जी हां दोस्तो गैरसैंण जिसे उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी कहा जाता है। वहीं एक बार फिर सियासत गरमा गई है। सड़कों पर उतरे सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता और दिग्गज नेताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया। Uttarakhand Budget Session 2026 स्थायी राजधानी गैरसैंण, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया। दोस्तो गैरसैंण की सड़कों पर गूंजते नारों के बीच कांग्रेस ने साफ कर दिया कि पहाड़ के इन अहम मुद्दों को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आखिर क्यों गैरसैंण में कांग्रेस ने यह बड़ा प्रदर्शन किया और क्या हैं उनकी मांगें। जी हां दोस्तो क्या गैरसैंण में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन है, जो मै आपको दिखाने जा रहा हूं। दोस्तो जो कांग्रेस के विधायक हैं उन्होंने जहां सदन में मोर्चा संभाला तो वहीं जो विधायक नहीं हैं या पूर्व हो चुके हैं उन्होने सड़क पर जोरदार हल्ला बोला। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराडीसैंण में चल रहे बजट सत्र के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आक्रामक दिखाई दे रही है। बजट सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस ने स्थाई राजधानी गैरसैंण, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं,प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था,महिला अपराध,बेरोजगारी,अंकिता भंडारी हत्याकांड सहित तामाम मुद्दों को लेकर सड़क पर जोरदार प्रदर्शन किया।
वहीं, वहीं सदन के भीतर भी कांग्रेसी विधायक विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरते नजर आये। यहां दोस्तो सबसे पहले मै आपको सदन के अंदर कांग्रेसी विधायकों का आक्रामकता की तस्वीर दिखाना चाहता हूं। जिसमें जोरदार तरके से हल्ला हुआ फिर वो नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य हो या फिर कांग्रेस वरिष्ठ विधायक प्रितम सिंह। सबने एक सूर में विधानसभा अध्यक्ष को ही कठघरे में ला दिया और कह दिया कि अध्यक्षा नियमों की अंदेखी कर रही हैं। जी हां दोस्तो कांग्रेस विधायकों ने कह दिया कि सरकार के दबाव में विपक्षी विधायकों की सुनी ही नहीं जा रही है। बैठने के लिए बार बार बोला गया लेकिन कांग्रेसी विधायकों का जवाब था यहां बैठने के लिए नहीं आए है, लेकिन दोस्तो इससे इतर एक और तस्वीर थी वो थी सड़क की। क्योंकि सैकड़ों की संख्या में कांग्रेसी कर्यकर्ताओं ने विधानसभा कूच किया. इस दौरान प्रदर्शकारियों की पुलिस से तीखी नोंकझोंक भी हुई। प्रदर्शनकारी विधानसभा जाने की जिद पर अड़े रहे। पुलिस बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकती रही। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस कर्मियों से धकामुक्की भी हुई। दोस्तो विधानसभा के प्रवेश द्वार में पहले से ही भारी पुलिस बल की तैनाती व चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के चलते प्रदर्शनकारी आगे नही बढ़ पाये। गुसाये प्रदर्शनकारियों ने दिवालिखाल बैरियर पर ही सड़क पर बैठकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान भीड़ को तितर बितर करने के लिए कुछ देर तक पुलिस ने वाटर कैनन का उपयोग किया।
दोस्तो प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, हरक सिंह रावत, हरीश रावत, करन माहरा,ललित फर्सवाण सहित तमाम कांग्रेसी नेताओं ने कर्यकर्ताओं में जोश भरा। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने एकजुटता का संदेश देते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा भाजपा सरकार कांग्रेस के प्रदर्शन और जनसैलाब से घबरा गई है, इसीलिए पुलिस बल का सहारा लेकर विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। दोस्तो इस दरौन पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा हमारा विरोध इस सरकार के लिए चेतावनी है। राज्य के लोगों के लिए हमारा संदेश है कि अब बदलाव से कम कुछ भी नहीं, 2027 में बदलाव होना चाहिए। भाजपा धड़ाम होनी चाहिए। इसके अलावा सड़क पर हरक सिंह रावत भी थे उन्होने कहा कांग्रेस की आवाज को, विपक्ष की आवाज को, महिलाओं, युवाओं की आवाज को इस सरकार में दबाया जा रहा है। यह लोकतंत्र की हत्या है।
इसके अलावा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी और उत्तराखंड सरकार पर आरोप लगाने में कोई कसर नहीं छोटी। इधर दोस्तो महिलाओं के मुद्दे प्रदेश में काफी शोर कर दिखाई दिए हैं। कांग्रेस महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा जब से यह सरकार सत्ता में आई है तब से महिला उत्पीड़न, बेरोजगारी,भ्रष्टाचार,स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली अपने चरम पर है। इधर दोस्तो एक तरफ ये प्रदर्शन की तस्वीर थी। वहीं प्रदेश के बीच में पहाड़ी घोड़े आने से मामला कुछ देऱ के रोचक हो गया क्योंकि पुलिस के लिए चुनौती एक तरफ काग्रेसियों को आगे बड़ने से रोकने की थी। वहीं इन घोड़ों से पार पाना था। कुल मिलाकर गैरसैंण में हो रहे इस सत्र से गैरसैंण की सड़कों पर कांग्रेस का यह शक्ति प्रदर्शन साफ तौर पर कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। स्थायी राजधानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी मांगों को लेकर पार्टी ने सरकार को घेरने की कोशिश की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इन मुद्दों पर सरकार की तरफ से क्या जवाब आता है और पहाड़ के इन अहम सवालों का समाधान कब तक निकल पाता है। फिलहाल गैरसैंण से उठी यह सियासी आवाज आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति को और गर्मा सकती है।