जी हां दोस्तो उत्तराखंड के अधिकारियों की मनमानी किसी से छिपी नहीं है। यहां के अधिकारी जैसा चाहते हैं वैसै करते हैं यहां के नौकरशाह, अधिकारी मंत्री, विधायक सांसदों को ना सुनते हैं और ना उन्हें कोई तवज्जो देते हैं। वैसे एसे कई मामले सामने आ चुके हैं जब उत्तराखंड में विधायक मंत्री सांसदों ने अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर सवाल किया है, लेकिन इधर एक बार फिर से प्रोटोकॉल विवाद ने हलचल मचा दी है। दोस्तो थोड़ा सोचिए, कैसे अधिकारी नेताजी को सम्मान देते हैं। सांसद विधायकों को बस में भर कर भेजा और खुद अपनी गाड़ीयों से पहुंचे। अब यहां फिर सवाल हो गया प्रोटोकाल का, बताने आया हूं दोस्तो कैसे राज्य में नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं और प्रोटोकॉल को लेकर हर बार नेताओं को असुविधा का सामना क्यों करना पड़ता है। दोस्तो उत्तराखंड में राष्ट्रपति के स्वागत कार्यक्रम में अफसरों पर माननीयों के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगा है। सांसद और विधायकों का आरोप है कि उन्हें बस में बैठाकर एयरपोर्ट पहुंचाया गया जबकि अफसर सरकारी गाड़ियों में सवार होकर पहुंचे। इस घटना की शिकायत सीएम तक पहुंच चुकी है। यहां दोस्तो पक्ष विपक्ष दोनों आरोप लगा रहे हैं। दोस्तो दरअसल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तीन दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचीं। देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति के स्वागत कार्यक्रम में अफसरों पर नेताओं के प्रोटोकॉल का हनन करने का आरोप लगा है, इससे सांसद और विधायक गुस्से में हैं। बताया जा रहा है कि सांसदों और विधायकों को राष्ट्रपति के स्वागत कार्यक्रम के लिए बस में बैठाकर एयरपोर्ट तक पहुंचाया गया। यहां उन्होंने विशेष विमान से पहुंची राष्ट्रपति का स्वागत किया। वहीं, दूसरी ओर अधिकारी अपनी सरकारी गाड़ियों से एयपोर्ट पहुंचे। नजारा देख माननीय दंग रह गए।
प्रोटोकॉल उल्लंघन से सांसद-विधायक गुस्से में आ गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई। उसके बाद माननीयों ने इस घटना की शिकायत सीधे सीएम पुष्कर सिंह धामी से की। राज्य में अफसर आए दिन प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रहे हैं। मंत्री और विधायक पूर्व में इस प्रकार की शिकायतें कर चुके हैं। लोगों का कहना है कि अफसरशाही बेलगाम हो गई है। दोस्तो उत्तराखंड में सांसद-विधायकों को बस में बैठाकर एयपोर्ट पहुंचाने और अफसरों के सरकारी वाहनों से पहुंचने का मामला चर्चाओं में है। इस घटना की पुष्टि राज्य के प्रोटोकॉल मंत्री सौरभ बहुगुणा ने भी की, उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। मामला सामने आने पर मंत्री ने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों का पूर्ण सम्मान करने व प्रोटोकॉल के अनुसार व्यवहार करने की हिदायत भी दी है। दोस्तो राष्ट्रपति के स्वागत कार्यक्रम में प्रोटोकॉल उल्लंघन से विपक्ष के नेताओं में भी आक्रोश है। इधर, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की सरकार जब-जब देश या राज्य में बनती है वो जनता या नेताओं की नहीं, बल्कि अफसरों की होती है। बीजेपी राज में पार्टी के कार्यक्रमों की व्यवस्था तक अधिकारी कर रहे हैं। आरोप ये भी लगाया कि आज डीएम और एसएसपी आयोजकों की तरह ऐसे कार्यक्रमों को संपन्न करा रहे हैं। नियमानुसार प्रशासन का काम केवल व्यवस्था बनाना है। आगे कहते हैं कि पार्टी के कार्यक्रमों में अधिकारी भीड़ एकत्र करने तक के काम कर रहे हैं।
