Rishikesh मास्टरजी के इस्तीफे से मचा हड़कंप!| Dinesh Chandra Master | Boby Panwar | Uttarakhand News

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उत्तराखंड की सियासत में आज बड़ी हलचल है ‘स्वाभिमान’ की बात करने वाला मोर्चा अब अंदरूनी दरारों से जूझता दिख रहा है। Uttarakhand Swabhiman Morcha में आई इस ताज़ा टूट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘मास्टर जी’ के नाम से पहचाने जाने वाले वरिष्ठ चेहरे के इस्तीफे ने संगठन के भीतर भूचाल ला दिया है। क्या यह महज़ व्यक्तिगत फैसला है या फिर अंदर ही अंदर चल रही नाराज़गी का विस्फोट? क्या इस कदम से मोर्चे की सियासी जमीन खिसकेगी? और सबसे बड़ा सवाल — क्या अब अकेले पड़ गए हैं Bobby Panwar? दोस्तो प्रदेश में एक क्षेत्रीय दल की मौजूदगी के बाद भी बना उत्तराखंड स्वभिमान मोर्चा शायद आगामी चुनाव में पहाड़ के लिए सियासी मोर्चांबंदी कर पाए क्योंकि ये मोर्चा हात उत्तराखंड की करता है। पहाड़ और पहाड़ियों की करता है जैसा कि उत्तराखंड क्रांति दल कर करता लेकिन ये मोर्चा चुनाव से पहले ही संकट में घिरता दिख रहा है क्योंकि उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा एक और बड़े विकेट का गिरने का मतलब है। एक और नई चुनौती मास्टर जी के इस्तीफे के पीछे की असली वजह क्या है। संगठन में किस बात को लेकर मतभेद गहराए और आने वाले चुनावी समीकरणों पर इसका क्या असर पड़ेगा? ये सभी सवाल आज पूछा जा रहा है लेकिन दोस्तो ये भी सच है की दिनेश चंद्र मास्टर ने अलग होने का ऐलान कर दिया है।

दोस्तो निकाय चुनाव में नगर निगम मेयर पद के उम्मीदवार दिनेश चंद्र मास्टर ने उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा से अलग होने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वे स्वतंत्र रूप से राज्य के विकास में योगदान देंगे। इस्तीफे के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोस्तो निकाय चुनाव में नगर निगम मेयर पद के उम्मीदवार के रूप में चर्चा में आए दिनेश चंद्र मास्टर ने अचानक उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा से अलग होने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि वह अब स्वतंत्र रूप से राज्य के विकास और स्थानीय लोगों के हितों के लिए कार्य करेंगे। गुरुवार को ऋषिकेश के गीतानगर निवासी दिनेश चंद्र मास्टर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस्तीफे को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि वह मोर्चा के संस्थापक सदस्य हैं, लेकिन निजी कारणों से उन्होंने अपना इस्तीफा संगठन से जुड़े बॉबी पंवार को भेज दिया है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे।दोस्तो वहीं बात चुनाव की भी हो रही है। आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर उनका कहते हैं कि वह जनता की इच्छा के अनुसार निर्णय लेंगे। इस्तीफे को लेकर कई तरह की चर्चा दिनेश चंद्र मास्टर के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह ऋषिकेश सीट से मोर्चा के उम्मीदवार बनना चाहते थे, जबकि संगठन उन्हें पौड़ी से चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रहा था।

