उत्तराखंड में अगले दो दिन ज्यादा जलेंगे जंगल, वनाग्नि को लेकर वन विभाग का आठ जिलों के लिए अलर्ट

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उत्तराखंड के जंगल तेजी से धधकने लगे हैं। इस कारण आठ जिलों को अलर्ट किया गया है। अगले दो दिन जंगल ज्यादा जल सकते हैं। हवा में नमी की कमी के कारण आग बढ़ने की आशंका है। डीएफओ को जिला प्रशासन के साथ बैठक कर आग की घटनाओं और जंगलों में लोगों की आवाजाही रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजस्विनी पाटिल ने सभी डीएफओ से पीडब्लूडी, सिंचाई विभाग के साथ सामंजस्य बनाने और डीएम के साथ बैठक कर जंगलों को आग से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। वनाधिकारियों का कहना है कि तापमान बढ़ने से कई स्थानों पर हवा की नमी घटकर 20 फीसदी के आसपास रह गई है।

ऐसे में सूखे पत्तों को कहीं से भी चिंगारी मिलती है तो आग तेजी से फैलती है। इस आशंका से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। चिंता की बात यह है कि मौसम विभाग ने तेज हवाएं चलने का भी पूर्वानुमान बताया है। यदि बिना बारिश तेज हवाएं चलती हैं तो यह वनाग्नि की नजरिये से काफी घातक हो सकता है। अब विभाग की उम्मीदें सिर्फ बारिश पर टिकी हैं।

पराली या घास जलाने पर रोक
जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ने के बाद वन विभाग ने आठ जिलों की 12 डिवीजनों में वन पंचायत या जंगलों के आसपास पराली और घास जलाने पर रोक लगा दी। सभी डीएफओ को यह निर्देश जारी कर दिए गए हैं। एपीसीसीएफ-फॉरेस्ट फायर निशांत वर्मा के अनुसार, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत, टिहरी, पौड़ी, अल्मोड़ा और चमोली के 12 डिवीजन इस वक्त सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं।

इन डिवीजनों में सभी डीएफओ को कहा गया है कि वन पंचायत या जंगल के आसपास गांवों में पराली, घास या दूसरी चीजें जलाने पर फायर सीजन तक रोक लगाएं। लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएं और अपील भी करें।

बीते 12 घंटों में 117 आग के मामले
राज्य में बीती 19 अप्रैल को मात्र 12 घंटे में आग के 117 मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं में करीब 198.9 हेक्टेयर जंगल जला है। फायर सीजन में 15 फरवरी से अब तक आग की 809 घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 1152.41 हेक्टेयर जंगल में 15503 पेड़ जल चुके हैं। आग से अभी तक 32.42 लाख के नुकसान का अनुमान है।

30 से अधिक गांव के आसपास पहुंची आग
कुमाऊं मंडल के पर्वतीय इलाकों में आग तेजी से फैल रही है। पिथौरागढ़ जिल के करीब 20 गांव के आसपास तो अल्मोड़ा के 12 गांव के आसपास आग फैली हुई है। वहीं चंपावत और बागेश्वर जिले के 1-1 गांव के आसपास आग फैलने की घटनाएं हुई हैं।

आने वाले दो दिन वनाग्नि के लिहाज से काफी संवेदनशील हैं। कुमाऊं के सभी डीएफओ को पीडब्लूडी, सिंचाई विभाग के साथ समन्वय बनाकर काम करने को कहा गया है। हमारे कर्मचारी दिनरात रिजर्व फॉरेस्ट में फायर कंट्रोल के लिए मेहनत कर रहे हैं। ग्रामीणों को भी आग को लेकर सचेत किया गया है। वनाग्नि को रोकने को उनकी भी मदद ली जा रही है।
डॉ. तेजस्विनी पाटिल, मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊं