उत्तराखंड में तबाही की दो बड़ी तस्वीरें| Rudraprayag | Uttarakhand News | Cloudburst | Breaking News

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उत्तराखंड में तबाही की कई तस्वीरें आपके सामने आई होंगी, मै भी दिखा रहा हूं। तबाही का वो मंजर लेकिन दो बड़ी तस्वीरें इसे आपने दिखाया नहीं होगा और अगर दिखाया होगा तो इसके बारे में बताया नहीं होगा। Uttarakhand Disaster Live Update जी हां कपकोट में विवादित रेस्क्यू, तो दूसरी हरिद्वार में बहती कार। बताऊंगा आपको प्रशासन की चौती के बारे में भी। दगड़ियो, उत्तराखंड, जो एक ओर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्त्व के लिए जाना जाता है, वहीं हर साल मानसून के दौरान यहां प्राकृतिक आपदाओं का कहर भी देखने को मिलता है। इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं, लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने पहाड़ों से लेकर मैदानी जिलों तक जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। जो दो तस्वीरों का जिक्र कर रहा हूं य़े दिनों दो घटनाएं विशेष चर्चा में हैं। कपकोट में विधायक सुरेश गड़िया के रेस्क्यू का वीडियो, जिसमें SDRF की मौजूदगी के बावजूद उनका गनर नाटकीय अंदाज़ में तस्वीर में आकर 20 मीटर दूर तक बहता दिखाई देता है और दूसरी, हरिद्वार के भीमगोडा क्षेत्र में सूखी नदी के अचानक उफान में एक कार के बह जाने की घटना, जिसने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी। चलिए दगड़ियों पहली तस्वीर का जिक्र करता हूं जो बेहद ही हसाने वाली है लेकिन मामला सवेदनशील है पहाड़ में परेशानी का सैलाब आया है लेकिन ऐसी क्या जरूत पड़ गई होगी इन महासय को कि बीच में घुसने की मदद और मीडिया स्टंट का विशलेषण करता हूं। कपकोट के इस रेस्क्यू का, दगड़ियो उत्तराखंड के बागेश्वर ज़िले के कपकोट क्षेत्र में बारिश के कारण कई जगहों पर हालात गंभीर हो गए हैं।

इसी बीच, कपकोट विधायक सुरेश गड़िया का एक वीडियो सामने आया जिसमें उन्हें बचाया जा रहा था। वीडियो में दिख रहा है कि SDRF की टीम पहले से राहत कार्य में लगी थी, लेकिन तभी एक गनर अचानक फ्रेम में आता है और 20 मीटर तक पानी में बहता हुआ नज़र आता है। ये दृश्य लोगों के लिए हैरान करने वाला रहा, सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल होते ही सवाल उठने लगे। जब विशेषज्ञ टीम मौजूद थी, तो गनर को कूदने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या ये कोई वास्तविक प्रयास था या कैमरे के सामने बहादुरी दिखाने की कोशिश? क्या इस तरह की कार्रवाई राहत कार्य को बाधित नहीं करती? स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी हरकतें SDRF जैसी प्रशिक्षित एजेंसियों के काम में हस्तक्षेप करने के बराबर हैं। ये भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं यह राजनीतिक दिखावा तो नहीं, ताकि मीडिया में “नायकत्व” स्थापित किया जा सके खैर जो भी गनर को बचा लिया गया। प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह घटना यह सोचने पर मजबूर जरूर कर रही है कि आपदा प्रबंधन के दौरान संयम और प्रक्रिया का पालन कितना ज़रूरी है। दगड़ियो अब दूसरी तस्वीर का जिक्र करता हूं। हरिद्वार की सूखी नदी में आया उफान, बहती कार ने बढ़ाई चिंता।

दोस्तो दूसरी घटना उत्तराखंड के मैदानी इलाके, हरिद्वार के भीमगोडा क्षेत्र की है। यहां जिस नदी को आमतौर पर लोग “सूखी नदी” कहते हैं, उसमें हालिया भारी बारिश के चलते अचानक पानी का बहाव इतना तेज हुआ कि एक कार बहती हुई दिखाई दी। ये घटना कैमरे में कैद हो गई और वीडियो के वायरल होते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया, प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए। लोगों को नदी के किनारे जाने से मना किया, बच्चों को भी वहां न भेजने की अपील की, और क्षेत्रीय निवासियों को अलर्ट पर रहने की सलाह दी। दोस्तो यहां बता दूं कि बीते साल भी इसी क्षेत्र में ऐसी ही स्थिति बनी थी, जिसमें दर्जनों वाहन तेज बहाव में बह गए थे। सवाल उठता है कि जब ऐसा अतीत में हो चुका है, तो प्रशासन ने स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला?क्या सिर्फ चेतावनी देना ही पर्याप्त है? दोस्तो उत्तराखंड में हो रही भारी बारिश का असर सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे राज्य में देखा जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़कों का टूटना, और संचार व्यवस्थाओं पर असर जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। वहीं, मैदानी जिलों में बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ जैसे हालात बनते जा रहे हैं। सरकार की आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियां—जैसे SDRF, NDRF और स्थानीय पुलिस—सक्रिय तो हैं, लेकिन कई बार स्थिति की गंभीरता और स्थानीय लापरवाही राहत कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना देती है।