इतना ही नहीं दिनेश चंद्र मास्टर ने अपने सोशल मीडिया हेडल पर पत्र भी साझा गिया देखिए उसमें क्या लिखा। विषयः उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा संगठन से हर प्रकार के सदस्यता और दायित्व से स्वैच्छिक सेवानिवृत लेने के संबंध में। महोदय, मैं दिनेश चंद्र मास्टरजी उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा संगठन से स्वैच्छिक सेवानिवृत लेना चाहता हूं। महोदय मेरा जुड़ाव और लगाव हमेशा प्रदेश और प्रदेश वासियों के साथ रहा है और प्रदेश हित के लिए मैं हमेशा आप और आपके संगठन के साथ खड़ा मिलूंगा। परन्तु में राजनीतिक और सामाजिक लड़ाइयों को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेकर लड़ना चाहता हूं। अतः मुझे दिनांक 19-02-2026 से मेरे पद से मुझे पदमुक्त समझा जाए। एवं मेरी जिम्मेदारियों को किसी अनुकूल साथी को सौंप दिया जाए।मैं संगठन द्वारा दिए गए सम्मान जिम्मेदारी और समग्र साथ के लिए आजीवन आभारी रहूंगा।आपका शुभेच्छु दिनेश चंद्र मास्टरजी संगठन प्रभारी उत्तराखंड जी हां दोस्तो ये वो इस्तीफा है। अब इसके कारम खोजे जा रहे हैं दोस्तो सूत्रों के अनुसार, इसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनने के कारण मामला इस्तीफे तक पहुंचा। हालांकि, उन्होंने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य स्वतंत्र रहकर जन मुद्दों के लिए संघर्ष करना है, लेकिन दोस्तो मास्टर जी का उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा से अलग होने का मतलब क्या निकाला जाए।

वैसे दोस्तो प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पूर्व एक नये राजनीतिक मोर्चे का गठन हो गया। बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पंवार की अध्यक्षता में गठित मोर्चे का नाम “उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा” रखा गया है। दोस्तो मोर्चे में मुख्य तौर पर बेरोजगार संघ व मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के सदस्य शामिल हुए। दोस्तो उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में चुनावी वर्ष से पहले हलचल तेज हो गयी है। बॉबी पंवार के नेतृत्व वाले उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा से संस्थापक सदस्य और ऋषिकेश मेयर चुनाव के चर्चित प्रत्याशी दिनेश चंद्र मास्टर के उनके द्वारा ‘वीआरएस’ बताकर दिए गए इस्तीफे ने संगठन की एकजुटता पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। हाल के महीनों में यह मोर्चा को दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। दिनेश चंद्र मास्टर के इस्तीफे से पहले मूल निवास-भूकानून आंदोलन से जुड़े मोहित डिमरी को भी मोर्चा से हटाया गया था। इसके अतिरिक्त सुनील सिलस्वाल के अलग होने की खबरें भी सामने आयी थीं। लगातार हो रहे इन घटनाक्रमों को मोर्चा के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार चुनावी वर्ष से पहले क्षेत्रीय दलों में असंतोष या पुनर्संरचना भविष्य के गठबंधनों और वो ट समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

उत्तराखंड की राजनीति में क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय दलों की बहस लंबे समय से चल रही है, ऐसे में प्रमुख चेहरों की भूमिका आगामी समय में निर्णायक हो सकती है।अब बड़ा प्रश्न यह है कि क्या क्षेत्रीय ताकतें एक मंच पर आयेंगी या अलग-अलग राह चुनेंगी। आने वाले महीनों में दिनेश चंद्र मास्टर की राजनीतिक दिशा और स्वाभिमान मोर्चा की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी। दोस्तो बॉबी पंवार की अध्यक्षता में बनाए गए उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के माध्यम से उत्तराखंड को एक नया राजनीतिक विकल्प देने का संकल्प लिया है कहा ये गया कि राष्ट्रीय दलों की सरकारों द्वारा उत्तराखंड में विगत 25 वर्षों से जो विकास होना चाहिए था वह आज भी धरातल पर नहीं हो पाया है । और क्षेत्रीय शक्तियां अलग-अलग गुटों में बंटकर रह गई हैं। लोकसभा चुनाव में बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पंवार ने टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर डेढ़ लाख से अधिक मत हासिल किए थे। ऋषिकेश मेयर नगर निगम से निर्दलीय दिनेश चंद्र मास्टर जी मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे जबकि केदारनाथ सीट पर निर्दलीय त्रिभुवन के 9 हजार से अधिक मत मिलने से BJP की जीत आसान हो गयी थी।अब यहां दिनेश चंद्र मास्टर जी ने मोर्चा को अलविदा कह दिया है ऐसे में आगे क्या देकने को मिलेगा ये भी बड़ा दिलचस्प रहने वाले है।