Uttarakhandमें सिस्सम के खिलाफ फूटा महिलाओं कागुस्सा!Uttarakhand News | Paurigarhwal | Leopardattack

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जी हां दोस्तो एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, सिस्सम के खिलाफ महिलाओं का गुस्सा भड़क गया, और गुस्साए ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए विधायक की पत्नी को बंधक तक बना लिया। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मै आपको इस पूरे घटनाक्रम की हर परत बताने के लिए आया हूं क्योंकि महिलाओँ का गुस्सा यू हीं नहीं है। दोस्तो उत्तराखंड के पौड़ी जिले के विकासखंड जयहरीखाल से एक दुखद और चौंकाने वाली खबर जहां ग्राम पंचायत बरस्वार में एक गुलदार ने डेढ़ वर्षीय बच्ची को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश फैल गया है। वैसे ये पहली बार नहीं है जब जनमुद्दों को लेकर बीजेपी के नेता विधायक यहां तक की सासंद और बीजेपी के अध्यक्ष को भी लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ा है। दोसतो ये तस्वीर पौड़ी के जयहरीखाल क्षेत्र के ग्राम बरस्वार, की हैं जहां गुलदार के हमले में एक मासूम बच्ची की मौत हो गई, घटना के बाद विधायक की पत्नी नीतू रावत मौके पर पहुंचीं, लेकिन स्थानीय लोगों ने विरोध किया। गुस्सा इसलिए है क्योंकि ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार का आतंक लंबे समय से चल रहा है, पर ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।

वहीं दोस्तो ये भी जानकारी आपको दे दों कि क्षेत्र के बीजेपी विधायक दिलीप रावत गले में संक्रमण की समस्या के कारण 15 जनवरी 2026 से मुंबई के सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन इधर असली मुद्दा इससे बड़ा है। जगह जगह हमले हो रहे हैं। बच्चे, महिलाएं, बुज़ुर्ग सब डर में जी रहे हैं। ये स्थिति किसी आपातकाल से कम नहीं, फिर भी रवैया वही पुराना है हमला होता है, मौके पर पहुंचते हैं, कुछ दिन चर्चा होती है, और फिर सब वैसा ही चलता रहता है। अगर इसे सच में गंभीर माना जाता, तो स्थायी कदम जमीन पर दिखते। सिर्फ दौरे नहीं, सिर्फ बयान नहीं। क्योंकि हर बार “अगली घटना” का मतलब किसी और घर का उजड़ना होता है। दोस्तो इससे पहले इस हंगामे और वन विभाग की घेराबंदी एक तरफ सवाल तमाम पहाड़ से लेकर मैदान तक सुनाई दे रहे हैं। लेकिन ये आक्रोश यू ही नहीं क्योंकि जिस तन लागे वो तन जाने। लैंसडाउन से बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना के बाद लोग सड़कपर उतर आए। लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बरसवार में गुलदार के हमले में एक 5 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई थी, जिसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। गांव में आक्रोश है, डर है और हर घर में वही सवाल है कि अगला नंबर किसका होगा। दोस्तो यह कोई पहली घटना नहीं है, पिछले कई महीनों से उत्तराखंड के अलग अलग जिलों से गुलदार, भालू और बाघ के हमलों की खबरें लगातार आ रही हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि हर बार इसे “एक और घटना” कहकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन गांवों में लोगों की जिंदगी थम जाती है और ये जो सवालों का शोर है वहीं पर खत्म हो जाता है। दोस्तो यहां सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। वन मंत्री ने अब तक क्या ठोस जिम्मेदारी ली। क्या कोई स्पष्ट कार्ययोजना सामने आई।

मुख्यमंत्री की तरफ से क्या एक्शन प्लान है जो सिर्फ कागज नहीं, जमीन पर दिखे। दोस्तो एक पांच साल की बच्ची का यूँ जाना सिर्फ आंकड़ा नहीं है, यह सिस्टम की असफलता भी है। जंगल के किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोग सुरक्षा मांग रहे हैं, बयान नहीं ये कब समझ आयेगा। भारी सुरक्षा के बीच जिंदगी जिने वाले लोगों को फिर वो वन मंत्री हो या फिर मुख्यंत्री खुद ही क्यों ना हो वन विभाग पर सवाल करना ही अब बेमानी सा लगता है। इस विभाग को लगता है कि आम इंसान की जिंदगी, गांजर मूली की तरफ उसकी 5 साल की बच्ची चल गई तो क्या हो गया। ये नहीं तो फिर क्या है। बीते कुछ महिनों में तो ये देखने को मिला। दोस्तो वन विभाग गश्त, निगरानी, त्वरित रेस्क्यू, पिंजरे, ट्रैंक्विलाइजेशन टीम, मुआवजा, और संवेदनशील इलाकों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था—इन सब पर तुरंत काम होना चाहिए लेकिन करेगा कौन कैसे और कब न जाने कितनी बिलायां और चाहिए पर विभाग को इस सिस्टम को आज एक परिवार उजड़ा है। कल किसी और का घर भी उजड़ सकता है। यही सबसे डरावनी सच्चाई है। दोसतो पौड़ी की यह घटना सिर्फ एक स्थानीय विरोध नहीं है, वैसे पौड़ी ही क्यों ये ही एक घटना क्यों किस किस घटना को बताऊं और किस किस से सवाल करू समझ नहीं आता है। सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े करती है ऐसी ही तस्वीरें महिलाओं के आक्रोश ने साफ कर दिया है कि नागरिक अपनी सुरक्षा और न्याय के लिए किसी भी हद तक आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। अब प्रशासन पर यह जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे हालात दोबारा न हों और नियम-कानून के तहत तुरंत कार्रवाई की जाए।