यूपी के बिजली कर्मचारियों का उत्तराखंड में ड्यूटी से इंकार, हड़ताल के बाद उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ना तय

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उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी उत्तराखंड में ड्यूटी लगाए जाने से भड़क गए है। कर्मचारियों का कहना है कि वे पूरी तरह उत्तराखंड के बिजली कर्मियों के साथ हैं और किसी भी सूरत में उत्तराखंड में ड्यूटी नहीं करेंगे। राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ ने इसका विरोध करते हुए यूपी पॉवर कॉरपोरेशन के एमडी को पत्र लिखा है। वहीं दूसरी ओर, बिजली कर्मचारी हड़ताल के अपने निर्णय पर अडिग हैं। सरकार की सख्ती के बावजूद बिजली कर्मचारियों ने  मांगे न माने जाने पर छह अक्तूबर से प्रस्तावित हड़ताल पर अडिग रहने का निर्णय लिया है।

इसके साथ ही राज्य में बिजली कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को कई संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। इसमें विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश, राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश और ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ पॉवर डिप्लोमा इंजीनियर ने भी बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को समर्थन देने का निर्णय लिया है।

बिजली कर्मचारी हड़ताल के अपने निर्णय पर अडिग हैं। सरकार की सख्ती के बावजूद बिजली कर्मचारियों ने  मांगे न माने जाने पर छह अक्तूबर से प्रस्तावित हड़ताल पर अडिग रहने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों ने सरकार को पांच अक्तूबर तक मांगों के संदर्भ में आदेश करने को कहा है। ताकि कर्मचारी हड़ताल की नौबत न आए।

शनिवार देर सांय बिजली कर्मचारियों की विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनत तले वर्चुअल बैठक हुई जिसमें सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया गया। मोर्चा के संयोजक इंसारुल हक ने कहा कि सरकार जितनी ताकत कर्मचारियों के उत्पीड़न में लग रही है उतनी ताकत यदि उनकी मांगों को पूरा करने में लगाए तो हड़ताल की कभी नौबत नहीं आएगी।

इंसारुल ने कहा कि सरकार यदि अन्य राज्यों से बिजली कर्मचारियों को बुलाकर उनकी जगह काम लेना चाहती है तो बिजली कर्मचारी उसमें भी पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि मांग पूरी न होने पर छह अक्तूबर को सभी कर्मचारी स्टेशन सौंपकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। बैठक की अध्यक्षता अमित रंजन तथा संचालन संयोजक इंसारूल हक ने किया। इस अवसर पर हाइड्रोइलेक्ट्रिक एंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष केहर सिंह, उत्तरांचल पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश चंद्र पंत ,महामंत्री संदीप शर्मा, उत्तरांचल बिजली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ध्यानी, विद्युत संविदा संगठन के महामंत्री मनोज पंत आदि थे।

ऊर्जा निगमों में हड़ताल से निपटने को एस्मा लागू
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए ऊर्जा निगमों में एस्मा लागू कर दिया गया है। तीनों निगमों में अधिशासी अभियंता और इससे ऊपर के इंजीनियर हड़ताल पर गए, तो उन्हें सीधे सस्पेंड किया जाएगा। सरकार ने पॉवर स्टेशन संभालने को वैकल्पिक इंतजामों पर भी काम शुरू कर दिया है। विद्युत कर्मचारी अधिकारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले कर्मचारियों ने छह अक्तूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। कर्मचारियों की पिछली एक दिन की हड़ताल में ही करोड़ों का नुकसान हो गया था। ऐसे में इस बार सरकार न सिर्फ पहले से ही वैकल्पिक इंतजाम करने में जुट गई है,बल्कि पूरी सख्ती के मूड में भी है।

मुख्य सचिव एसएस संधु ने सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर उन्हें आगाह भी कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि सरकार सुचारू बिजली आपूर्ति रखने के लिए किसी भी सूरत में बिजली कर्मचारियों के समक्ष झुकने को तैयार नहीं हैं। बैठक में शासन और ऊर्जा के तीनों निगमों के अफसर भी मौजूद रहे। कर्मचारी पूरी तरह हठधर्मिता पर उतर आए हैं। उनकी अधिकतर मांगों को भी मान लिया गया है।

ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि उपनल के कर्मचारियों को जोखिम भत्ता, रात्रि कालीन भत्ता समेत तमाम लाभ दिए गए हैं। इसके बाद भी कर्मचारी मानने को तैयार नहीं है। ऐसे में एस्मा लगाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प शेष नहीं था। अधिशासी अभियंता और इससे ऊपर के अफसर यदि हड़ताल में शामिल हुए, तो उनके खिलाफ सीधे निलंबन की कार्रवाई होगी।

यूपी, हिप्र और हरियाणा सरकार से मांगी मदद
सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार ने जनता की सहुलियत के मद्देनजर यूपी, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा से भी मदद मांगी है। इन तीनों राज्यों में भी भाजपा की सरकारें हैं। इन राज्यों से ऐसे बिजली कर्मचारी उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है जो बिजली परियोजनाओं और ग्रिड में काम करने में माहिर हैं।

टीएचडीसी व एनएचपीसी भी अलर्ट
सरकार ने एहतियात के तौर पर टीएचडीसी, एसजेवीएनल, एनटीपीसी, एनएचपीसी को भी अलर्ट मोड पर कर दिया है। ऊर्जा के तीनों निगमों के कर्मचारी यदि हड़ताल पर जाते हैं, तो फिर इन सभी निगमों का तकनीकी स्टाफ उत्तराखंड की मदद करेगा। इनसे भी कर्मचारियों की ऐसे कर्मचारियों की सूची मांगी गई है। हालांकि टीएचडीसी के डीजीएम डा. एएन त्रिपाठी ने बताया कि अभी राज्य सरकार ने इस बाबत संपर्क नहीं किया है। सरकार ने जल संस्थान, जल निगम, लोनिवि और सिंचाई विभाग के इंजीनियरों की भी ड्यूटी लगाने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग 
संयोजक इंसारुल हक ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और ऊर्जा मंत्री डॉ हरक सिंह रावत से अनुरोध किया कि वे इस मामले के शांति पूर्वक समाधान के लिए आगे आएं और कर्मचारियों के साथ वार्ता कर इस समस्या का समाधान करें।

समर्थन की अपील की
विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सभी आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों से समर्थन देने की अपील की।

उपभोक्ता तीन गुना हुए कर्मचारी आधे रह गए
मोर्चा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राज्य गठन के समय राज्य में कुल आठ लाख के करीब उपभोक्ता थे जबकि उस वक्त कर्मचारियों की संख्या आठ हजार थाी। लेकिन वर्ष 2021 में उपभोक्ता 28 लाख हो गए हैं जबकि कर्मचारी केवल 4000 ही बचे हैं ।