प्रधानमंत्री मोदी ने बद्री दत्त पांडे के जरिये कुमाऊं के इतिहास की ताजा की याद

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उत्तराखंड दौरे पर गुरुवार को हल्द्वानी आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मीयता के साथ कुमाऊं से खुद को जोड़ा। कुमाऊं किस तरह राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान रखता है इसका उल्लेख देश की आजादी के आंदोलन को याद करते हुए किया। बोले, देश की आजादी में कुमाऊं ने बहुत बड़ा योगदान रहा। पंडित बद्री दत्त पांडे के नेतृत्व में उत्तरायणी मेले में कुली बेगार प्रथा का अंत हुआ था। कुमाऊं आने को अपना सौभाग्य बताते हुए पीएम बोले, आपके साथ मेरा पुराना नाता रहा है। गहरा नाता रहा है। ऐसे में पुरानी याद ताजा हो जाना स्वाभाविक ह

पीएम मोदी ने अपने भाषण में जनता से संवाद की शुरुआत चिरपरिचित अंदाज से की। कुमाऊं के लोक देवता गोल्ज्यू का नाम लेते हुए बोले ‘गोल्ज्यू की यो पवित्र धरती कुमाऊं में आपु सबै भाई-बैंणी कैं म्यर नमस्कार। सबै नानतिना कैं म्यर प्यार व आशीष।Ó गोल्ज्यू की पवित्र धरती में खुद की मौजूदगी को गौरवान्वित महसूस होने वाला प्रतीत कराने के अंदाज से जनता का अभिवादन किया। छोटे बच्चों को प्यार व आशीष दिया। मोदी कुमाऊं के तीर्थ स्थलों का नाम लेने से भी नहीं चूके। पीएम ने अपने संबोधन में कहा, जागेश्वर, बागेश्वर, सोमेश्वर, रामेश्वर इन तीर्थ स्थलों की शिव भूमि को मैं प्रणाम करता हूं। मानसखंड व मानसरोवर का जिक्र भी कि

भाषण के समापन से पहले पीएम मोदी फिर लोक की तरफ लौटे। दो दिन बाद आने वाले नव वर्ष व 14 जनवरी के उत्तरायणी पर्व की बधाई देते हुए बोले, ‘पोरू बटी नई साल औनेर छू। आपु सबै उत्तराखंडिन कैं नई सालकि बधाई, दगैणि घुघुती त्यारकि लै बधै।Ó कुमाऊं में उत्तरायणी को घुघती त्यार नाम से मनाया जाता है। भारत माता की जय से शुरू हुआ उद्बोधन उसी भारत मां के जयकारे के साथ खत्म किया।