Uttarakhand के पहाड़ों में विवाह संकट | Pauri Garhwal | Swati Bhadoriya | Uttarakhand News

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दोस्तों, उत्तराखंड के पहाड़ों से एक दिलचस्प और साथ ही गंभीर खबर सामने आई है। जिले पौड़ी में एक युवक अपनी समस्या लेकर डीएम स्वाति भदौरिया के सामने पहुंचा और अपनी मासूम बात रखी – ‘मेरी अभी तक शादी नहीं हुई।’ यह सुनते ही डीएम स्वाति भदौरिया और वहां मौजूद पूरा स्टाफ हंस पड़ा, लेकिन इस हल्के-फुल्के पल के पीछे छुपा है पहाड़ों का बड़ा संकट, उसी संकट के बारे में आपको बताउंगा। दोस्तो वैसे तो अपने पहाड़ पर संकट तमाम हैं, लेकिन इन सब संकटों के ऊपर है एक महासंकट। दरअसल दोस्तो उत्तराखंड के पौड़ी जिले की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक फरियादी अपनी समस्या लेकर डीएम के सामने पहुंचता है और अपनी बात रखता है। बातचीत के दौरान जब पानी की समस्या का जिक्र होता है तो उसी क्रम में फरियादी बड़ी मासूमियत से कह देता है कि उसकी अभी तक शादी भी नहीं हुई है। यह सुनते ही डीएम स्वाति भदौरिया और वहां मौजूद पूरा स्टाफ खिलखिलाकर हंस पड़ता है।

दोस्तो फरियादी की इस मासूम बात ने माहौल को हल्का कर दिया और वहां मौजूद सभी लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब देखा और शेयर किया जा रहा है लेकिन एक और खबर उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बीते कुछ वक्त बहुत दौड़ रही है वो ये ही कि जैसा डीएम के सामने एक फरियादी ने कहा शादी नहीं हो रही। जी शादी दोस्तो उत्तराखंड के लड़कों की शादी क्यों नहीं हो रही, क्या है कार्ण वो बताने की कोशिश करूगा। दोस्तो उत्तराखंड में क्या कुमाऊं और क्या गढ़वाल, हर जगह एक जैसा हाल. राज्य के पर्वतीय जिलों में रहने वाले लड़कों को शादी के लिए लड़कियां नहीं मिल रही हैं। दरअसल लड़कियां पहाड़ में रहने वाले लड़कों के साथ ग्रामीण परिवेश में जीवन नहीं बिताना चाह रही हैं, उनकी ख्वाहिश है कि वे देहरादून, हल्द्वानी या फिर दिल्ली जैसे शहरों में जाकर बसें। लड़कियां चाहती हैं कि लड़के का शहर में अपना घर हो, अच्छी नौकरी या कोई अच्छा कारोबार हो। वहीं लड़कियों के माता-पिता भी बेटी के भविष्य के लिए सोचते हुए उनकी इस डिमांड के अनुसार रिश्ते ढूंढ रहे हैं और पहाड़ के लड़कों को दरकिनार कर रहे हैं। दोस्तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, अच्छे स्कूल का न होना, रोड कनेक्टिविटी आदि की समस्या रहती है। वहीं जो लड़के खेतीबाड़ी में अपने परिवार का हाथ बंटाते हैं, उनके लिए शादी के बाद शहर में बसना मुश्किल होता है। किसी कारणवश वे चले भी जाते हैं, तो इससे पहाड़ों में पलायन को बल मिलता है।

दोस्तो अपने उत्तराखंड के कई पहाड़ी जिलों का ये ही हाल है लड़के या लड़के वाले कहते दिखाई देते हैं कि उनके लिए कई रिश्ते आ चुके हैं, लेकिन लड़की वालों की डिमांड सरकारी नौकरी, मैदानी इलाकों में घर या जमीन का होना होता है। यहां के ज्यादातर युवा पढ़े लिखे हैं और ग्रेजुएट हैं। वह अपने गांव में रहकर ही स्वरोजगार, खेतीबाड़ी आदि के माध्यम से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। ज्यादातर विवाह योग्य लड़के 30 साल की उम्र पार कर चुके हैं। लड़की पक्ष की तरफ से रखी गई इन शर्तों के सामने लड़कों के कोई और गुण मायने नहीं रखते। इधर दोस्तो कई गांव ऐसे हैं सड़क, स्वास्थ्य सुविधाओं आदि का अभाव है और उनके बच्चे भी गांव में काश्तकारी करते हैं। इस वजह से उनकी शादी नहीं हो पा रही है। लड़कियां उनके गांव नहीं आना चाहती। वैसे पूराने दोर को देखेगें तो रिश्तेदारों के माध्यम से शादियां तय हो जाती थीं, लेकिन अब पहाड़ों में लड़कों को दुल्हन मिलना मुश्किल हो गया है। कोई भी लड़की अब गांव का परिवेश अपनाना नहीं चाहती हैं। ऐसा एक नजारा तब सामने आया जब डीएम स्वाति भदौरिया से बोला युवक अभी तो शादी नहीं नहीं हुई है। फरियादी ने की शादी की बात, तो हंस पड़ीं डीएम पौड़ी स्वाति भदौरिया। दोस्तो मौजूदा समय में उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में सड़क का न होना, शिक्षा की बेहतर सुविधा न होना, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी इसके मुख्य कारण हैं। पहाड़ों में बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण गर्भवती महिलाओं की मौत के कई मामले भी देखे गए हैं। ऐसे में लड़कियां पहाड़ में जीवन यापन नहीं करना चाहती हैं। वहीं आर्थिक रूप से सामान्य परिवार का विवाह योग्य कुंवारा लड़का अब पहाड़ के परिवारों की जिम्मेदारी बनता जा रहा है। ऐसे समय में अगर पहाड़ के सामान्य घरों से आने वाले लोग लड़की वालों की मांग को ध्यान में रखकर कर्ज लेकर या फिर अपनी पहाड़ की जमीनों को महानगरों के बिल्डरों को बेचकर हल्द्वानी, देहरादून, दिल्ली आदि शहरों में जमीन या घर लेते हैं, तो ऐसे में पहाड़ से पलायन को बल मिलता है।