देहरादून। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऑलराउंडर स्नेह राणा का मानना है कि न्यूजीलैंड में हुए महिला विश्वकप में भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन से देश में बेटियों को हौसला मिलेगा।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड में इंडियन वुमन क्रिकेट टीम के खिलाड़ी स्नेह राणा को सम्मानित किया। राजपुर रोड स्थित होटल अकेता में सीएयू के अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला, सचिव महिम वर्मा, अपेक्स कमेटी की सदस्य निष्ठा फारसी, संरक्षक पी सी वर्मा, एएम मेंगवाल, अमित पांडे, विजय प्रताप मलल आदि मौजूद थे। इससे पहले उत्तरांचल प्रेस क्लब में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में भी स्नेह ने अपनी बात रखी। स्नेह ने कहा कि सामान्य सीरीज में खेलना अलग अनुभव होता है, मगर महिला विश्वकप में खेलने से आत्मविश्वास में काफी इजाफा हुआ है। खासकर, पाकिस्तान के खिलाफ अर्द्धशतक उनकी खास पारियों में से एक है। वह इस खेल को सीख रहीं बेटियों को यही संदेश देना चाहेंगी कि खूब मेहनत करें और अपनी ट्रेनिंग पर भरोसा रखें।
पाक से भिड़ंत का था रोमांचक
महिला विश्वकप के पहले ही मैच में पाकिस्तान से मुकाबले को लेकर स्नेह भी काफी रोमांचित थी। उन्होंने इस मैच में टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया। स्नेह ने कहा कि भारत-पाक के बीच मैच हो तो रोमांच होना स्वाभाविक है। लेकिन, मैच के बाद उन्होंने काफी बेहतर महसूस किया। जब पाक कप्तान अपनी नन्ही बेटी के साथ गैलरी में दिखी तो भारतीय टीम ने उनकी बेटी को गोद में लिया। टीम का यह वीडियो खूब वायरल हुआ।
महिला टीम की संकटमोचक हैं स्नेह
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की हरफनमौला खिलाड़ी स्नेह राणा टीम की नई संकटमोचक हैं। ये कहना है उनके कोच नरेंद्र शाह और किरन शाह का। नरेंद्र के मुताबिक, इंग्लैंड में हुए टेस्ट में स्नेह ने जहां नाबाद 80 रन बनाकर मैच ड्रा कराया था, इस टेस्ट में उन्होंने चार विकेट भी लिए। वहीं न्यूजीलैंड में हुए विश्वकप में पाक के खिलाफ दो महत्वपूर्ण विकेट और नाबाद 53 रन की पारी खेलकर जीत की आधारशिला रखी। हालांकि, यह सफर इतना आसान नहीं था।
क्रिकेटर के रूप में देखना चाहते थे पिता
कोच नरेंद्र के अनुसार, स्नेह सिर्फ नौ साल की थीं, जब वह क्रिकेट सीखने पहुंची थीं। उबड़-खाबड़ मैदान पर ट्रेनिंग होती थी। वह खुद पिच को झाडू से साफ करतीं और मैदान में बिखरे पत्थर चुन-चुनकर उठाती थीं। पिता स्वर्गीय भगवान सिंह राणा उन्हें क्रिकेटर के रूप में देखना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने जमीन का टुकड़ा भी बेचा। 2016 में घुटने पर लगी चोट के बावजूद उन्होंने मजबूत वापसी की। स्नेह जैसी अनुशासित और समर्पित क्रिकेटर मुश्किल से मिलती हैं। वह हमेशा अपना सौ फीसदी देने को तत्पर रहती हैं।