क्यों जनता के आक्रोष का शिकार हो रहे हैं BJP MLA?| Uttarakhand News | Viral Video | Rudraprayag News

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जी हां दोस्तो क्या उत्तराखंड में चुनावी बयार चल पड़ी है, क्या जनता अपने हक की बात को अब उग्र अंदाज में कहने को बाध्य हो चुकी है। जनता के प्रतिनिधि जनता के काम को लेकर गंभीर नहीं हैं। क्यों सत्ता सीन बीजेपी के विधायकों को जनता के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। Argument Between Mla And Women ये सवाल मै क्यों कर रहा वो बताने के लिए आया हूं, बीते दो दिन में दो तस्वीरें सामने आई जो इन सवालों को जन्म दे गई। दगड़ियो उत्तराखंड में चुनावी बयार अब सिर्फ नारों की नहीं, नाराज़गी की भी चल पड़ी है। जहां एक तरफ नेताजी सब जगह विकास की बातें कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर जनता सवाल पूछ रही है—तेज, तीखे और अब तो उग्र लहजे में। दोस्तो क्या ये वही उत्तराखंड है, जहां कभी शांत स्वर में बदलाव की उम्मीद की जाती थी? अब जनता खुद कह रही है—”अगर हमारे प्रतिनिधि काम नहीं करेंगे, तो हमें बोलना नहीं, गरजना पड़ेगा। वैसे दोस्तो बीजेपी के कई विधायक इन दिनों जनता के गुस्से का शिकार बन रहे है। कभी सड़क पर घेराव, कभी थाने में शिकायत, तो कभी सोशल मीडिया पर वायरल होते तीखे वीडियो। क्या ये सिर्फ चुनावी दबाव है या फिर जनता का सब्र अब सचमुच टूट चुका है? दोस्तो ये जो वीडियो सामने आया। सोसल मीडिया में देखा जा रहा है।।उसमें बीजेपी के विधायक को जनता ने घेरा है। ये वरिष्ठ विधायकों में आने वाले रुद्रप्रयाग के विधायक भरत चौधरी हैं। जी हां दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति में उठते सवाल। जनता का गुस्सा, नेताओं के बीच टकराव और वायरल होता विवाद क्या कहता है बल, यहां महिलाओं का गुस्सा विधायक के खिलाफ सातवें आसमान में दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड की सियासत इन दिनों किसी उबलते बर्तन से कम नहीं, जहां चुनावी बयार ने पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले रखा है, वहीं जनता के बीच बढ़ती नाराजगी और नेताओं के बीच खींचतान ने राजनीतिक माहौल को और भी गरम कर दिया है।

खासकर जब सोशल मीडिया पर एक के बाद एक वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें जनता और पार्टी के बीच की दूरी साफ नजर आ रही है। वैसे दोस्तो उत्तराखंड के कई हिस्सों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि जनता अब अपने प्रतिनिधियों से बेहद निराश है। तिलनी गांव का वो विवाद, जहां महिलाओं ने बीजेपी विधायक भरत चौधरी पर अपशब्द बोलने का आरोप लगाया और थाने में शिकायत दर्ज कराई, इसका ज्वलंत उदाहरण है। महिलाएं अपने गुस्से को लेकर इतनी आगबबूला हैं कि उन्होंने विधायक को घेर कर सख्त विरोध जताया। विधायक ने कहा, “पैसे खाए मैंने, मैं बिक गया। अगर मैं बिगड़ गया तो मेरी ओलाद नष्ट होगी।” यह बयान न केवल विवादों को हवा देता है, बल्कि राजनीति में जनता और नेताओं के बीच बनती खाई को भी उजागर करता है। यहां ये समझना जरूरी है कि जब जनता अपने हक की बात को खुलकर और उग्र अंदाज में कहने लगती है, तो यह केवल एक स्थानीय घटना नहीं बल्कि व्यापक असंतोष की आवाज होती है। उत्तराखंड में ऐसा क्यों हो रहा है? क्या जनता के प्रतिनिधि अपने कर्तव्यों को गंभीरता से नहीं निभा रहे? सवाल कहीं यहीं खड़ा होता है। इससे पहले दोस्तो उत्तराखंड के डीडीहाट क्षेत्र से एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें भाजपा कार्यकर्ता योगी कन्याल और विधायक बिशन सिंह चुफाल के बीच विकास कार्यों को लेकर तीखी बहस हो रही है। ये बहस केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा की मौजूदगी में हुई। वीडियो में कार्यकर्ता विधायक से पिछले 30 साल की उपलब्धियों पर सवाल कर रहे हैं, जो प्रदेश के अंदर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। दोस्तो क्योंकि ये न केवल एक पार्टी के अंदरूनी विवाद को उजागर करता है, बल्कि ये भी दर्शाता है कि पार्टी के कार्यकर्ता और नेता विकास को लेकर कितने सचेत और बेचैन हैं, साथ ही ये वीडियो पार्टी नेतृत्व के सामने भी चुनौती है कि वह जनता की अपेक्षाओं को कैसे पूरा करता है।

दोस्तो उत्तराखंड की जनता आज विकास की उम्मीद लेकर चुनावी मैदान में खड़ी है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश ने कई चुनौतियों का सामना किया है—आपदाओं से लेकर स्वास्थ्य सेवा और रोजगार तक, लेकिन जनता का मानना है कि उनकी बातों को नेता गंभीरता से नहीं लेते। इसी वजह से कई जगह जनता सड़कों पर उतर रही है, आंदोलन कर रही है और अपने प्रतिनिधियों को जवाबदेह बना रही है। ऐसा ही कुछ देखने को तब मिला था जब कुमाउं के अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया में अपरेशन स्वास्थ्य को लेकर जनता ने हुकार भरी तो नेता और जनप्रतिनिधियों का पहुंचा भी शुरू हुआ। यहां से कांग्रेस के विधायक हैं द्वाराहाट विधानसभा मदन सिंह बिष्ट को लोगों ने घेरा खूब खरीखोटी सुनाई। यहां तक बीजेपी के पूर्व विधायक महेश नेगी पहुंचे तो उनका विरोध हुआ। मदन सिंह बिष्ट से करीब हार का सामना करने वाले इसी सीट से बीजेपी के उम्मीदवार रहे अनिल शाही को भी खूब सुनना पड़ा और अब नया वीडियो आप जरा दोनों वीडियो को सिलसिलेवार तरीके से देखिए। दोस्तो पूरे प्रदेश में ऐसा माहौल बन रहा है कि जनता और नेता आमने-सामने आ गए हैं। विधायक और मंत्री जहां अपनी उपलब्धियों की बात करते हैं, वहीं जनता उनसे अपनी समस्याओं के समाधान की मांग करती है। जब ये दूरी बढ़ती है, तो राजनीति में टकराव स्वाभाविक है। दोस्तो बीजेपी जैसी सत्तारूढ़ पार्टी के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। पार्टी के भीतर नेता और कार्यकर्ता अपने मुद्दे उठा रहे हैं, वहीं जनता भी अपनी नाराजगी व्यक्त कर रही है। पार्टी हाईकमान के लिए यह बड़ा सवाल है कि वह कैसे अपने विधायकों और कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य बैठाए, और साथ ही जनता की उम्मीदों को पूरा कर सके। वहीं कांग्रेस जैसे विपक्षी दल इस स्थिति का फायदा उठाने में लगे हुए हैं। वे जनता की आवाज़ को आगे बढ़ा रहे हैं और सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं, तो दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां जनता के प्रतिनिधि और जनता के बीच विश्वास की कमी बढ़ रही है। वायरल हो रहे वीडियो और सड़कों पर उठ रहे आंदोलन यह संकेत हैं कि अगर वक्त रहते इन बातों को नहीं सुधारा गया तो आने वाले चुनावों में इसका बड़ा असर पड़ेगा। जनता अब सिर्फ बातें सुनने को तैयार नहीं, वह अपने हक के लिए आवाज़ बुलंद कर रही है। राजनीति के इस उबलते माहौल में एक बात स्पष्ट है—उत्तराखंड के नेताओं को अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा, जनता के सवालों का जवाब देना होगा और विकास की रफ्तार को तेज करना होगा। तभी वह जनता का विश्वास जीत पाएंगे और प्रदेश में स्थिरता बनाए रख पाएंगे।