उत्तराखंड के युवाओं ने एक बार फिर देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा UPSC Civil Services Examination में अपनी मेहनत और प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस सफलता पर प्रदेश के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है, असली सफर तो अब शुरू होता है। मुख्यमंत्री धामी ने खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद पहाड़ के बेटे-बेटियां अपनी मेहनत और संकल्प से बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरे प्रदेश को अपने इन युवाओं पर गर्व है और उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। आखिर क्या संदेश दिया मुख्यमंत्री ने ग्रामीण युवाओं को और क्यों इस सफलता को बताया नई शुरुआत। दोस्तो संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में उत्तराखंड की बेटियों ने शानदार सफलता हासिल कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। इसी में एक नाम आता है देभूमि की बेटी किच्छा की शांभवी तिवारी का शांभवी ने परीक्षा में 46वीं रैंक प्राप्त की, जबकि टिहरी गढ़वाल की मीनल नेगी ने 66वीं रैंक हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों प्रतिभाशाली बेटियों से फोन पर बात कर उन्हें बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
दोस्तों मुख्यमंत्री धामी ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि उत्तराखंड की बेटियों द्वारा संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि शांभवी तिवारी और मीनल नेगी की सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों बेटियां अपनी प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण के बल पर देश सेवा के मार्ग में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगी। वहीं दोस्तो दूसरी एक और बेटी जिसका नाम है मीनल नेगी मूल रूप से टिहरी जिले के चंबा ब्लॉक के दिवाड़ा गांव की रहने वाली हैं। वर्तमान में उनका परिवार देहरादून के मयूर विहार क्षेत्र में रहता है। मीनल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चंबा से प्राप्त की और वर्ष 2018 में 10वीं की परीक्षा 91.4 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद उनका परिवार देहरादून आ गया, दोस्तो जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने देहरादून के डीएवी पब्लिक स्कूल से इंटरमीडिएट की परीक्षा 98 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद देहरादून स्थित ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से बीएससी फिजिक्स ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की और डीएवी पीजी कॉलेज से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। मीनल के पिता प्रीतम सिंह नेगी टिहरी के डोबरा क्षेत्र में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता गीता नेगी गृहिणी हैं। उनके परिवार में एक बड़ा भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और छोटा भाई जेईई की तैयारी कर रहा है।
मीनल नेगी ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उपलब्धि हासिल की है। पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए यूपीएससी परीक्षा में 66वीं रैंक प्राप्त की। वहीं किच्छा की शांभवी तिवारी ने भी 46वीं रैंक हासिल कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उनकी सफलता से क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। प्रदेश में दोनों बेटियों की इस उपलब्धि को बड़ी प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है। खासतौर पर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं के लिए यह संदेश है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और लगन के दम पर बड़ी से बड़ी परीक्षा में सफलता हासिल की जा सकती है..दोस्तों, उत्तराखंड की बेटियों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अगर मेहनत, लगन और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। Shambhavi Tiwari और Meenal Negi की यह शानदार सफलता केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने भी इन दोनों बेटियों की उपलब्धि को प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बताया है। खासतौर पर पहाड़ और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए यह एक बड़ा संदेश है कि सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते, अगर इरादे मजबूत हों। उम्मीद है कि इन बेटियों की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देगी।