उत्तराखंड में त्रिशूल पर्वतारोहण के लिये चमोली जिले के सुदूर वर्ती सुतोल गांव से निकला नौ सेना का पर्वतारोही दल एवलांच की चपेट में आकर लापता है। जानकारी मिलने पर इस दल की युद्ध स्तर पर तलाश शुरू हो गई है। जोशीमठ से सेना का 35 सदस्यीय राहत और खोजी दल घाट सुतोल के लिए रवाना हो गया है। चमोली प्रशासन और वन क्षेत्र बदरीनाथ वन प्रभाग के पास पर्वतारोहण के लिये गये दल के सम्बंध में कोई आधिकारिक और पुख्ता जानकारी अभी नहीं मिली है।
बदरीनाथ के प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि पर्वतारोहण की इस टीम ने पर्वतारोण की सूचना, संख्या , पर्वतारोहण की तिथि , कार्यक्रम की कोई जानकारी न त़ो वन विभाग और ना ही प्रशासन को दी है। और ना ही आवश्यक प्रक्रिया निभाई। इसलिये पर्वतारोहण और पर्वतारोहियों के लापता होने के बारे में कोई आधिकारी जानकारी नही़ं है।
सूत्रों के अनुसार नेहरू पर्वतरोहण संस्थान (निम) से रेस्क्यू टीम प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट के नेतृत्व में चमोली जनपद में स्थित त्रिशूल चोटी के लिए रवाना हो गया है। हैलीकाप्टर से रैस्क्यू दल घाट पहुंचा। नौ सेना के दल करीब 15 दिन पहले 7,120 मीटर ऊंची त्रिशूल चोटी के आरोहण के लिए गया था। निम के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट ने बताया कि यह घटना शुक्रवार सुबह पांच बजे के करीब हुई है। जिसमें वायु सेना के पर्वतारोही हिमस्खलन की चपेट में आए हैं और मिसिंग चल रहे हैं।
एसडीआरएफ दल बचाव के लिए तैयार
माउंट त्रिशूल पर्वतारोहण के दौरान फंसे नेवी के पर्वतारोहियों को बचाने के लिए एसडीआरएफ की टीम भी जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर स्टैंड बाई में रखी गई है। इस टीम में पर्वतारोही दल के छह सदस्यों को शामिल किया गया है। हालांकि फिलहाल एसडीआरएफ से मदद नहीं मांग गई है। एसडीआरएफ की सीईओ डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि फिलहाल बचाव अभियान में सेना और निम ही लगी हुई है। फिर भी एसडीआरएफ की तरफ से अपनी सेवाएं देने की पेशकश की गई है। इसके लिए एक टीम, विशेषज्ञ उपकरणों के साथ जौलीग्रांट मुख्यालय में अलर्ट रखी गई है।