जी हां दोस्तो एक बड़ी खबर उत्तराखंड के हल्द्वनी के बनभूलपुरा को लेकर सुप्रीम कोर्ट से आई है। जहां जहां सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया हल्द्वानी बनभूलपुरा में रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाया जाएगा4500 मकान और 5236 परिवार होंगे प्रभावित, 19 मार्च से पुनर्वास कैंप शुरू होगा। पूरी खबर मैरी इस रिपोर्ट में दिकिए पूरी खबर। दोस्तो नैनीताल जिले के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाया जाए। कोर्ट के इस फैसले से हजारों परिवार को अब अपना घर खाली करना होगा। दोस्तो सीजेआई के बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि यह रेलवे की जमीन है, इसे रेलवे अपने हिसाब से इस्तेमाल करेगा। यही नहीं जिन लोगों के घर तोड़े जाएंगे, उनको राज्य सरकार योजनाओं के तहत भी आवास दे सकती है, इसके लिए 19 मार्च से कैंप लगाए जाएंगे। दोस्तो अब सवाल इस बात का कि सुप्रिम कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद क्या होगा कितने हैं मकान, कितने हैं परिवार जो इस फैसले से प्रभावित होने वाले हैं इस पर थोड़ा गौर कीजिए दोस्तो, रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर भूमि पर वर्षों से अतिक्रमण था। इस भूमि पर करीब 4500 मकान बने हैं, जिनमें 5236 परिवार रहते हैं।
यानी कि दोस्तो कुल मिलाकर हजारों की संख्या में आबादी इस इलाके में रहती हैm ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बहुत ही महत्वपूर्ण है। दोस्तो आपको यहां बता दूं कि साल 2022 में नैनीताल हाईकोर्ट ने बनभूलपुरा क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रभावित पक्षों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायक की गई थी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट और राज्य सरकार ने कहा है कि अगले 6 महीने तक विस्थापित परिवार को दो-दो हजार रुपये दिए जाएंगे हालांकि कोर्ट ने मामले की दोबारा सुनवाई के लिए अप्रैल का समय दिया है। लेकिन दोस्तो एक बार ये भी देख लीजिए कि क्या बोला सुप्रीम कोर्ट दोस्तो सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम आदेश ये जमीन रेलवे की है और उसे अधिकार है कि वो अपनी जमीन का यूज कैसे करे। साथ ही परिवारों की पहचान किया जाए जो इससे प्रभावित होंगे। बलभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाए जाएंगे। गरीब, अल्प आय वर्ग वाले लोगों की सर्वे के तहत पहचान की जाए कि उन्हें पुनर्वास के तहत रहने के लिए घर दिए जा सकते हैं या नहीं। साथ ही प्रभावित लोगों को अगले 6 महीने तक दो-दो हजार रुपये दिए जाएंगे। दोस्तो सुप्रीम कोर्ट में हल्द्वानी के बनभूलपुरा स्थित रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले पर सुनवाई के दौरान रेलवे और उत्तराखण्ड सरकार ने मुख्य न्यायाधीश श्री सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉय माला बागची की पीठ के समक्ष अपना हलफनामा पेश किया। दोस्तो मामले में पुनर्वास, मुआवजा और भूमि स्वामित्व को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।
दोस्तो रेलवे की ओर से अदालत को बताया गया कि कुल 13 ऐसे मामले हैं जिनमें भूमि फ्रीहोल्ड श्रेणी की है और उन मामलों में मुआवजा दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अतिरिक्त, जिन लोगों को रेलवे भूमि से हटाया गया है, उनके लिए राज्य सरकार द्वारा वैकल्पिक आवासीय व्यवस्था मुहैया कराने का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया है। दोस्तो रेलवे ने अदालत में कहा कि जिन लोगों को हटाया गया, वे सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से रह रहे थे। यह निजी भूमि नहीं बल्कि रेलवे की संपत्ति है। इसके बावजूद मानवीय आधार पर मुआवजे का प्रस्ताव दिया जा रहा है। रेलवे ने यह भी अनुरोध किया कि हटाए गए लोगों के पुनर्स्थापन की मांग वाली याचिका को खारिज किया जाए। हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र से जुड़े इस मामले पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। भूषण ने कहा कि हाईकोर्ट में जनहित याचिका नदी में खनन को रोकने के लिए थी। जहां लोगों को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर रहने वाला बताया गया और फिर रेलवे ने अपने विस्तार प्रोजेक्ट के नाम पर हटाया गया दोस्तो प्रशांत भूषण ने कहा कि बगल में एक ख़ाली ज़मीन जो 30 एकड़ से ज़्यादा है, वो है। इसके पास उन्हें हटाया गया। दोस्तो इस पर सीजेआई ने कहा कि आप सार्वजनिक भूमि पर ऐसे दावा कर रहे हैं। जैसे मालिकाना हक हो, जबकि अनाधिकृत तरीक़े से रह रहे थे।
दोस्तो इतना ही नहीं सीजेआई ने एएसजी ऐश्वर्या भाटी से पूछा कि आपके सरकारी आवास देने का प्रस्ताव क्या है।रेलवे वकील सुश्री भाटी ने कहा कि तीन कैटेगरी हैं ईडब्ल्यूएस, लो कैटेगरी और सेमी लो कैटेगरी है जिसमें आवास दिया जाएगा। तो दोस्तो, सुप्रीम कोर्ट के इस अहम फैसले ने बनभूलपुरा के 5236 परिवारों के भविष्य पर बड़ा असर डाला है। अब रेलवे की 30 हेक्टेयर भूमि से अतिक्रमण हटाया जाएगा और प्रभावित लोगों के लिए राज्य सरकार द्वारा 19 मार्च से पुनर्वास कैंप भी लगाए जाएंगे हालांकि कोर्ट ने अगले छह महीनों तक आर्थिक मदद देने और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है, लेकिन सवाल ये है कि इस बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पुनर्वास कब और कैसे मिलेगा। दोस्तो, यह मामला केवल जमीन का नहीं बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्पष्ट है – रेलवे की जमीन का अधिकार और अनुचित कब्ज़ा हटाना जरूरी है, साथ ही प्रभावितों के अधिकारों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए..अब सबकी निगाहें राज्य सरकार और प्रशासन पर हैं कि वे समय रहते ठोस कदम उठाकर बनभूलपुरा में कानून और व्यवस्था के साथ-साथ लोगों के पुनर्वास को भी सुचारू रूप से अंजाम दें।