Vehicle Theft in Haridwar: हरिद्वार में वाहन चोरों ने पिछले लंबे समय से आतंक मचाया हुआ है। अब तक पुलिस द्वारा पकड़े गए अधिकतर वाहन चोरों से पूछताछ में एक ही बात सामने आ रही है कि चोरी की वारदात सिर्फ यह लोग नशे की लत को पूरा करने के लिए किया करते थे। बीते 79 दिन में जिले से 103 दोपहिया चोरी हो गए हैं। वाहनों की ई-एफआइआर के चलते यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। पहले थाने में मुकदमा दर्ज करवाने के लिए कई माह तक पीड़ित तहरीर लेकर घूमता था। अपराध के लिहाज से हरिद्वार जिला बेहद संवेदनशील है। जिले में सबसे अधिक घटनाएं वाहन चोरी की होती हैं।
पहले वाहन चोरी के मामले में पीड़ित तहरीर लेकर थाने जाता था। यहां पुलिस पहले तो कई दिन तक उसे इधर-उधर टरकाती रहती थी, बिना सिफारिश वाहन चोरी का मुकदमा ही नहीं लिखा जाता था। कई पीड़ित तो ऐसे होते थे कि पुलिस उनकी तहरीर रिसीव कर लेती थी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं करती थी। इसी बीच उत्तराखंड सरकार की ओर से स्मार्ट पुलिसिंग के तहत ई-एफआइआर की सुविधा दी गई। इसके बाद से लगातार मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। 15 दिसंबर को भी एक मुकदमा दर्ज हुआ है। इस तरह से कुल 103 वाहन चोरी के मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में वाहन चोरी की घटनाएं होने से अधिकारी भी हैरान हैं।
हरिद्वार जिले में इतनी बड़ी संख्या में वाहन चोरी वास्तव में गंभीर है, हालांकि पुलिस की ओर से वाहनों की बरामदगी भी की गई है। जब ई-एफआइआर आया है, तबसे वाहन चोरी के शत-प्रतिशत मुकदमे लिख जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का भी जोर इस बात पर है कि अधिक से अधिक ई एफआइआर दर्ज हों। इस संबंध में हरिद्वार के कप्तान को निर्देशित किया गया है कि वाहन चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। जो मुकदमे दर्ज हैं उनकी सही से विवेचना करते हुए वाहनों की बरामदगी सुनिश्चित की जाए।