विधानसभा में भाई भतीजावाद वाली भर्तियों पर क्यों चुपी साधे बैठे है हरदा, कही कुंजवाल तो कारण नहीं?

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Uttrakhand politics: उत्तराखंड की विधानसभा में नियुक्ति के दौरान हुई भर्ती भाई भतीजावाद की भेंट चढ़ गई। विपक्ष ने हाल फिलहाल में हुई भर्तियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं तो वहीं सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी ने भी विपक्ष को बीते दौर की याद दिला दी है। दरअसल, भाई भतीजावाद को लेकर हुई भर्तियों की अब जांच की जाएगी। एक तरफ जहां प्रदेश में हंगामा मचा हुआ है वही पूर्व सीएम हरीश रावत ने इस मामले में चुप्पी साधी हुई है। हरीश रावत की खामोशी के पीछे एक बड़ी वजह भी है।

दरअसल, विधानसभा में जिस तरह भाई भतीजावाद को लेकर भाजपा सरकार को घेरा जा रहा है, ऐसी ही नियुक्तियां हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए भी विधानसभा में की गई थीं। बस यही वह वजह है जिसके कारण हरीश रावत खामोश हैं और उनसे जुड़ा खेमा बैकफुट पर दिखाई दे रहा है। हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते उनके बेहद करीबी गोविंद सिंह कुंजवाल विधानसभा अध्यक्ष थे। गोविंद सिंह कुंजवाल वही नेता हैं, जिनकी वफादारी के चलते हरीश रावत अपनी सरकार दलबदल के दौरान बचा पाए थे। हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते गोविंद सिंह कुंजवाल ने भी विधानसभा के अंदर रिश्तेदारों की भर्ती उसी तरह की जिस तरह भाजपा सरकार में प्रेमचंद्र अग्रवाल ने की थी।

कांग्रेस नेता गोविंद सिंह कुंजवाल ने विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए साल 2016 में 153 नियुक्तियां करवाईं। मनमर्जी यहीं तक नहीं रुकी। खजान धामी की पत्नी लक्ष्मी को भी विधानसभा में नौकरी दे दी गई। कांग्रेस सरकार के नेताओं के रिश्तेदारों और करीबियों को ही विधानसभा में नौकरी नहीं मिली, बल्कि यहां मौजूद अधिकारियों ने भी बहती गंगा में हाथ धोए। जानकारी के अनुसार तत्कालीन विधानसभा सचिव ही नहीं संयुक्त सचिव विधानसभा के रिश्तेदारों को भी बिना परीक्षा के ही नियुक्ति दे दी गई।

यह हालात यह बताने के लिए काफी हैं कि किस तरह हरीश रावत सरकार में विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए गोविंद सिंह कुंजवाल ने न केवल अपने परिवार के लोगों को विधानसभा में भर दिया, बल्कि अधिकारियों और बाकी नेताओं के करीबियों को भी नौकरी का स्वाद चखाया। वहीं प्रेमचंद अग्रवाल छाती ठोक कर यह बात कहते हुए दिखाई दिए थे कि उन्होंने रिश्तेदारों को नौकरी दी है और यह नियमानुसार है। हालांकि अब भाजपा यह कह रही है कि सभी मामलों की जांच की जाएगी और इसी आधार पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट मामले पर पल्ला झाड़ते दिखाई दे रहे हैं।