देवभूमि उत्तराखंड की प्रतिभा ने एक बार फिर पूरे देश को चौंका दिया है। संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की परीक्षा में उत्तराखंड के कई होनहार युवाओं ने शानदार सफलता हासिल कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। कठिन मानी जाने वाली इस परीक्षा में इन सितारों ने अपनी मेहनत, लगन और जुनून के दम पर परचम लहराया है। आज मै आपको बताउंगा उन युवाओं की कहानी, जिन्होंने सपनों को हकीकत में बदलते हुए देवभूमि का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया। दोस्तो कहा जाता है कि अगर लक्ष्य साफ हो और इरादे फौलादी, तो पहाड़ की दुर्गम राहें भी मंज़िल तक पहुंचने से नहीं रोक सकतीं। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के घोषित परिणामों ने एक बार फिर देवभूमि उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। मै सिलिसिलेवार तरीके से आपको बताउंगा कौन से जिले से कौन कितनी रैंक पाकर यूपीएससी में चमका है उत्तराखंड का सितारा शुरूआत उत्तरकाशी जिले से कर रहा हूं क्योंकि यहां से एक नहीं दो दो होनाहगारों ने दिखा दिया कि वो किसी से कम नहीं हैं।
दोस्तो उत्तरकाशी के रवांई क्षेत्र के दो होनहार युवाओं, ऋषभ नौटियाल और आशुतोष नौटियाल ने अपनी मेधा और कड़ी मेहनत के दम पर सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है.दोस्तो शुक्रवार को जैसे ही यूपीएससी के परिणाम घोषित हुए, रवांई और बनाल घाटी में खुशी की लहर दौड़ गई। पुरोला के सुनाली गांव निवासी ऋषभ नौटियाल ने 552वीं रैंक हासिल की है, वहीं बनाल पट्टी के गुलाड़ी गांव के आशुतोष नौटियाल ने 398वीं रैंक के साथ अपनी जगह पक्की की है। दोस्तो अगर ऋषभ नौटियाल की कहानी को देखता हूं तो ये सफर कुछ यूं रहा है द दून स्कूल से UPSC तक, ऋषभ नौटियाल का सफर। जी हां दोस्तो ऋषभ नौटियाल की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है जो शुरुआती दिनों से ही अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहते हैं। दोस्तो ऋषभ के पिता त्र्यंबक प्रसाद नौटियाल मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) में सहायक अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हैं और माता ललिता नौटियाल गृहिणी हैं। ऋषभ की शुरुआती शिक्षा देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान ‘द दून स्कूल’ से हुई, जहां उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने कानून की बारीकियों को समझने के लिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU), जोधपुर का रुख किया। वकालत की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का मन बना लिया था।
दोस्तो ऋषभ की यह सफलता उनके परिवार के संस्कारों और उनकी अपनी बौद्धिक क्षमता का परिणाम है। दूसरी ओर, बनाल पट्टी के गुलाड़ी गांव के आशुतोष नौटियाल की कहानी संघर्ष और ‘कभी हार न मानने’ वाले जज्बे की दास्तां है। आशुतोष के पिता विकासनगर में एक शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आशुतोष के लिए यह सफर इतना आसान नहीं था। इससे पहले भी उन्होंने तीन बार यूपीएससी की मुख्य परीक्षा दी, लेकिन अंतिम सूची में नाम नहीं आ सका। दोस्तो लगातार असफलताओं के बावजूद आशुतोष ने धैर्य नहीं खोया। उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और फिर से दोगुनी ताकत से तैयारी शुरू की। उनकी यह जिद और मेहनत ही थी कि उन्होंने चौथे प्रयास में न केवल परीक्षा पास की, बल्कि 398वीं रैंक लाकर यह साबित कर दिया कि निरंतर प्रयास करने वालों की कभी हार नहीं होती। दोस्तो इतना ही नहीं इससे ज्यादा चौकाने वाला एक और छात्र है जिसने इन दोनों को पीछे छोड़ दिया। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय के रई क्षेत्र में रहने वाले पाठक परिवार के लिए शुक्रवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। इस परिवार के बड़े बेटे आदित्य पाठक ने देश की सबसे प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। उन्होंने इस परीक्षा में 189वीं रैंक हासिल की। दोस्तो मूल रूप से बेरीनाग तहसील के उपराड़ा गांव के रहने वाले आदित्य ने इंटर तक की शिक्षा नगर के डान बास्को स्कूल से प्राप्त की।
इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में ऑनर्स पूरा किया। उन्होंने मुंबई से अर्थशास्त्र में मास्टर की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के दौरान ही वह यूपीएससी की तैयारियों में जुट गए थे। इसके लिए उन्होंने कोचिंग की मदद नहीं ली। टेस्ट सीरिज से अपनी तैयारियों में जुटे रहे। चौथे प्रयास में उन्हें सफलता हासिल हुई। आदित्य पाठक ने यूपीएससी में 189वीं रैंक प्राप्त की। दोस्तो आज हर कोई आदित्य, ऋषभ और आशुतोष की इस शानदार उपलब्धि पर उत्तरकाशी से लेकर पिथौरागढ़ तक हर कोई इन सितारों की बहादूरी की चर्चा कर रहा है। देवभूमि उत्तराखंड के उन होनहार युवाओं की प्रेरणादायक कहानियां, जिन्होंने अपनी मेहनत, धैर्य और मजबूत इरादों के दम पर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षा UPSC में सफलता हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उत्तरकाशी के ऋषभ नौटियाल और आशुतोष नौटियाल से लेकर पिथौरागढ़ के आदित्य पाठक तक, इन युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत सच्ची हो, तो पहाड़ की दूरियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। हमें उम्मीद है कि इनकी कामयाबी उत्तराखंड के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी और आने वाले समय में देवभूमि से ऐसे कई और सितारे देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपनी चमक बिखेरेंगे।