दोस्तो ये सवाल इसलिए उठते हैं या विपक्ष सरकार और बीजेपी को इसलिए भी करता है कि ये पहला मौका नहीं है। जब अधिकारियों ने अपने हिसाब से काम किया। सासंद और विधायकों बस ठुंसा और खुद अपनी गाड़ियो से राषट्रपति को रीसीब करने के लिए पहुंचे। दोस्तो उत्तराखंड में अफसरों पर संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों का प्रोटोकॉल फॉलो नहीं करने के आरोप लगते रहे हैं। जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रोटोकॉल में लापरवाही का मामला भुलाया भी नहीं गया था था कि अब खुद विधानसभा अध्यक्ष ने भी बड़े सवाल खड़े करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की थी। हालांकि, मामले पर प्रशासन ने जो जवाब दिया। उससे विधानसभा अध्यक्ष के प्रोटोकॉल मामले में एक नया मोड़ आ गया था। दोस्तो दरअसल, तब विधानसभा उपसचिव हेमचंद्र पंत का एक पत्र खूब वायरल हुआ था। वो पत्र मुख्य सचिव आनंद वर्धन को लिखा गया है, जिसमें स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी के प्रोटोकॉल के अनुसार मंच पर जगह नहीं दिए जाने को लेकर बात कही गई थी। उस पत्र में ये साफ किया गया था कि विधानसभा अध्यक्ष एक संवैधानिक पद है और उसके अनुरूप स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में अध्यक्ष को गरिमा के लिहाज से बैठने के लिए उचित स्थान तय नहीं किया गया और इसीलिए इस पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने नाराजगी जाहिर की, साथ ही ऐसी स्थिति में इस कार्यक्रम में सम्मिलित होना उचित नहीं बताया गया है।
दोस्तो ये पत्र 15 अगस्त को ही लिखा गया और बताया गया कि विधानसभा अध्यक्ष इसीलिए कार्यक्रम में शामिल भी नहीं हुईं, फिर इस उस समय नया मोड़ आ गया, जब जिला प्रशासन ने ये स्पष्ट किया कि विधानसभा अध्यक्ष के स्टाफ ने पहले ही अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी के मुख्य कार्यक्रम में शामिल नहीं होने की पुष्टि कर दी थी। 13 अगस्त और 14 अगस्त को भी विधानसभा अध्यक्ष के स्टाफ ने उनके कार्यक्रम को लेकर बात साफ की थी. जिसमें बताया गया था कि विधानसभा में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसीलिए वह स्वतंत्रता दिवस के परेड ग्राउंड स्थित कार्यक्रम में मौजूद नहीं हो सकती हैं. इस पर खूब हंगामा हुआ। अब इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की हाल ही में राज्य यात्रा के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन पर देहरादून के जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल से स्पष्टीकरण मांगा गया। दोस्तो यहां शिकायतें इस बारे में थीं कि अध्यक्ष को उनके उच्च पद के कारण वह सम्मान और शिष्टाचार नहीं मिला जिसके वे हकदार हैं और उनकी यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया गया। तब प्रोटोकॉल सचिव द्वारा बंसल को लिखे पत्र में कहा गया था कि अध्यक्ष सचिवालय की ओर से की गई शिकायत में कहा गया है कि जब डीएम से उनकी यात्रा से संबंधित कुछ जानकारी लेने के लिए टेलीफोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने उचित जवाब नहीं दिया, अध्यक्ष को उनके पद की गरिमा के अनुसार उचित सम्मान और शिष्टाचार नहीं दिया गया और यात्रा के दौरान सामान्य प्रोटोकॉल मानदंडों का उल्लंघन किया गया।