दोस्तों, एक बार फिर पहाड़ों पर जनता लहुलूहान है, एक बार फिर ग्रामीणों को जख्म दे रहा है जिगली जानवर और उस पर नमक रगड़ने का काम कर रहा है हमारा सिस्टम, लेकिन इस बार मामला हद को पार कर चुका है। टिहरी में ग्रामीणों का गुस्सा फूटा और डीएम ऑफिस का घेराव कर दिया। क्या वन विभाग की लापरवाही ही ऐसी घटनाओं की वजह बन रही है? क्या अधिकारियों की जिम्मेदारी का यही हाल है? कैसे भालू ने फिर लोगों की सुरक्षा को चुनौती दी और क्यों ग्रामीणों ने प्रशासन पर दबाव बनाया और क्या कह डाला इस बार। दोस्तो बड़ी चुनौतियों का सामने कर रहे हैं उत्तराखंड के पहाड़ी इस बार जो अटैक हुआ है उसने आम जनता के साथ ग्राम प्रधान को भी नहीं छोड़ा, भालू ने ऐसे-ऐसे जख्म दिए हैं कि मै आपको सीधे-सीधे दिखा भी नहीं सकता लेकिन मै आपको लोगों के आक्रोष को दिखा सकता हूं और ग्रामीणों की परेशानी को आवाज दे सकता हूं। जी हां दोस्तो ये गुस्सा अब अब अपनी सीमाओ को पार कर रहा है। दोस्तो टिहरी गढ़वाल के थौलधार ब्लॉक में भालू ने 3 लोगों पर हमला कर दिया जिसमें तीनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उधर, लोगों ने डीएफओ को हटाने की मांग की है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पूर्व इसी जगह पर एक महिला पर भी भालू ने हमला किया था।
दरअसल, दोस्तो चंबा-धरासू मोटर मार्ग पर सुल्याधार के पास थापली तोक पर भालू ने ग्राम प्रधान बेरगणी युद्धवीर सिंह रावत, फॉरेस्टर अजयपाल पंवार, विनोद सिंह रावत पर हमला कर दिया. ये तीनों अन्य ग्रामीणों के साथ भालू की गतिविधियों देखने के लिए पहुंचे थे, लेकिन वहां पहले से मौजूद भालू ने तीनों पर हमला कर दिया। हमले में तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं ग्रामीणों ने घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन दोस्तो इस बार ग्रामीण काफी गुस्से में दिखआई दिए हैं। दोस्तो इस दौरान वन विभाग की कार्यशैली से नाराज ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर पहुंच गए और डीएफओ के खिलाफ नारेबाजी कर तत्काल डीएफओ को हटाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों का कहना है कि, वन विभाग के डीएफओ को भालू के खतरे की जानकारी दे गई थी। लेकिन उन्होंने बिना हथियारों के केवल लाठी डंडों के सहारे विभाग के कुछ कर्मचारियों को मौके पर भेजा। उन्होंने कहा कि आज जो घटना हुई, उसके लिए डीएफओ जिम्मेदार है।
वहीं घायल ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह रावत ने कहा कि, भालू की गतिविधियों की सूचना देने के दौरान डीएफओ ने बीच में ही फोन काट दिया। जब तक डीएफओ को नहीं हटाया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। वहीं अन्य लोग भी काफी गुस्से में दिखाई दिए, दोस्तो वैसे ये परेशानी नई नहीं है लगातार ऐसे मामले ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आते रहे हैं। यहां लोगों का गुस्सा अब इस बात को लेकर की ना ही डीएफओ के पास ऐसा कोई प्लान है जिससे ये घटनाओं पर अंकुश लगे और ना ही वन विभाग ने आजतक कोई ऐसी ठोस व्यवस्था की जिसेसे की ग्रामीण अपने आपको सुरक्षित महसूस करें। दोस्तों, ये भालू का हमला सिर्फ एक वन्य जीव की हिंसा नहीं है, बल्कि हमारी प्रशासनिक लापरवाही की भी हकीकत दिखाता है। ग्रामीणों का गुस्सा और डीएफओ के खिलाफ धरना साफ बताता है कि ऐसे मामलों में ठोस योजना और सुरक्षा इंतजाम की कितनी कमी है। अब सवाल यही है—क्या हमारी सिस्टम इन पहाड़ी क्षेत्रों की जनता की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएगी, या फिर आम लोगों को लगातार जोखिम उठाते रहना होगा?