हिंदू त्योहारों की पवित्रता कौन करना चाहता है भंग? | Uttarakhand News | Dehradun News | Nakli Paneer

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त्योहारों से पहले पकड़ा ‘पनीर जिहाद’ का जाल, बड़े खुलासे से मचा हड़कंर। त्योहारों की खुशियों के बीच एक चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा हुआ है दोस्तो, उस खुलासे के बारे में बताने के लिए आया हूं। Fake Paneer Haridwar  दोस्तो एक ऐसी खबर जो आपको देखनी चाहिए, पूरी खबर और उसके प्रभाव नुकसान और उसके जाल और साजिश को बाद में बताऊंगा पहले आप खबर देखिए हो क्या रहा है। हरिद्वार के रूड़की क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने एक बड़े नकली पनीर के कारखाने पर छापा मारा है। यहां से बरामद हुए हैं ढाई क्विंटल नकली पनीर, मिल्क पाउडर के दस कट्टे और 75 बोतलें ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की, जिसका इस्तेमाल पनीर बनाने में किया जा रहा था। ये वही पनीर है जिसे नवरात्र जैसे पवित्र पर्वों पर श्रद्धालु प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। सवाल ये उठता है कि त्योहारों की पवित्रता और हमारी सेहत के साथ ऐसा धोखा कब तक चलता रहेगा? और ये कौन लोग हैं। विस्तार से बताता हूं इस पूरे खेल के बारे में, दगड़ियो हर हिंदू त्योहार के पहले की गई तैयारी में साफ-सफाई, पवित्रता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। नवरात्र, दशहरा, दीपावली जैसे पावन पर्वों पर लोग धार्मिक भाव से शुद्ध और ताजा भोजन ग्रहण करते हैं। लेकिन इस पवित्रता के नाम पर एक बड़ा धोखा सामने आया है।

हरिद्वार के रूड़की क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग, तहसील प्रशासन और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम ने खंजरपुर में नदीम के गोदाम पर छापा मारकर नकली पनीर का भंडाफोड़ किया है।गोदाम से लगभग ढाई क्विंटल नकली पनीर, दस कट्टे मिल्क पाउडर और 75 बोतलें ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बरामद हुई हैं। यह इंजेक्शन पशुओं को दिया जाता है ताकि उनकी दूध की उत्पादन क्षमता बढ़े, लेकिन इस खतरनाक दवा का गलत इस्तेमाल पनीर बनाने के लिए किया जा रहा था। इस नकली पनीर को खासकर हिंदू त्योहारों पर प्रसाद के रूप में बेचा जा रहा था। ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। दोस्तो ये मामला केवल खाद्य सुरक्षा का नहीं रह गया है, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ भी है। त्योहारों के समय लोग शुद्धता को सर्वोपरि मानते हैं, लेकिन ऐसे काले कारखाने उनकी आस्था और स्वास्थ्य दोनों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब पूरे प्रदेश और देश में खाद्य सुरक्षा पर कड़े नियम और कानून बने हुए हैं, तब ऐसे नकली और जहरीले पदार्थों का कारोबार क्यों और कैसे फल-फूल रहा है? दोस्तो प्रशासन की सक्रियता और कार्रवाई पर भी लोगों का विश्वास डगमगाया है ये केवल एक घटना नहीं है, बल्कि संकेत है कि कहीं ना कहीं कहीं बड़ी साजिश और जाल बिछा हुआ है, जो त्योहारों के पवित्र अवसरों को जहरीला बना रहा है।

इस काले धंधे में शामिल लोग न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि हजारों परिवारों की खुशियों पर भी चोट कर रहे हैं। इस मामले की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि नकली पनीर बनाने के लिए मिल्क पाउडर का इस्तेमाल तो होता ही है, लेकिन ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की भूमिका सबसे खतरनाक है। यह इंजेक्शन दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को दिया जाता है, लेकिन इसको पनीर में मिलाकर उसकी मात्रा और बनावट बढ़ाई जाती है। इस तरह का पनीर न तो प्राकृतिक होता है और न ही सुरक्षित। इस नकली पनीर का सेवन करने से पेट, जिगर और किडनी जैसी बीमारियां हो सकती हैं। त्योहारों पर खाया जाने वाला प्रसाद श्रद्धालुओं के लिए बहुत खास होता है। यह आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतीक भी होता है। जब इस प्रसाद में मिलावट होती है, तो न केवल स्वास्थ्य संबंधी खतरा बढ़ता है, बल्कि धार्मिक भावना भी आहत होती है। यह मामला इसलिए भी चिंताजनक हो जाता है क्योंकि यह “जिहाद” शब्द के साथ जुड़ा हुआ है, जो सांप्रदायिक और साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा बन सकता है। प्रशासन और समाज को इस तरह के मामलों को बिना किसी भेदभाव के सख्ती से रोकना चाहिए।रूड़की में पकड़े गए नकली पनीर के कारखाने ने त्योहारों की पवित्रता पर सवाल खड़ा कर दिया है। यह जरूरी है कि खाद्य सुरक्षा विभाग, प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियां मिलकर इस काले कारोबार को जड़ से समाप्त करें। साथ ही, जनता को भी जागरूक होना होगा कि वे केवल भरोसेमंद और प्रमाणित दुकानों से ही खाद्य पदार्थ खरीदें।जब तक इस तरह के काले धंधों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक न केवल लोगों का स्वास्थ्य खतरे में रहेगा बल्कि त्योहारों की पवित्रता भी धूमिल होती रहेगी। समाज और सरकार दोनों को मिलकर इस समस्या का समाधान खोजने की आवश्यकता है, ताकि हर परिवार त्योहारों की खुशियों को पूरी शुद्धता और विश्वास के साथ मना सके।