जी हां दोस्तो अंकिता भंडारी हत्याकांड की एक तरफ सीबाआई जांच की मांग तेज हो रही है। इधर पलट गया पूरा खेल किसने और क्यों बता दिया इसे बड़ी साजिश और देहरादून पहुंची उर्मिला सनावर के इस मामले में पीछे हटने की सच्चाई क्या है बताउंगा आपको अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। Ankita Bhandari Murder Case दोस्तो 9 दिन बाद देहरादून पहुंची उर्मिला सनावर से काफी उम्मीदें इस बावत की जा रही थी कि वो जिस तरह की बातें अपने वीडियो के जरिए करती आई हैं फिर वो उनके पति सुरेश राठौर के खिलाफ हो या फिर अंकिता को न्याज दिलाने मामले में दूर से धात लगाने वाली उर्मिला देवभूमि पहुंचते ही असहज नजर आई और जिसके साथ वो देहरादून लौटी या यूं कहीं जिसको उर्मिला ने माना अपना संरक्षक उसी ने कैसे पलट दिया खेल वो मै बताउंगा आपनी इस रिपोर्ट के जरिए। पहले मै आपको उर्मिला सनावर का वो बयान दिखाना चाहता हूं, जब वो देहरादून पहुंची ही थी उन्होंने क्या कहा जांच में सहयोग की बात करती दिखाई दी, लेकिन दोस्तो ऐसा क्या हुआ कि देहरादून पहुंचते ही इस पूरे मामले में नया ट्विस्ट आ गया वो ट्विस्ट ये कि जिस हिंदू नेता के साथ उर्मिला सनावर उस नेता के बयान से मामला अब अंकिता इंसाफ की जगह एक साजिशकी ओर चला गया। मामरा उर्मिला सनावर बनाम सुरेश राठौर हो गया। जी हां बीजेपी को बदनाम करने की साजिश थी। इसका जवाब आता है कि हां मुझे तो ऐसा ही लगता है। इतना ही नहीं कैसे इसम मामले को अब सुरेश राठौर और दुष्यंत कुमार की दुश्मिनी का एंगल लाया जा रहा है क्या माले को भटकाटा जा रहा है।
दोस्तो इतना ही नहीं है जिसे संरक्षण पर कल तक जहां उर्मिला सनावर लड़ाई लड़ने की बात कर रही थी, वो अब इस पूरे मामले पर सुरेश राठौर के बेड़ा गरक होने की बात के साथ ही मारने की बात कर रहे हैं। वीआईपी है तो वो सुरेश राठौर के पता है, क्या ये मामला अब अंकिता को न्याय की बजाया कहीं और जा रहा है। 1.00-2.00 इतना भर होता तो वो ठीक लेकिन यहां मामले को उर्मिला बनाम सुरेश राठौर की तरफ लेजाकर बीजेपी के खिलाफ साजिश कहा जाने लगा है आगे चल कर वो दिन दूर नहीं जब एक दिन पहाड़ की जनता सकड़ पर अंकिता को न्याय की लड़ाई लड़ती रह जाएगी और उर्मिला सनावर अपने बयान से पलट जाएगी। मामले को यूं ही खत्म कर दिया जाएगा, क्योंकि अब इन महंत साहब की बातों से मुझे कुछ ऐसा लग रहा है। वैसे इनका इतिहास देखेंगे तो वो भी कुछ ऐसा कहता है। कभी ये कांग्रेस के बड़े फेन हुआ करते थे। अभी ये कहा जा रहा है कि इनका बीजेपी से गजब का लगाव है तो फिर कैसे ये समझा जा सकता है कि इस मामले से बादल छटेंगे तो उसमें इन महंत जी की भूमिका अहम रहेगी। दोस्तो अब तक इस बदलते घटनाक्रम को देख कर तो कहीं भी ऐसा नहीं लग रहा है कि प्रदेश की जनता की मांग पर कुछ ठोस देखने को मिलेगा, क्योंकि अब इस पूरे मामले को अलग तरह से घुमाने की कोशिश होने लगी है। ऐसा लगता है, लेकिन फिर अगर इन हिंदू नेता जी की बातों पर विस्वास कर भी लिया जाए तो फिर जांच जरूरी लगती है।