जी हां दोस्तो अपने उत्तराखंड में यूसीसी के एक साल बाद क्या रहा हाल कितना दिखा बदलाव, अवैध कब्जों पर बुलडोजर से लेकर समान नागरिक संहिता, यानी UCC लागू होने के एक साल तक की कार्रवाई ने सबकी नजरें खींची हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी के ये फैसले आखिर कितना असर दिखा पाए? क्या कानून की पकड़ मजबूत हुई या जमीन पर हकीकत कुछ और ही कहती है? सीधे उन इलाकों से जहां इन फैसलों ने असली बदलाव दिखाया है। दोस्तो उत्तराखंड में कई मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठते रहे हैं। डेमोग्राफिक बदलाव से लेकर UCC का मामला उत्तराखंड सरकार के लिए बड़ी चुनौती रहा है। मगर, राज्य सरकार ने कड़े फैसले लिए। अवैध कब्जों पर बुलडोजर एक्शन के अलावा राज्य में UCC लागू होने के एक साल बाद लोगों पर उसका कितना असर हुआ? दोस्तो उत्तराखंड के घने जंगलों के बीच, बस्तियों से दूर, टूटी हुई और उजड़ी हुई निशानियां अपने पथरीले आगोश में एक ऐसा सच दबाए हुए हैं, जिसे लेकर कई सवाल उठे। उत्तराखंड सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया गया। वजह ये थी कि सरकारी जमीनों को कब्जे से खाली कराने के लिए अवैध ढांचों पर हथौड़े चले तो बात बहुत दूर तक गई।
ऐसे में पूरे सच की तहकीकात के लिए टीवी9 भारतवर्ष की टीम उत्तराखंड में उन जगहों पर गई, जहां सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाए गए यहां में बात करना चाहूंगा देहरादून के चकराता की। चकराता के जंगलों में इन जगहों पर घूमते हुए हमारा सामना उस सच से हुआ जिससे अभी तक बहुत से लोग अनजान हैं। इस रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में कई अवैध मजारें बनी हुई थीं, जहां कुछ दिनों पहले तक लोगों का जमावड़ा भी हुआ करता था। सामाजिक कार्यकर्ता राकेश का दावा है कि पिछले कुछ सालों में प्रशासन के साथ मिलीभगत करके यहां की डेमोग्राफी में भी बदलाव किया गया। 2001 में मुस्लिम जनसंख्या एक लाख थी। 2025 तक 27-28 लाख हो जाते हैं। 2010 के बाद 10 लाख लोग यहां आकर बस गए हैं। भ्रष्ट अफसरों ने उनके कागजात बनाए. डेमोग्राफी चेंज करने का काम किया। वहीं दूसरी ओर एक सवाल ये कि प्रदेश भर में कई घटनाक्रम विवादों मे रहे। खासकर कब्जा मुक्त अभीयान को लेकर क्या रहा है हाल ये जानना भी बेहद जरूरी है। दोसतो, अभी तक 3,560 एकड़ वन भूमि और 1,520 एकड़ अन्य सरकारी भूमि अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई है। 536 अवैध मजारों को ध्वस्त किया गया। इसके अलावा 42 अन्य धार्मिक स्थलों को भी हटाया गया। दोस्तो राज्य के सीएम पुष्कर सिंह धामी कहते हैं, अवैध संरचना कहीं भी नहीं होनी चाहिए। सरकारी जमीनों पर तो कतई नहीं होना चाहिए। उसी को लेकर हमने यह अभियान चलाया कि जितनी भी अवैध संरचनाएं हैं, अतिक्रमण है, उसको हटाया जाना चाहिए।
राज्य के अंदर बड़े पैमाने पर लगभग 600 से भी अधिक ऐसी अवैध संरचनाओं को हटाने का काम हुआ है और 10 हजार एकड़ से अधिक भूमि इस अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है। दोस्तो यहां ये बता दूं कि कि उत्तराखंड में देहरादून, उधम सिंह नगर, नैनीताल और हरिद्वार के इलाके डेमोग्राफी में आए बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। अब सरकार ऐसे सभी इलाकों की निशानदेही कर रही है और कार्रवाई भी की जा रही है। चकतारा में एक अवैध अतिक्रमण को लेकर स्थानीय निवासी जगबीर सिंह कहते हैं, यहां पर दुकान थी, कमरा था लाइट-पानी की व्यवस्था थी, बहुत बड़ी मजार थी जाम लगा करता था। पुराने समय से अतिक्रमण था। उधर, सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई के अलावा उत्तराखंड में सबसे पहले UCC, यानी समान नागरिक संहिता लागू किए जाने पर भी आशंकाएं और सवाल उठे थे लेकिन यहां ज्यादातर लोग UCC लागू होने से खुश हैं। खासकर महिलाएं इसे गेमचेंजर मान रही हैं. उत्तरकाशी के पोखरी गांव के रहने वाले कई लोगों का कहना है कि इससे आसानी से कोई दूसरी शादी नहीं कर सकता। ये प्रूफ है कि ये शादीशुदा है.इसके अलावा कुछ लोगों का कहना है कि ये सबके लिए अच्छा है। कोई किसी को नहीं छोड़ सकता कि बाहर अफेयर चलाए। इससे बहुत सुविधा मिली है। धर्म और जाति के नाम पर महिला पुरुष के नाम पर बहुत कानून बने हैं। कानून को समानता दी है।
सरकार ने बड़ा कदम उठाया है, हम खुश हैं, जब UCC लागू हुआ था, तब भी राज्य सरकार ने सभी वर्गों के लिए इसे क्रांतिकारी बताया था। अब उस फैसले पर उत्तराखंड सरकार का भरोसा और बढ़ा है। दोस्तो इसे लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी कहते हैं, यूसीसी सबकी अच्छाई के लिए, सबकी सुरक्षा के लिए है. सशक्तिकरण के लिए है। विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण दोनों का प्रावधान इसमें किया गया है। यह तो भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में इसका प्रावधान किया गया है। उसी के तहत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव में जनता को हमने वचन दिया था कि हमारी सरकार बनते ही हम यूसीसी राज्य के अंदर लागू करेंगे. हमने वचन को पूरा किया। दोस्तो, एक साल बाद भी उत्तराखंड में अवैध कब्जों पर बुलडोजर और समान नागरिक संहिता यानी UCC ने अपनी ताकत दिखा दी है। सरकार ने न केवल जमीन को कब्जे से मुक्त कराया, बल्कि कानून की पकड़ भी मजबूत की। सवाल अब ये है कि क्या ये कार्रवाई स्थायी बदलाव लाएगी? या फिर नए विवादों के बीज वहीं कहीं छुपे हैं? इस कहानी का असली असर आने वाले महीनों में ही साफ होगा। टीवी9 भारतवर्ष के साथ जुड़े रहिए, क्योंकि हम लाते रहेंगे आपके लिए पूरे राज्य से हर अपडेट, हर हकीकत, सीधे ग्राउंड से।