जी हां दोस्तो बनभूलपुरा में आवास योजना को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है जहां हजारों लोगों ने इस योजना पर दावा ठोक दिया है। चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी बताई जा रही है, जो कथित तौर पर अतिक्रमण की ज़मीन पर रह रहे हैं। Banbhulpura Rehabilitation Nainital अब सवाल उठ रहा है—क्या इन लोगों को आवास योजना का लाभ मिलना चाहिए? और अगर हां, तो आखिर क्यों ज़रूरी है कि अतिक्रमणकारियों को भी घर दिया जाए? इसी मुद्दे पर आज की ये खास रिपोर्ट। दोस्तो हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे अतिक्रमण मामले को लेकर लगे विशेष कैंप अब खत्म हो चुका हैं, लेकिन हजारों परिवारों के लिए राहत और उम्मीद की राह अभी जारी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुए इस अभियान ने प्रभावित लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़ने का काम किया, जिससे बेघर होने की आशंका के बीच उन्हें सहारा मिल सके। जो लोग किसी कारणवश अपने फॉर्म जमा नहीं कर पाए हैं, उनके लिए 2 और 4 अप्रैल को नगर निगम कार्यालय में विशेष व्यवस्था की गई है।
दोस्तो बनभूलपुरा का ये कैंप सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं था, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया, जो लंबे समय से अनिश्चितता और डर के माहौल में जी रहे थे। रेलवे अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की निगरानी में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुरक्षित आवास का विकल्प देना। 20 मार्च से शुरू होकर 1 अप्रैल तक चले इस अभियान में प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी। दोस्तो बनभूलपुरा के 6 अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगाए गए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई जा सके। इन कैंपों में नगर निगम, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित विभागों की टीमें लगातार मौजूद रही, जो लोगों को न सिर्फ आवेदन प्रक्रिया समझा रही थी, बल्कि फॉर्म भरने में भी मदद कर रही थी। इस दौरान करीब 8000 लोगों को आवेदन फॉर्म वितरित किए गए, जिनमें से लगभग 6900 लोगों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन भी किया जा चुका है। यह आंकड़ा बताता है कि लोगों ने इस पहल पर भरोसा जताया और अपने भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ाया। हालांकि दोस्तो कैंप अब समाप्त हो चुका हैं, लेकिन प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जो लोग किसी कारणवश अपने फॉर्म जमा नहीं कर पाए हैं, उनके लिए 2 और 4 अप्रैल को नगर निगम कार्यालय में विशेष व्यवस्था की गई है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि इन आवेदनों पर कितनी जल्दी कार्रवाई होती है और प्रभावित परिवारों को कब तक उनका आशियाना मिल पाता है। नैनीताल जिले के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाया जाए। कोर्ट के इस फैसले से हजारों परिवार को अब अपना घर खाली करना होगा। सीजेआई के बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि यह रेलवे की जमीन है, इसे रेलवे अपने हिसाब से इस्तेमाल करेगा। यही नहीं जिन लोगों के घर तोड़े जाएंगे, उनको राज्य सरकार योजनाओं के तहत भी आवास दे सकती है, इसके लिए 19 मार्च से कैंप लगाए जाएंगे। बता दें कि रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर भूमि पर वर्षों से अतिक्रमण था. इस भूमि पर करीब 4500 मकान बने हैं, जिनमें 5236 परिवार रहते हैं, यानी कि कुल मिलाकर हजारों की संख्या में आबादी इस इलाके में रहती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बहुत ही महत्वपूर्ण है।
बता दें कि साल 2022 में नैनीताल हाईकोर्ट ने बनभूलपुरा क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रभावित पक्षों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायक की गई थी। आठ फरवरी 2024 को बनभूलपुरा में हुआ बवाल हल्द्वानी ही नहीं देश भर के लोगों के जेहन में है। अतिक्रमण हटाने गए पुलिस-प्रशासन पर हजारों की भीड़ ने पत्थरों से हमला कर दिया था..इसके बाद पेट्रोल बम के धमाके भी गूंजने लगे। उपद्रवियों ने बनभूलपुरा थाने तक को फूंक दिया था। दंगे में छह लोगों की जान गई तो पुलिस, निगम कर्मचारी, पत्रकारों समेत 250 लोग घायल हुए थे।बनभूलपुरा स्थित मलिक के बगीचे में सरकारी भूमि पर मदरसे और नमाज स्थल का निर्माण किया गया था। 2024 में नगर निगम प्रशासन ने अतिक्रमण चिह्नित कर जमीन खाली करने के निर्देश दिए थे। लेकिन कब्जा नहीं छूटा, जिसके बाद आठ फरवरी 2024 को पुलिस, प्रशासन और निगम की टीम संयुक्त तौर पर यहां कार्रवाई को पहुंची थी।पहले से तैयार उपद्रवियों ने सभी को घेर चारों तरफ से पत्थर बरसाना शुरू कर दिया। इसके बाद पेट्रोल बम से हमले करने के साथ ही जगह-जगह आगजनी भी शुरू कर दी लेकिन आज उन्हीं को सुप्रीम कोर्ट के कहने पर प्रधानमंत्री योजना का लाभ दिया जा रहा है।