कैसा रहा CM धामी का 4 साल का काम? | CM Dhami | Congress | Uttarakhand News

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दोस्तो अपने उत्तराखंड में धामी सरकार ने अपने चार साल पूरे कर लिए हैं। इन चार सालों में कई बड़े फैसले, विकास की पहल और ऐतिहासिक कदम सामने आए हैं। आज मै आपको दिखाउंगा कि CM पुष्कर सिंह धामी का इन चार सालों का सफर कैसा रहा और कौन-कौन सी उपलब्धियां सुर्खियों में रहीं और कैसे बीजेपी वाले सह रहे हैं चार साल ‘बेमिसाल’ क्या आपको लगता है।दोस्तो वैसे तो सरकारें कई आई चली गई, कई मुख्यमंत्री भी बदले बल, लेकिन सवाल ये कि क्या उत्तराखंड में बदलाव आया। क्या सरकारों के साथ अपनी देवभूमि भी बेसिशाल बन पाई… ये सवाल आज आपके मन में कोंधता होगा जरूर। इससे अलग दोस्तो उत्तराखंड की बीजेपी सरकार के लिए 23 मार्च का दिन खास रहा। पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार ने अपने कार्यकाल के चार साल पूरे कर लिए। इन चार सालों में धामी सरकार ने कई ऐतिहासिक और साहसिक फैसले लिए हैं। वैसे कुछ फैसलों के बारे में बात देश तक में खूब हुई। दोस्तो धामी सरकार की मुख्य उपलब्धियों में यूसीसी (समान नागरिक संहिता) जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून, सख्त नकल विरोधी कानून शामिल रहे।

इसके साथ ही धामी सरकार का दावा है कि उन्होंने 9,000 एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। सरकार की चार साल की उपलब्धियों में 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करना भी शामिल है, लेकिन मै आपको सिलसिलेवार तरकीके से बताने जा रहा हूं। आप थोड़ा गौर कीजिएगा और ये आकलंन भी कीजिएगा की प्रदेश हित में आम जन की जिंदगी पर इन बड़े फैसलों का क्या प्रभाव पड़ा है। दोस्तो मै शुरुआत UCC से करने जा रहा हूं। धामी सरकार ने 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में यूसीसी यानी समान नागरिकता कानून लागू किया। देश की आजादी के बाद यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बन गया। यूसीसी लागू करते हुए सीएम धामी ने कहा था कि यह कानून विवाह, तलाक, संपत्ति और विरासत के मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान नियम सुनिश्चित करता है। दोस्तो इसकी चर्चा देशभर में खूब हुई थी। उसके बाद आता है एक फैसला जिसको लेकर सरकार को अपने ही प्रदेश में कई बार घिरना भी पड़ा वो है- अतिक्रमण मुक्त अभियान। धामी सरकार ने बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मुहिम चलाई। सरकारी आंकड़े के अनुसार सरकारी भूमि से ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 9,000 एकड़ से अधिक भूमि को मुक्त कराया गया है। भ्रष्टाचार पर नकेल

उत्तराखंड की धामी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए। सीएम धामी समय-समय पर कहते रहते हैं कि उनकी सरकार ने करप्शन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। इसके तहत अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में करीब 200 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। विजिलेंस ने 82 लोगों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। इस दौरान आईएएस और आईपीएस समेत वरिष्ठ अफसरों पर भी कार्रवाई की गई है। भूमि घोटाले में 12 बड़े अधिकारी निलंबित किए गए। दोस्तो वैसे भ्रष्टाचार तो है ही प्रदेश के लिए बड़ा मुद्दा, लेकिन इसके अलावा एक और बड़ी चुनौती दो देखने को मिली थी वो युवाओं को रोजगार और प्रतियोगी परीक्षओं का अटक लटक भटक जाना। इसके लिए दोस्तो सख्त नकल विरोधी कानून। उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक बड़ी समस्या बन गए थे। नकल माफिया सिस्टम पर हावी हो गया था। इससे युवाओं में निराशा और आक्रोश पैदा हो रहा था। ऐसे में धामी सरकार ने 10 फरवरी 2023 को देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून (उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा अध्यादेश, 2023) राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू कर दिया। यह कानून राज्य में पेपर लीक और नकल रोकने के लिए लाया गया। इस कानून के तहत नकल के दोषी को उम्रकैद और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है। दोस्तो नकल विरोधी कानून के बाद ये आज जगी युवाओँ में की अब परीक्षाएँ पार्दर्शी तरीके से होंगी, लेकिन प्रदेश की धामी सरकार अपने एक और बड़े फैसले के लिए चर्चा में आई थी दोस्तो वो है धर्मांतरण विरोधी कानून।

उत्तराखंड में धर्मांतरण विरोधी कानून हालांकि अप्रैल 2018 में त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार के दौरान पारित किया गया था। नवंबर 2022 में धामी सरकार के दौरान इसे अधिक सख्त बनाया गया जिसके तहत जबरन धर्मांतरण कराने वाले की अधिकतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी गई। 2025 में इसे और सख्त बनाने के लिए प्रावधान जोड़े गए। इसके अलावा दोस्तो बहुतेर फैसले हुए हैं फिर चाहे उत्तराखंड की धामी सरकार का दावा है कि उहोंने पिछले चार साल में 26,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं. सरकार का लक्ष्य अगले साल तक यह संख्या 36,000 से अधिक करने का है। उत्तराखंड की धामी सरकार ने मूल निवास और सशक्त भू कानून की मांग को लेकर हुए बड़े आंदोलनों का संज्ञान लेते हुए बड़ा कदम उठाया। उत्तराखंड के 11 पहाड़ी जिलों में बाहरी लोगों द्वारा कृषि और बागवानी भूमि की खरीद पर रोक लगा दी गई है। नगर निकाय क्षेत्रों के बाहर केवल 250 वर्ग मीटर भूमि ही खरीदी जा सकेगी। अवैध खरीद पर जमीन सरकार में निहित हो जाएगी। दोस्तो अब सवाल आकल का भी है क्योंकि सरकारी दावों की कीताब में वो सब कुछ है जिससे शायद आपको बड़ी राहत मिली होगी अलग-अलग क्षेत्रों में आकलन इस लिए भी जरूरी है क्योंकि आगे चुनाव भी है। दोस्तो आपको क्या लगता है कैसा लगता है धामी सरकार का ये कार्यकाल आप अपनी राय जरूर दीजिएगा।