जी हां द्स्तो उत्तराखंड, जिसे सैनिकों का प्रदेश कहा जाता है, इस बार अपने ही बहादुर बेटों-बेटियों को एक बड़ी सौगात देने जा रहा है। हर कोई सैनिकों का सम्मान करता है, लेकिन इस बार सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिससे सीएम पुष्कर सिंह धामी का बचपन का सपना भी पूरा हुआ। कैसे यह ऐतिहासिक फैसला सैनिकों के लिए खुशियों की सौगात बनकर आया है। बताउंगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। जी हां दोस्तो सीएम पुष्कर सिंह धामी एक बार फिर खटीमा दौरे पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने नगर पालिका क्षेत्र में बन कर निर्मित हुई सीएसडी कैंटीन का लोकार्पण किया। इसके अलावा सीएम ने सैनिक सम्मान समारोह में शिरकत कर वीर वीरांगनाओं एवं वीर सैनिकों को सम्मानित किया। साथ ही दोस्तो इस दौरानर सीएम धामी ने खटीमा के नगर पालिका क्षेत्र में 7 करोड़ 15 लाख की लागत से बन कर तैयार हुए भव्य सीएसडी कैंटीन भवन का पूजा अर्चना के साथ लोकार्पण किया. इस अवसर पर सीएम धामी ने कैंटीन का स्थलीय निरीक्षण कर पूर्व सैनिकों को मिलने वाली सुविधाओं का भी जायजा लिया।
दोस्तो इस मौके पर सीएम धामी ने 60 वीर वीरांगनाओं एवं 80 पूर्व वीर सैनिकों को सम्मानित किया। सीएम धामी के स्वर्गीय पिता सूबेदार शेर सिंह धामी की चित्र पर सीएम ने अपनी माता विशना देवी एवं धर्मपत्नी गीता धामी के साथ पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें स्मरण किया। सीएम के साथ नैनीताल सांसद अजय भट्ट,सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी,प्रदीप बत्ता,राम सिंह कैड़ा सहित कई दर्जा मंत्री सैनिक अधिकारियों ने शिरकत की। वहीं दोस्तो सीएम धामी ने सैकड़ों की संख्या में कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व सैनिकों को संबोधित किया। सीएम धामी ने कहा खटीमा का विधायक रहते खटीमा क्षेत्र में एक भव्य सीएसडी कैंटीन बनाने का उनका सपना आज साकार हुआ है। बचपन में सैनिक पिता के साथ चंपावत जिले के बनबसा कैंटीन जाने के दौरान पूर्व सैनिकों की परेशानी को उन्होंने देखा है। शुरू से उनके मन में खटीमा में सीएसडी कैंटीन निर्माण की चाहत थी। जिसे आज उनकी सरकार ने पूरा किया है।
तो दोस्तों, खटीमा में बनकर तैयार हुए इस भव्य सीएसडी कैंटीन का लोकार्पण और सैनिकों का सम्मान समारोह न केवल एक ऐतिहासिक अवसर है, बल्कि यह उत्तराखंड के सैनिकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। सीएम पुष्कर सिंह धामी का बचपन का सपना साकार हुआ और इस कदम से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को एक खास सौगात मिली हैm मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत भावुक क्षण है, क्योंकि यह आयोजन उनके पिताजी की पुण्य स्मृति में आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि 6 वर्ष पूर्व का यह दिन उनके जीवन का सबसे दुखद दिन था, जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया।उन्होंने बताया कि उनके पिताजी के विचार, सिद्धांत और संघर्षपूर्ण जीवन आज भी उन्हें प्रेरित करते हैं और हर कदम पर मार्गदर्शन देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिताजी अपनी वर्दी को अत्यंत सम्मान और सलीके से रखते थे। उनसे उन्हें यह सीख मिली कि एक सैनिक के लिए उसकी वर्दी ही उसका सम्मान और जिम्मेदारी होती है।