश्चितकालीन हड़ताल। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर महासंघ उधम सिंह नगर की अध्यक्ष ज्योति रावत अपने तीखे स्वर में कहा कि उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले यह अनिश्चितकालीन आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी मांगे पूरी नहीं करती। इतना ही नहीं इस मौके पर पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता परवेज आलम ने बताया कि हमारी 27 सूत्रीय मांगों में विभिन्न विभागों के अभियंता महासंघ की प्रमुख मांगों में पात्रता के अनुसार वेतन विसंगति दूर करना और तीन पदोन्नति प्रदान करना शामिल है, उन्होंने पत्रकारों को बताया कि सरकारअभियंताओं को 2 करोड़ रुपए तक सामूहिक दुर्घटना बीमा का लाभ दे और पूर्व की भांति स्थानांतरण नीति लागू करे। दोस्तो इस दौरान डिप्लोमा इंजीनियरो ने कहा कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। इस दौरान उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले समस्त इंजीनियरो ने नारे बाजी करते हुए सरकार को चेताया कि अगर सरकार उनकी इन मांगों को आति शीघ्र संज्ञान नहीं लेती है तो इस अनिश्चितकालीन प्रदर्शन को और उग्र किया जाएगा।

दोस्तो इधर उत्तराखंड में हड़ताल के कारण सिंचाई विभाग की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के काम ठप हैं। विभाग ने इसे राजकीय हित के विपरीत और अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना है। विशेष रूप से उन अभियंताओं को कड़ा नोटिस दिया गया, जिनकी नियुक्ति सितंबर 2024 में हुई थी। वह दो साल की परिवीक्षा अवधि पर चल रहे हैं। सिंचाई विभाग का कहना है कि हड़ताल में शामिल होना राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली का स्पष्ट उल्लंघन है। इसी को देखते हुए विभाग इंजीनियरों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। दोस्तो अभियंताओं की हड़ताल से विभागीय कार्य ठप हो चुके हैं। प्रमुख अभियंता सुभाष चंद्र की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि क्यों न उनकी परिवीक्षा अवधि खत्म करते हुए सेवाएं समाप्त की जाएं? विभाग ने सभी इंजीनियरों को निर्देशित किया है कि वे अपना स्पष्टीकरण तत्काल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। इससे अब डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ में भी हड़कंप की स्थिति है। उत्तराखंड में डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की हड़ताल से पेयजल निगम के कामों पर भी असर पड़ने लगा है। जल निगम के अधिशासी अभियंताओं ने उच्च स्तर पर हड़ताल के प्रभाव की जानकारी दी है। साफ किया है कि यदि हड़ताल और आगे बढ़ी तो सप्लाई पर असर पड़ेगा। जल निगम की कई योजनाएं अभी जल संस्थान को हैंडओवर नहीं हैं। इन योजनाओं के संचालन का जिम्मा जिन डिप्लोमा इंजीनियरों पर है, वे इन दिनों हड़ताल पर चल रहे हैं।