उत्तराखंड में बन विभाग के जंगल से निकलकर अब शहर में घूमा एक गुलदार! जी हाँ, शहर की गलियों और घर-आँगन तक पहुंच गया ये खूंखार जानवर, जिसने लोगों की नींद उड़ा दी है। डर की सारी सीमाएं टूट गई हैं, और स्थानीय लोग दहशत में हैं। आज की रिपोर्ट में हम दिखाएंगे कि किस तरह यह शिकारी अपने रास्ते पर लगातार खतरा फैला रहा है और वन विभाग ने क्या कदम उठाए हैं। दोस्तो वैसे तो पूरे उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों का आतंक है। वहीं ये खबर रुद्रप्रयाग से है जहां शहर के रिहायशी इलाकों में एक बार फिर गुलदार की धमक से हड़कंप मच गया है। अपर बाजार क्षेत्र में एक गुलदार (तेंदुआ) को गलियों में घूमते हुए देखा गया। पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दोस्तो सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि बेखौफ गुलदार आबादी वाले क्षेत्र में दाखिल हो रहा है और कुछ देर तक गलियों में घूमता नजर आता है। रात के सन्नाटे में उसकी मौजूदगी ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी। घटना के बाद से व्यापारियों और निवासियों में भारी दहशत है। दोस्तो वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन और पानी की तलाश में जंगली जानवर अब आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी गुलदार को शहर के बीचों-बीच इस तरह घूमते नहीं देखा। शाम ढलते ही लोग घरों में सिमटने को मजबूर हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
दोस्तो घटना के बाद लोगों में आक्रोश भी देखा गया। क्षेत्रवासियों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘वन विभाग जंगल में है, जबकि गुलदार शहर में घूम रहा है। व्यापारियों और मोहल्लावासियों ने वन विभाग से तत्काल गश्त बढ़ाने, पिंजरा लगाने और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी तेज करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कोई बड़ी घटना हो सकती है। दोसोत स्थानीय लोगों ने प्रशासन से रात के समय अतिरिक्त पुलिस गश्त, मुनादी के जरिए जागरूकता और स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था करने की अपील की है। बीते एक साल में गुलदारों को कई बार शहरी इलाकों में घूमता हुआ देखा गया है, जिससे लोगों को अपने बच्चों की चिंता सता रही है जबकि पालतू जानवर भी सुरक्षित नहीं हैं। यहां तो दोस्तो फिलहाल लोगों को देर रात घर से बाहर न निकलने और सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। शहर के बीचों-बीच गुलदार की मौजूदगी ने प्रशासन और वन विभाग की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद क्षेत्र में जागरूकता अभियान के साथ ही गुलदार पर नजर रखी जा रही है, जिससे कोई बड़ी घटना ना हो लेकिन ये सिर्फ एक मामला नहीं है जहां लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं। इससे पहले भी रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि विकासखंड अंतर्गत ग्राम जलई में मंगलवार सुबह भालू के हमले की एक और घटना सामने आई है। घास लेने जंगल गई निशा देवी पर भालू ने अचानक हमला कर दिया। महिला के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग रेफर किया गया है। घटना सुबह करीब 10:30 बजे की है। साथ गई महिलाओं के शोर मचाने पर भालू मौके से भाग गया। डॉक्टरों के अनुसार महिला की हालत स्थिर है, लेकिन सिर में गंभीर चोट के कारण निगरानी में रखा गया है। यह कोई अलग घटना नहीं है।
रुद्रप्रयाग और आसपास के इलाकों में भालू के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, खासकर उन महिलाओं पर जो रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए जंगल जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों में डर का माहौल है और लोग वन विभाग से ठोस, ज़मीनी सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं। दोस्तो मानव–वन्यजीव संघर्ष अब अपवाद नहीं, लगातार दोहराई जा रही हकीकत बनता जा रहा है। उधर देहरादून जनपद के जौनसार बावर क्षेत्र में फिर भालू का हमला सामने आया है। त्यूणी के निमगा गांव निवासी पशुपालक जगत सिंह रावत पर मंगलवार शाम उस वक्त भालू ने हमला कर दिया, जब वे रोज की तरह बकरियों को जंगल में चराने ले गए थे। साथियों के शोर मचाने पर भालू जंगल की ओर भाग गया। ग्रामीणों ने घायल जगत सिंह को तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र त्यूणी पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार चेहरे, सिर और गर्दन पर गहरे नाखूनों के घाव हैं और काफी रक्तस्राव हुआ है। राज्य के अलग-अलग जिलों में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष के बीच यह घटना फिर सवाल खड़े करती है कि आखिर पहाड़ के लोगों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे। उत्तराखंड के पहाड़ों में अब डर सिर्फ जंगल तक सीमित नहीं रहा। जंगल से निकलकर गुलदार और भालू शहरों और गांवों की चौखट तक पहुंच चुके हैं। रुद्रप्रयाग के अपर बाजार में बेखौफ घूमता गुलदार सीसीटीवी में कैद हुआ है, तो वहीं अगस्त्यमुनि और जौनसार-बावर में भालू के हमलों ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। सवाल बड़ा है—क्या पहाड़ में इंसान और वन्यजीव आमने-सामने आ चुके हैं? क्या वन विभाग की तैयारियां नाकाफी हैं, या बढ़ता मानव अतिक्रमण इस टकराव की जड़ है? आज की इस खास रिपोर्ट में दिखाएंगे कैसे डर के साये में जी रहे हैं पहाड़ के लोग और कब थमेगा ये मानव-वन्यजीव संघर्ष