जी हां दोस्तो उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर बड़ा संकेत और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कांग्रेस के मंच से ऐसा दावा किया गया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। दोस्तो कौन है वो बड़ा नेता,जो जल्द कांग्रेस का दामन थाम सकता है? और क्या यह एंट्री 2027 के चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल देगी? नेता प्रतिपक्ष के इस बयान के बाद बीजेपी से लेकर विपक्षी खेमों तक कयासों का दौर शुरू हो चुका है। क्या कांग्रेस को मिलने वाला है कोई बड़ा चेहरा, या फिर यह सियासी रणनीति का हिस्सा है?देखिए, इस रिपोर्ट में—कांग्रेस में बड़े नेताओं की संभावित एंट्री की पूरी इनसाइड स्टोरी। दोस्तो दोस्तो उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं. इसी कड़ी में कुमाऊं कांग्रेस पार्टी कार्यालय स्वराज आश्रम में एक बैठक का आयोजन किया गया. जिसमें नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या समेत तमाम कांग्रेस के नेता और पदाधिकारी शामिल हुए. इस दौरान आगामी चुनाव की रणनीति को लेकर चर्चा हुई। साथ ही 16 फरवरी को लोक भवन घेराव की तैयारी की समीक्षा की गई।
वहीं, यशपाल आर्या ने दावा किया कि जल्द बड़े नेता पार्टी में शामिल होंगे। यहां आपको ये भी बता दूं कि उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के लिए भले ही अभी वक्त हो, लेकिन राजनीतिक हलचलें तेज होने लगी हैं। राजनीतिक दलों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। हल्द्वानी स्थित कांग्रेस कार्यालय स्वराज आश्रम में आज कांग्रेस पार्टी की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या, उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश समेत पार्टी के कई वरिष्ठ और स्थानीय नेता मौजूद रहे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रणनीति तय करना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना रहा। बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने 16 फरवरी को प्रस्तावित राजभवन घेराव को लेकर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं से देहरादून पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया। यहां जहां यशपाल आर्य ने मौजूदा सरकार की नीतियों से आम जनता त्रस्त है और कांग्रेस पार्टी जनहित के मुद्दों को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी। 12 फरवरी को हल्द्वानी में कांग्रेस पार्टी की एक और महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। इस बैठक में आगामी कार्यक्रमों और संगठनात्मक विस्तार को लेकर ठोस रणनीति बनाई जाएगी।
वहीं दूसरी ओर यशपाल आर्य का वो बयान भी आया जिसने नए कयासों को बल दिया है। जी हां दोस्तो यशपाल आर्या ने कहा कि ‘कांग्रेस पार्टी के संपर्क में कुछ प्रमुख नेता हैं और उनसे लगातार बातचीत चल रही है।’ उन्होंने संकेत दिए कि जल्द ही कई बड़े नेता कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही लेगा और औपचारिक घोषणा भी वहीं से की जाएगी। अब इस बयान पर नए तरह से कयासों का बाजार गर्म है कि आखिर कौन वो बड़े नेता हैं जो चुनाव से पहले कांग्रेस में एंट्री लेने जा रहे हैं। वैसे ये बात दोस्तो किसी छिपी नहीं है कि उत्तराखंड की सियासत में नेताओं का पाला बदलना कोई अचरज में डालने वाली बात नहीं है, लेकिन ये तो लोग सोच ही रहें कि क्यो चुनाव से पहले होगा दलबदल का खेल अगर होगा तो फिर किसके लिए होगा। इसी दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणजीत रावत ने कहा कि पार्टी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से पूरी मजबूती के साथ तैयारी कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि इस बार कांग्रेस के सभी नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेंगे। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जा रहा है और जनता के मुद्दों को लेकर कांग्रेस एकजुट संघर्ष करेगी. जिताऊ और टिकाऊ प्रत्याशी को केंद्रीय नेतृत्व मैदान में उतरेगा। तो दोस्तों, उत्तराखंड की सियासत में 2027 की बिसात अब साफ-साफ बिछती नजर आ रही है।कांग्रेस जहां संगठन को मजबूत करने और सड़कों पर आंदोलन की तैयारी में जुटी है, वहीं बड़े नेताओं की संभावित एंट्री ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। यशपाल आर्य के बयान के बाद सवाल यही है—कौन हैं वो चेहरे, जो चुनाव से पहले कांग्रेस का कुनबा बढ़ा सकते हैं?और क्या ये एंट्री 2027 के चुनावी समीकरण बदल देगी?एक तरफ बीजेपी सत्ता बचाने की रणनीति में जुटी है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस एकजुटता, संगठन और नए चेहरों के सहारे वापसी की तैयारी कर रही हैफिलहाल निगाहें 12 और 16 फरवरी की बैठकों पर टिकी हैं,क्योंकि यहीं से साफ होगा कि उत्तराखंड की राजनीति किस दिशा में करवट लेने वाली है।