उत्तराखंड में क्यों नाराज हो गई मां धारी देवी, चारधाम की सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बन गया भय का माहौल। दगड़ियों माँ धारी देवी का नाराज होना और उत्तराखंड में बढ़ती चिंता बताने के लिए आया हूं। Dhari Devi Temple Alaknanda क्या कारण है कि वो मां नाराज हो गई जो लाखों लाख लोगों का पालती है। उनकी सुरक्षा करती है जो मां दगड़ियों चारधामों की रक्षक है वो नाराज हो गई। क्यों किससे किसने मां धारी देवी को नाराज कर दिया। ये लोग क्यों कह रहे हैं की मां धारी धेवी नाराज है। दगड़ियों उत्तराखंड की धरती पर स्थित माँ धारी देवी का मंदिर विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। इसे उत्तराखंड के चारधाम की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है, और उनकी पूजा से इस क्षेत्र के लोग अपने जीवन को सुखमय और सुरक्षित मानते हैं लेकिन हाल ही में, उत्तराखंड में हो रही मूसलधार बारिश और अलकनंदा नदी के उफान के बीच इस सवाल ने जन्मा कि क्या माँ धारी देवी नाराज हो गई हैं? उसकी के बारे में बताने जा रहा हूं।
दगड़ियो अलकनंदा नदी की बाढ़ के कारण उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में भय का माहौल बना हुआ है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे नदी का जलस्तर और भी बढ़ सकता है। रुद्रप्रयाग और श्रीनगर के पास स्थित माँ धारी देवी का मंदिर नदी के किनारे स्थित है, और अब नदी के पानी का बढ़ता हुआ स्तर इस मंदिर के पास खड़ा संकट बन गया। लोग मानते हैं कि जब भी इस नदी में उफान आता है, तो धारी देवी की कृपा से ही पूरे क्षेत्र को बचाया जाता है। मगर इस बार, लगातार बढ़ते जलस्तर और मौसम की चेतावनी के बीच लोग डरे हुए हैं कि कहीं देवी माँ का क्रोध फिर से इस क्षेत्र को न झेलना पड़े। दगड़ियो उत्तराखंड की 2013 की बाढ़, जो एक विनाशकारी प्राकृतिक आपदा थी, इसने उत्तराखंड के लोगों को कभी न भूलने वाली त्रासदी दी थी और दगड़ियो ये माना जाता है कि देवी धारी की मूर्ति को उनके मूल स्थान से स्थानांतरित करने के बाद ही यह आपदा आई थी।
दरअसल दगड़ियो 2013 में जब अलकनंदा हाइड्रो पावर परियोजना के तहत माँ धारी देवी के मंदिर को उनके स्थान से हटाया गया और मूर्ति को नदी के ऊपर कंक्रीट के मंच पर स्थापित किया गया, उसके कुछ घंटों बाद ही भारी बारिश और बाढ़ ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया था। इस घटना को स्थानीय लोग देवी का क्रोध मानते हैं, क्योंकि मूर्ति का स्थानांतरण उन्हें असंतुष्ट कर दिया था। दगड़ियो धारी देवी के स्थानांतरण के बाद, 2013 में आई बाढ़ ने हजारों लोगों की जान ले ली और पूरे तीर्थ नगर को तबाह कर दिया। स्थानीय जनता का यह मानना है कि यदि माँ धारी देवी की पूजा सही तरीके से की जाती और उनका स्थान नहीं बदला जाता, तो इस कष्टदायक स्थिति से बचा जा सकता था। यही कारण है कि लोग अब भी देवी के नाराज होने की आशंका को लेकर चिंतित हैं। दोस्तो इतना भर नहीं है माँ धारी देवी के बारे में एक पौराणिक कथा भी प्रसिद्ध है, जो उनके कष्टों और संघर्षों को दर्शाती है। मान्यता है कि देवी का सिर अलकनंदा नदी में बहकर धारी गांव के पास एक चट्टान से टकराया था। उस समय एक आदमी ने देवी के सिर को पाया और उसे पवित्र स्थान पर स्थापित किया, जिसके बाद देवी ने उसे आशीर्वाद दिया और उसकी रक्षा की।
ये कथा दर्शाती है कि देवी माँ का स्थान और उनकी पूजा-अर्चना न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि प्राकृतिक असंतुलन के लिए भी आवश्यक है। दोस्तो इन हालात के बीच, प्रशासन ने इस स्थिति की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कदम उठाए। रुद्रप्रयाग जिले की डीएम, स्वाति एस भदौरिया ने अलकनंदा नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर चेतावनी जारी की जैसा की मैं आपको बात चुका हूं। उन्होंने कहा कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो धारी देवी मंदिर और आसपास के क्षेत्रों को खाली कर दिया जाएगा। उत्तराखंड के मंत्री धन सिंह रावत ने भी चेतावनी दी है कि अगर जलस्तर और बढ़ता है, तो निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है लेकिन दगड़ियो फिर भी लोग आस्था और विश्वास की दृष्टि से इसे एक चमत्कारी घटना मानते हैं।
पिछले कुछ सालों में जब भी अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ा, लोग ये मानते रहे हैं कि देवी माँ की कृपा से ही इस क्षेत्र को तबाही से बचाया गया लेकिन अब, जब मौसम विभाग की चेतावनी के साथ जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, तो एक डर और एक उम्मीद दोनों का मिश्रण देखने को मिल रहा है। ऐसे में इन हालात को लेकर तस्वीरों को देखर कई सवाल हो सकते हैं। सवाल उठा रहा है कि क्या माँ धारी देवी के स्थानांतरण के कारण उत्तराखंड को फिर से प्रकृति के क्रोध का सामना करना पड़ रहा है, या यह एक प्राकृतिक आपदा है जिसका हम सबको सामना करना होगा। चाहे जो भी हो, उत्तराखंड के लोग देवी माँ के आशीर्वाद की उम्मीद और उनके नाराज होने के डर के बीच अपनी सुरक्षा की प्रार्थना कर रहे हैं। दगड़ियो माँ धारी देवी की कृपा से ही इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा कायम रहती है, और यह विश्वास उनकी पूजा का मुख्य कारण है और आज भी मां धारी देवी से लोग ये ही प्रर्थना कर रहे हैं कि मां पहाड़ की रक्षा करो।