उत्तराखंड में एक और बड़ा हादसा लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं कि बस खाई में गिरी, आख़िर कैसे गिरी? क्या कमजोर डंगा बस का वजन नहीं सह पाया? क्या पास देना इस हादसे की वजह बना? या फिर लापरवाही ने एक बार फिर ज़िंदगियों को खतरे में डाल दिया? हिमाचल रोडवेज की बस, सैकड़ों मीटर गहरी खाई और पीछे छूट गए जवाबों से भरे सवाल। Dehradun HRTC Bus Accident हादसे के पीछे की असली वजह, और वो चूक — जिसने सफर को मातम में बदल दिया। दोस्तो देहरादून जिले के चकराता इलाके में स्थित क्वानू इलाके में मंगलवार को हुए बस हादसे का प्रथम दृष्टया कारण पता चल गया है। दरअसल हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस के चालक ने संकरी जगह पर सामने से आ रहे दूसरे वाहन को पास देने की गलती कर दी थी। उस वाहन को पास देते समय बस सड़क से बाहर कच्ची जगह पहुंच गई। बस का ड्राइवर अंदाजा नहीं लगाया पाया कि सड़क के जिस हिस्से में उसने बस उतारी है, वो बहुत कच्चा है। कच्चा डंगा (सड़क की दीवार) बस का वजन नहीं सह सका और दीवार टूट गई। दीवार टूटते ही बस असंतुलित होकर करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। HRTC बस हादसे में अब तक 3 लोगों की जान जा चुकी है। तीन लोगों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया था। बस में ड्राइवर कंडक्टर समेत 36 लोग सवार थे ऐसा बताया गया हैं। चरकराता की एसडीएम भी हादसे का पता चलते ही दुर्घटनास्थल पर पहुंची। तब कह गया कि
बस दुर्घटना की सूचना मिलते ही मौके पर प्रशासन की टीमें भेजी गई थी। बस हिमाचल पथ परिवहन निगम की है। इसमें ड्राइवर, कंडक्टर सहित करीब 36 लोग सवार थे। मौके पर तीन की मौत है गई है। इसमें दो महिलाएं और एक पुरुष हैं। पंचायत नामा कर पोस्टमार्टम की कार्रवाई मौके पर ही की गई है। एसडीआरएफ और एसडीएम चकराता ने बताया कि बस में ड्राइवर और कंडक्टर समेत कुल 36 लोग थे। हिमाचल रोडवेज की बस का नंबर HP66A-2588 है। इनमें से 12 लोग घायल हैं। घायलों को विकासनगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। एसडीआरएफ ने पहले चार लोगों की मौत बताई थी। बाद में उनका स्पष्टीकरण आया कि गलती से चार लोगों की मौत बताई गई। तीन लोगों की मौत हुई है। इन टीमों ने किया रेस्क्यू: हादसे के बाद सूचना प्राप्त होते ही SDRF की टीमें पोस्ट चकराता, त्यूणी एवं डाकपत्थर से तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं और रेस्क्यू कार्य प्रारंभ किया गया। दुर्घटनास्थल राजस्व क्षेत्र में स्थित है। घटना की गंभीरता को देखते हुए वाहिनी मुख्यालय जौलीग्रांट में सेनानायक SDRF अर्पण यदुवंशी द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं इस बड़े हाससे पर प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत मंत्री ने दुख जाहिर किया इस सड़क हादसे को बेहद दुखत बताया। दोस्तो हिमाचल के नेरवा से पांवटा जा रही हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस हरिपुर मीनस मोटर मार्ग पर क्वानू गांव के समीप सुखोई खड्ड के पास एक ट्रक को पास देते समय करीब 100 मीटर गहरी खाई में दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
मौके पर तीन लोगों की मौत हो गई थी। घायलों को विकासनगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बस दुर्घटना की खबर लगते ही पास के क्वानू गांव के स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस और एसडीआरएफ के आने से पहले ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था। जैसे ही हादसे की खबर उत्तराखंड पुलिस को मिली, उनकी टीम मौके पर पहुंच गई। उत्तराखंड पुलिस ने हिमाचल प्रशासन को भी बस हादसे की सूचना दी. हिमाचल से भी प्रशासनिक टीम दुर्घटनास्थल पर पहुंची। वहीं दोस्तो एक महत्वपू्रण जानकारी ये कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में ज्यादातर स्थानों पर सड़कें संकरी हैं। ऐसे में दूसरे वाहन को पास देना जोखिम भरा होता है। हिमाचल पथ परिवहन निगम के ड्राइवर ने सुखोई खड्ड के पास ट्रक को पास देने की गलती कर दी। ट्रक की चौड़ी भी बस जैसी ही होती है ऐसे में पास देते समय सड़क कम पड़ी तो बस के ड्राइवर ने कच्चे स्थान पर बस काट दी। कच्चे स्थान की कच्ची दीवार बस का वजन नहीं सह सकी और भरभराकर गिर गई। इसके साथ ही बस भी लुढ़कते हुए सौ मीटर गहरी खाई में लुढ़कने के बाद सुखोई गदेरे (पहाड़ी नाला) में जा गिरी। गनीमत रही कि गदेरे में पानी कम था, नहीं तो ये हादसा बड़ा रूप ले सकता था तो अब सवाल साफ़ हैं। क्या इस हादसे की वजह सिर्फ कमजोर डंगा था, या फिर सिस्टम की वो पुरानी लापरवाही, जिसकी कीमत हर बार आम लोग चुकाते हैं? अगर डंगा कमजोर था, तो उसे पहले क्यों नहीं सुधारा गया? अगर पास देना जरूरी था, तो क्या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई?