तो क्या बदरीनाथ-केदारनाथ सहित चारधाम जा रहे तीर्थ यात्रियों को रहने के लिए नहीं मिलेगी जगह ?

Spread the love

उत्तराखंड में काफी जद्दोजहद के बाद चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। इस बीच गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन)व कुमाऊं मंडल विकास निगम(केएमवीएन) के कर्मचारी राजकीयकरण की मांग को लेकर मुखर हैं। कर्मचारियों ने चरणबद्ध आंदोलन के क्रम में तीन अक्तूबर से बेमियादी आंदोलन की चेतावनी दी है। यदि यात्रा के बीच कर्मचारी आंदोलन पर गए तो दिक्कत होनी तय है।

क्या होगी दिक्कत : यदि कर्मचारी पर्यटक आवास गृहों का काम छोड़कर आंदोलन में शामिल होते हैं चार धाम यात्रा के संचालन में दिक्कत होगी। दरअसल पर्यटक आवास गृहों में बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी कामकाज संभाले हुए हैं।  राजकीकरण की मांग समेत इन संविदा कर्मियों को नियमित करने की भी मांग हो रही है। कर्मचारी इन मांगों को लेकर अगस्त से आंदोलन कर रहे हैं।

उस दौरान यात्रा बंद थी, पर चूंकि अब यात्रा शुरू हो गई है ऐसे में कर्मचारियों का आंदोलन निगम प्रबंधन के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकता है। आर्थिक संकट से जूझ रहे निगमों के लिए यात्रा का सफल संचालन बेहद जरूरी है। दो महीने की यात्रा से ही निगमों के आगे के खर्चे निकलेंगे। इसमें कर्मचारियों का वेतन भी शामिल है। दोनों निगमों में अभी कर्मचारियों को अगस्त महीने का वेतन नहीं मिला है।

चरणबद्ध आंदोलन
22     सितंबर को दोनों मुख्यालय देहरादून व नैनीताल में एक दिवसीय तालाबंदी
27     नवंबर को कुमाऊं मंडल के सभी जिलों में निगम कर्मचारी कार्यालय बंद रखेंगे
01     अक्तूबर को गढ़वाल के सभी जिलों में निगम कर्मचारी कार्यालय बंद रखेंगे
02     अक्तूबर को पौधरोपण के साथ स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा
03     अक्तूबर से अनिश्चितकालीन धरना

जीएमवीएन के एमडी को सोमवार को कर्मचारियों की शासन स्तर पर लंबित मांगों का ब्योरा देने को कहा गया है। मांगें हल करने का प्रयास किया जाएगा। चारधाम यात्रा पर आंदोलन का असर न पड़े, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
दिलीप जावलकर, सचिव पर्यटन

निगम कर्मचारी लंबे समय से आंदोलन पर हैं। इसके बावजूद प्रबंधन व शासन स्तर पर कर्मचारियों की मांगों का संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। यह स्थिति कर्मचारियों के रोष को और बढ़ा रही है। अभी तक कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से काम करते हुए आंदोलन कर रहे हैं। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो मजबूरन बेमियादी आंदोलन करना पड़ेगा।
दिनेश गुरुरानी, अध्यक्ष संयुक्त कर्मचारी महासंघ