Tehri में पढ़ाने वाला विभाग शर्मसार ! | Uttarakhand News | Tehri |

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उत्तराखंड का शिक्षा विभाग, जहाँ संस्कार और ज्ञान की बात होती है, आज वही विभाग एक बड़े विवाद के घेरे में है! बड़े अधिकारी का नाम सामने है और आरोप इतने गंभीर कि सुनकर हर कोई दंग रह जाए। महिला कर्मचारियों और शिक्षिकाओं ने जो कहा है, वो सवाल खड़े करता है पूरे सिस्टम पर अश्लील बातें करने के आरोप वेतन रोकने की धमकी पढ़ाने वाला विभाग आज क्यों शर्मसार है? दोस्तो क्या सच में पद की ताकत बन गई महिलाओं पर दबाव का हथियार? ये मैं इस लिए पूछ रहा हूं क्योंकि जो खबर मेरे सामने टिहरी से आई वो चौका देने वाली है। दोस्तो टिहरी गढ़वाल के जाखनीधार ब्लॉक से जुड़े एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। दावा किया जा रहा है कि शिक्षा विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी पर महिलाओं के साथ बदतमीजी, मानसिक प्रताड़ना, अनैतिक दबाव डालने और बात न मानने पर तनख्वाह रोकने जैसे गंभीर आरोप हैं। मामला सामने आते ही विभाग में हलचल मच गई है और सवाल उठने लगे हैं—क्या सच में शिक्षा का मंदिर ही महिलाओं के लिए डर और डरावनी परिस्थितियों का केंद्र बन गया है? दोस्तो यह प्रकरण बेहद संवेदनशील और गंभीर है। ऐसे मामलों में अफवाहें फैलाना या सोशल मीडिया ट्रायल करना किसी भी हालत में उचित नहीं है। प्रशासन और विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह तुरंत निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराए, पीड़िताओं के बयान सुरक्षित और डर-भय से मुक्त माहौल में दर्ज हों, वीडियो और पूरे घटनाक्रम की सत्यता की पुष्टि हो, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों को कड़ी सजा मिले। इससे न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक स्पष्ट संदेश भी जाएगा कि कोई भी पद और सत्ता का दुरुपयोग कर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार नहीं कर सकता।

दोस्तो मामले की गंभीरता इस तथ्य से भी जाहिर होती है कि जाखनीधार ब्लॉक की एक महिला शिक्षिका, मंजली आर्य, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रोशन आर्य पर मानसिक शोषण और अश्लील संदेश भेजने के आरोप लगाए हैं। आरोप हैं कि वर्षों से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, अश्लील संदेश भेजे गए, शारीरिक संबंध का दबाव बनाया गया और पैसों की मांग भी की गई। इतना ही नहीं, हालात बिगड़ने पर उन्हें चार महीने की सैलरी रोकी गई और दूरस्थ विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया। पीड़िता ने बताया कि लगातार प्रताड़ना और दबाव के कारण वह लंबे समय से अवसाद में हैं। उधर पुलिस ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच महिला उपनिरीक्षक के नेतृत्व में चल रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। यह मामला शिक्षा विभाग और शासन के लिए गंभीर चेतावनी है। यह स्पष्ट करता है कि केवल पद और सत्ता का होना किसी को भी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने का अधिकार नहीं देता। समाज और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर कर्मचारी सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में काम कर सके। सोशल मीडिया और वायरल वीडियो ने मामला प्रकाश में लाया, लेकिन केवल कार्रवाई ही न्याय दिला सकती है। समय रहते दोषियों को सजा देना, पीड़िताओं की सुरक्षा और सम्मान की गारंटी देना—यही इस विवाद का अंतिम और निर्णायक पक्ष होना चाहिए। इससे भी बड़ा सवाल उठता है—क्या शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारी इस घटना से सबक लेंगे, या फिर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और सत्ता का दुरुपयोग सामान्य बात बनकर रह जाएगा? जाखनीधार ब्लॉक का यह मामला अब पूरे राज्य की नज़रों में है और प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उत्तराखंड में शिक्षा के मंदिर में क्या सच में यही स्थिति है, या जल्द ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, यह मामला न केवल शिक्षा विभाग की छवि पर सवाल उठाता है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की गारंटी पर भी गंभीर चेतावनी देता है।