आखिर कॉलेज में क्यों बना ‘भूत का मंदिर’? | Uttarakhand News

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उत्तराखंड के एक कॉलेज में अचानक बना ‘भूत का मंदिर’! मौजूदा वक्त में सुर्खियों में है और विवाद भी खूब हो रहा है, सवाल भी उठ रहे हैं तो दोस्तो क्या ये सच में किसी भूत या आत्मा से जुड़ा है, या फिर कुछ और है? क्यों छात्र और शिक्षक इस जगह को लेकर हैरान और परेशान हैं? बड़े विवाद के बाद विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। चलिए आपको बताता हूं रहस्यमयी मंदिर के पीछे की पूरी कहानी अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो तो हैरान और परेशान करने वाली खबर है ये जो मै आपको बताने के लिए आया हूं। वैसे तो दोस्तो अपनी उत्तराखंड की भूमि देवभूमि है यहां आपको हर कोने में छोटे बड़े मंदिर मिल जाएंगे। देखने के लिए मिल जाएंगे लेकिन एक कॉलेज में बना मंदिर विवादो में आ गया। चलिए कहानी से पर्दा उठाता हूं ये खबर क्या है। दोस्तो उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से सामने आया एक मामला ये सोचने पर मजबूर करता है कि अंधविश्वास के नाम पर लोगों से किस हद तक काम करवाए जा सकते हैं. यह मामला इसलिए और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि यह शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले एक सरकारी स्कूल से जुड़ा है।

आमतौर पर अंधविश्वास को दूर करने के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताया जाता है, लेकिन जब स्कूल परिसर में ही अंधविश्वास के नाम पर बच्चों से पैसे वसूले जाएं, तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक हो जाती है। दरअसल, दोस्तो उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के राजकीय इंटर कॉलेज, कौसानी में ‘भूत मंदिर’ बनाए जाने की जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि स्कूल परिसर में लगभग 25 हजार रुपये की लागत से इस कथित ‘भूत मंदिर’ का निर्माण कराया गया। जानकारी के अनुसार, जिस स्थान पर यह मंदिर बनाया गया, वहां पहले किसी व्यक्ति की असमय मृत्यु हुई थी। धीरे‑धीरे इस जगह को लेकर अंधविश्वास फैल गया कि यहां एक महिला की आत्मा भटकती है और लोगों को डराती है। दोस्तो बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में स्कूल की कई छात्राएं रहस्यमय ढंग से बेहोश भी हुई थीं। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छात्राओं की काउंसलिंग कराई थी, लेकिन आरोप है कि यह प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई. इसके बाद कथित तौर पर अंधविश्वास के चलते स्कूल परिसर में ‘भूत का मंदिर’ बनाने का फैसला किया गया और इसके लिए छात्र‑छात्राओं से ही पैसे वसूले गए। दोस्तो जब ये मामला सामने आया और तूल पकड़ने लगा, तो शिक्षा विभाग भी हरकत में आया और जांच के आदेश जारी कर दिए गए।

आरोप है कि मंदिर निर्माण के लिए प्रत्येक छात्र से 100 रुपये वसूले गए. कुल 218 छात्रों से लगभग 21,800 रुपये एकत्र किए गए, जबकि शिक्षकों के योगदान को मिलाकर कुल राशि करीब 25 हजार रुपये बताई जा रही है। इसके बावजूद आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य बहुत छोटा और नाममात्र का किया गया। इसके अलावा दोस्तो जो अलग-अलग पोर्टल और खबरों में देखने को मिल रहा है वो ये कि अभिभावकों ने ये भी आरोप लगाया है कि दिसंबर 2025 से छात्रों से प्रति माह 50 रुपये की दर से ‘सफाई शुल्क’ वसूला जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों से किसी भी प्रकार का शुल्क लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं दूसरी ओर संघ के अध्यक्ष कहते हैं कि तथ्यों को तोड़‑मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और सरकारी संस्थान को बदनाम किया जा रहा है।

संघ के अध्यक्ष के अनुसार करीब 30 साल पहले इस स्थान पर नेपाली मूल के एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी, लेकिन बाद में यह अफवाह फैलाई जाने लगी कि किसी महिला की फिसलकर मौत हुई थी और उसकी आत्मा यहां भटकती है। साथ एक चौकाने वाली बात ये भी सामने आई कि कुछ लोग इसी स्थान पर बलि प्रथा भी कर रहे थे। मुर्गियों की बलि चढ़ाई जाती थी, शराब पी जाती थी, जिससे गंदगी फैल रही थी। इन गतिविधियों को रोकने के लिए अभिभावक संघ की बैठक में यह फैसला लिया गया कि उस स्थान पर एक मंदिर बनाया जाए, ताकि बलि प्रथा बंद हो और लोगों के बीच यह संदेश जाए कि यहां अब इस तरह की गतिविधियां नहीं होंगी। दोस्तो, य् मामला सिर्फ ‘भूत का मंदिर’ भर नहीं है, बल्कि शिक्षा और अंधविश्वास के बीच की खाई को उजागर करता है। एक ओर स्कूल का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा देना है, वहीं दूसरी ओर यहां के अंधविश्वास ने छात्रों और अभिभावकों को परेशान किया। अब शिक्षा विभाग की जांच इस पूरी कहानी की गुत्थी सुलझाएगी और यह स्पष्ट करेगी कि क्या सच में अंधविश्वास के नाम पर बच्चों से पैसे वसूले गए, या फिर कुछ और था..देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसे विवादों को कैसे रोका जा सकता है।