जी हां दोस्तो उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवर मौत बनकर घूम रहे हैं, पहाड़ियों में एक साहसिक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जब अचानक गुलदार ने हमला किया, तो एक पिता की जान खतरे में पड़ गई, लेकिन उस खतरे में भी डर नहीं, क्योंकि उसकी बहादुर बेटी पिता की ढाल बन गई। कैसे एक बहादुर बेटी अपने पिता को गुलदार से जबड़े से खींच लाई और कैसे एक बच्चे ने किया भालु का मुकाबला। दोस्तो उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव वन्य जीव संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन जंगली जानवरों के हमले में ग्रामीणों के जान गंवाने की खबरें सुनने को मिल रही है तो यदा कदा कुछ ऐसी भी खबरें सुनने को मिलती जहां साहस और सूझबूझ से पहाड़ के वाशिंदे जंगली जानवरों का डटकर मुकाबला कर अपनी और अपने परिजनों की जान बचा लेते हैं। ऐसी ही खबर लेकर आया हूं दोस्तो जहां एक बेटी अपने पिता को गुलदार के जबड़े छीन लाती है, तो वहीं दूसरी ओर एक स्कूल में पढने वाला अपने दोस्तो को बच्चाने के लिए भालू से भिड़ जाता है। ये दोनों खबरें आप को अंदर सहमा देंगी झकझोर कर रख देंगी। दोस्तो मै आपको बाहदुर बेटी की साहस की कहानी से पहले, एक दोस्त की दिलेरी दिखाना चाहता हूं।
दोस्तो चमोली जिले के पोखरी विकासखण्ड में भालू का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जूनियर हाईस्कूल हरिशंकर में एक छात्र देवेश और पंकेश दोनों कैलब से विद्यालय आ रहे थे। आंगनवाड़ी के पास भालू के बच्चे ने देवेश का पांव पकड़ लिया। भालू पर जब पंकेश ने पत्थर मारा तब भालू ने देवेश का पांव छोड़ दिया, पांव पर हल्का निशान बने हुए हैं जिस पर शिक्षक मनबरसिंह ने छात्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोखरी लेकर आए जहां उपचार किया गया। डॉ मोहनी ने कहा उपचार के बाद छात्र को घर भेज दिया गया है। वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर नेगी ने कहा वन विभाग टीम जांच में लगी हुई है। उस क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। जिससे लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। दोस्तो अब जानवर तो जानवर है ना बच्चों को छोड़ रहा है। ना बड़े बुजुर्गों को ऐसी ही एक साहसिक खबर अल्मोड़ा जिले से सामने आई, जहां एक बहादुर बेटी गीता ने अपनी सूझबूझ और साहस से गुलदार के जबड़े में फंसे पिता की जान बचा ली हालांकि इस हमले में गीता के पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।
दरअसल दोस्तो मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया विकासखण्ड क्षेत्र के भटकोट गांव निवासी 61 वर्षीय चंदन राम केशर इन दिनों बैराठ क्षेत्र के रतनपुर में किराये के मकान में पत्नी और पुत्री के साथ रह रहे थे वहीं से ये खबर आई कि मकान का मुख्य द्वार बंद था और दूसरी मंजिल के बरामदे में कुत्ते बंधे हुए थे। रात के सन्नाटे में अचानक कुत्तों के तेज भौंकने की आवाज गूंजने लगी। इसी दौरान गुलदार छत के रास्ते मकान में घुस आया और सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए बरामदे तक पहुंच गया। कुत्तों के शोर से सतर्क हुए चंदन राम जैसे ही कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर आए, घात लगाए गुलदार ने उन पर झपट्टा मार दिया। दोस्तो, गुलदार ने चंदन राम को जबड़े में दबोच लिया और उन्हें घसीटते हुए सीढ़ियों के रास्ते नीचे ले जाने लगा। इसी बीच चीख-पुकार सुनकर उनकी 24 वर्षीय पुत्री गीता देवी कमरे से बाहर दौड़ी। सामने पिता को गुलदार के मुंह में देख उसने शोर मचाया, जिससे मकान में रहने वाले अन्य लोग भी जाग गए।
दोस्तो इस विषम परिस्थितियों में जहां लोग अपना धैर्य तक को देखते है वहीं गीता ने साहस एवं सूझबूझ का परिचय दिया, हालात की गंभीरता को समझते हुए गीता ने पल भर की भी हिचक नहीं दिखाई। जब पिता गुलदार के जबड़े में थे तो बहादुर बेटी पीछे से गुलदार पर झपट पड़ी और पूरी ताकत से वार कर दिया। अचानक हुए हमले और शोरगुल से घबराया गुलदार चंदन राम को छोड़कर सीढ़ियों के रास्ते छत पर चढ़ा और जंगल की ओर भाग गया दोस्तो इस हमले में चंदन राम के गर्दन, सिर और चेहरे पर दांत व नाखूनों के गहरे घाव हो गए। वह बुरी तरह लहूलुहान हो चुके थे। रात करीब दो बजे उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौखुटिया पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के साथ उनके घावों में 35 टांके लगाए। स्थिति गंभीर होने के कारण शुक्रवार को उन्हें हायर सेंटर बेस अस्पताल अल्मोड़ा रेफर कर दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है। हालकि घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग भी सक्रिय हुआ। वन और रेंज अधिकारी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित को तत्काल 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है, वहीं गीता देवी की बहादुरी की हर ओर चर्चा हो रही है। स्थानीय लोग उसे “पहाड़ की शेरनी” बताते हुए उसकी हिम्मत और साहस एवं सूझबूझ की जमकर सराहना कर रहे हैं। बेटी के इस जज्बे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में पहाड़ की बेटियां किसी से कम नहीं होतीं। बात जब अपने परिवार पर आ जाए तो वह हर परिस्थिति का सामना कर सकती है।