उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस के भीतर बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिल सकता है। पार्टी हाईकमान संगठन में अनुशासन और नए नेतृत्व को मजबूत करने के लिए ‘एक परिवार–एक टिकट’ फॉर्मूले को लागू करने की तैयारी में है। अगर यह फैसला जमीन पर उतरता है, तो कई दिग्गज नेताओं और राजनीतिक परिवारों को बड़ा झटका लग सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इस कदम का मकसद संगठन में वंशवाद को कम करना और जमीनी कार्यकर्ताओं को ज्यादा मौका देना है। लेकिन इस संभावित फैसले से प्रदेश कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है और कई नेताओं की राजनीतिक समीकरण भी बदलते नजर आ रहे हैं। पूरी खबर आपको बताउंगा कि कैसे कांग्रेस हाईकमान ने एक तीर से कई निशाने साधने का काम किया है। दोस्तो तो क्या सच में उत्तराखंड में कांग्रेस के भीतर बड़े बदलाव की शुरुआत होने जा रही है? और किन नेताओं पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा? दोस्तो विधान सभा चुनाव 2027 के लिए कांग्रेस ने नई रणनीति तय कर ली है। आलाकमान ने नेताओं को अनुशासन और एकजुटता की सीख दी है।
प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने स्पष्ट किया है कि चुनाव में एक परिवार एक टिकट का फॉर्मूला सख्ती से लागू किया जाएगा। इस फॉर्मूले से कई नेता या उनके परिजनों को झटका लग सकता है। दोस्तो विधान सभा चुनाव की तैयारियों के लिए कांग्रेस अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गई है। बीते दिनों पूर्व सीएम हरीश रावत के 15 दिन के राजनैतिक अवकाश पर जाने के बाद पार्टी के भीतर ही घमासान छिड़ गया था, जोकि अब शांत हो चुका है। इस बीच, पार्टी नेताओं को अनुशासन और एकजुटता की सीख देते हुए कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने स्पष्ट किया कि इस बार ‘एक परिवार-एक टिकट’ का फॉर्मूला सख्ती से लागू किया जाएगा। इधर, दोस्तो प्रदेश प्रभारी का उत्तराखंड दौरा रणनीतिक रूप से काफी अहम रहा। हालांकि, यह दौरा पांच दिनों के लिए प्रस्तावित था, लेकिन शैलजा चार दिन में ही अपने संगठनात्मक कार्यों को पूरा कर दिल्ली लौट गईं। शैलजा को रविवार को एनएसयूआई के कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन इससे पहले ही शनिवार देर शाम उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में भाग लिया और दिल्ली रवाना हो गईं। प्रदेश के इस चार दिवसीय प्रवास के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं और नेताओं की नब्ज टटोली तथा पार्टी के लिए भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रोडमैप तैयार किया। दोस्तो बताया जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी ने स्पष्ट किया कि इस बार परिवारवाद को पीछे रखते हुए विधानसभा चुनाव में ‘एक परिवार-एक टिकट’ कर फार्मूला सख्ती से लागू किया जाएगा। अब मै आपको बताउऊंगा दोस्तो कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के फार्मूले से साफ है कि पार्टी इस बार टिकट बंटवारे में किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आएगी।
उधर, ‘एक परिवार-एक टिकट’ के फॉर्मूले से पार्टी के भीतर कई दिग्गजों के समीकरण बदल सकते हैं। दूसरी ओर संगठन का मानना है कि इस फार्मूले से कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश जाएगा और पार्टी ज्यादा मजबूती के साथ चुनाव मैदान में बेहतर प्रदर्शन करेगी। सियासी जानकारों की मानें तो उत्तराखंड कांग्रेस में टिकट बंटवारे के दौरान परिवारवाद हमेशा ही हावी रहा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता दबाव बनाकर अपने पारिवारिक सदस्यों को टिकट दिलाने में कामयाब भी रहे हैं। दोस्तो कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के चार दिवसीय दौरे के कई पहलू पार्टी में बेचैनी पैदा कर गए हैं। प्रभारी के कार्यक्रम के दौरान संगठन विस्तार को लेकर चर्चा नहीं हुई। पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से सांगठनिक पदों के इंतजार में हैं, पर शैलजा के दौरे से उन्हें स्पष्ट संकेत नहीं मिला, जिससे कार्यकर्ता असमंजस में हैं। आगामी चुनावों के लिए स्थानीय मुद्दों पर भी रोडमैप सामने नहीं आ पाया, जिससे भाजपा के खिलाफ रणनीति फीकी नजर आ रही है। सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व सीएम हरीश रावत की कार्यक्रमों से दूरी को लेकर रही तो कुल मिलाकर कांग्रेस के ‘एक परिवार–एक टिकट’ फॉर्मूले ने उत्तराखंड की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ पार्टी इसे संगठन में अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बता रही है, तो दूसरी तरफ इसके राजनीतिक असर को लेकर भीतर ही भीतर मंथन भी तेज हो गया है। आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या कांग्रेस इस फॉर्मूले को पूरी सख्ती के साथ लागू कर पाती है, और अगर हां, तो इसका सबसे बड़ा असर किन दिग्गज नेताओं और राजनीतिक परिवारों पर पड़ता है। फिलहाल प्रदेश कांग्रेस में रणनीति, समीकरण और नेतृत्व—तीनों पर चर्चा तेज है। इस बड़े सियासी फैसले की आगे की हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।