अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब सबको एसआईटी की चार्जशीट दाखिल करने का इंतजार है। इस केस में सबसे अहम चार्जशीट को ही माना जा रहा है। हालांकि हत्याकांड के एक माह गुजर जाने के बाद भी अब तक इस मामले में एसआईटी चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई है। जिसको लेकर लगातार लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। हालांकि अंकिता हत्याकांड मामले में एसआईटी टीम का नेतृत्व कर रही डीआईजी एलओ पी रेणुका देवी का कहना है कि जल्द ही मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी कि कुछ फारेंसिक एविडेंस की रिपोर्ट का इंतजार है।
अंकिता केस को फास्ट ट्रेक में ले जाने और जांच को जल्द से जल्द करने के लिए धामी सरकार ने 24 सितंबर को एसआईटी का गठन किया था। टीम का नेतृत्व डीआईजी एलओ पी रेणुका देवी कर रही हैं। अब तक पूरे मामले में 6 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज करवाएं हैं और साथ ही 30 अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए हैं। एसआईटी पर जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने का दबाव है। लेकिन पुख्ता सबूतों और फॉरेंसिक रिपोर्ट के अभाव में एसआईटी चार्जशीट करने में किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखाना चाह रही है। हालांकि इस मामले में राजनीतिक दबाब के साथ ही पब्लिक का भी प्रेशर बना हुआ है।
अंकिता मर्डर केस के दो आरोपियों को बुधवार को पौड़ी जिला कारागार से शिफ्ट कर दिया गया है। जबकि एक आरोपी अभी पौड़ी जेल में ही है। हत्याकांड के तीनों आरोपी बीती 23 सितंबर से पौड़ी जिला कारागार में बंद थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 30 अक्तूबर को तीनों आरोपियों पर गैंगस्टर ऐक्ट भी लगा दिया था। बुधवार को पौड़ी जिला कारागार खांड्यूसैंण से अंकित को देहरादून तो सौरभ को टिहरी जेल शिफ्ट कर दिया गया है। बुधवार को हत्याकांड के आरोपियों को कड़ी सुरक्षा में शिफ्ट किया गया। जबकि पुलकित आर्य अभी भी पौड़ी जिला कारागार खांड्यूसैंण में बंद है।
अपनी बेटी को न्याय दिलाने को लेकर अंकिता भंडारी के माता और पिता आज नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचे। सीबीआई जांच को लेकर दायर याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में वरिष्ठ न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा की एकलपीठ ने एसआईटी से पूछा कि बुलडोजर चलने के बाद घटनास्थल से आपने क्या-क्या सबूत इकट्ठे किए? कोर्ट ने एसआईटी से शपथ पत्र के माध्यम से 11 नवंबर तक जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।
अंकिता भंडारी की माता सोनी देवी और पिता बीरेंद्र सिंह ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने व दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने को लेकर याचिका में अपना प्रार्थना पत्र दिया। उनके प्रार्थना में कहा गया कि एसआईटी जांच में लापरवाही कर रही है, इसलिए इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। सरकार इस मामले में शुरुआत से ही किसी वीआईपी को बचाना चाह रही है। प्रार्थना पत्र में ये भी कहा गया है कि सबूत मिटाने के लिए बीते दिनों रिसॉर्ट से सटे फैक्ट्री को भी जला दिया गया. जबकि, वहां पर कई सबूत मिल सकते थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, फैक्ट्री में खून के धब्बे देखे गए थे। सरकार ने किसी को बचाने के लिए जिलाधिकारी का स्थानांतरण तक कर दिया। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन पर इस केस को वापस लिए जाने का दबाव डाला जा रहा है।