जी हां दोस्तो उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव का बिगुल सियासी दलों ने फूंक दिया है, लेकिन उत्तराखंड में चुनावी रण में बड़ी उथल-पुथल शुरू हो गई है। गर्मी अभी आई नहीं कि बीजेपी के पसीने छूट रहे हैं, और वजह है – 19 सीटों पर पार्टी के बूथ लेवल एजेंट यानी BLA का न होना। वहीं, कांग्रेस ने इस मौके का फायदा उठाते हुए बीजेपी से आगे निकलने में कामयाबी पा ली है। चुनाव से पहले ये बढ़त क्या संकेत देती है? क्या बीजेपी पीछे रह जाएगी या फिर पीछे हटकर अपने पत्ते पलटेगी? इस सस्पेंस के बीच राजनीतिक रणनीति की जंग अब और भी तेज होती दिख रही है। दोस्तो उत्तराखंड में प्री एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दलों के BLA (बूथ लेवल एजेंट) से जुड़े आंकड़े काफी रोचक नजर आ रहे हैं। मौजूदा स्थिति को देखें तो बीएलए बनाने में कांग्रेस पार्टी ने भाजपा को पछाड़ दिया है। ऐसी तमाम सीटें हैं जहां भारतीय जनता पार्टी बीएलए को लेकर खाता तक नहीं खोल पाई है। हालांकि, कुछ सीटों पर कांग्रेस के भी यही हाल हैं, लेकिन इस मामले में भाजपा के ज्यादा बुरे हालात नजर आ रहे हैं। दोस्तो SIR के लिए निर्वाचन आयोग की तैयारी के बीच राजनीतिक दल भी बूथ स्तर पर अपने एजेंट नामित करने में जुटे हैं। इसके लिए एक तय प्रक्रिया के रूप में राजनीतिक दलों द्वारा निर्वाचन आयोग को बीएलए की सूची दी जा रही है। वैसे तो पूरे प्रदेश में 70 सीटों के लिए कुल 11 हजार 733 एजेंट बनाए जाने हैं लेकिन कोई भी राजनीतिक दल अब तक इस संख्या के आस पास तक पहुंचता नहीं दिखाई दिया है।
दोस्तो यहां खास बात ये है कि इस मामले में बीजेपी और कांग्रेस मुख्य दलों के रूप में सबसे ज्यादा एजेंट नामित कर पाई हैं लेकिन बीएलए की कुल संख्या का आकलन करें तो कांग्रेस का प्रदर्शन इस मामले में सबसे बेहतर नजर आ रहा है। दोस्तो बीजेपी का सभी विधानसभा सीटों पर बीएलए बनाने में पसीना छूट रहा है। ऐसी तमाम विधानसभा सीटें हैं, जहां पार्टी अपना एक भी एजेंट नामित नहीं करवा पाई है. हालांकि कई विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की भी यही स्थिति है, लेकिन भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की गिनती ज्यादा बेहतर है। जरा जिले वार आकड़ों पर गौर कीजिए। उत्तराखंड निर्वाचन आयोग के मुताबिक, जिलेवार आंकड़ों को देखें तो उत्तरकाशी जिले में 544 बूथ में से BJP 422 तो कांग्रेस 300 BLA तय करवा पाई है। इसी तरह चमोली जिले में 592 बूथ में से BJP 552 और कांग्रेस 575 बीएलए बना चुकी है। रुद्रप्रयाग जिले में 362 में से BJP 359 तो कांग्रेस 362 यानी 100 फीसदी बीएलए बना चुकी है। टिहरी गढ़वाल जिले में 963 में से BJP 619 तो कांग्रेस ने 670 BJP बनाए हैं। देहरादून जिले में 1882 में से BJP 912 तो कांग्रेस 1047 बीएलए नियुक्त कर चुकी है। इतना ही नहीं दोस्तो हरिद्वार पौड़ी पिथौरागढ़ बाग्रेश्वर अल्मोड़ा का सूरते हाल भी दिखाता हूं गौर कीजिगा दोस्तो,
हरिद्वार जिले में 1715 में से BJP 946 तो कांग्रेस 1523 बीएलए बना चुकी है। पौड़ी जिले में भी 945 में से BJP महज 486 तो कांग्रेस 778 बीएलए बनाने में कामयाब रही है। इसी तरह पिथौरागढ़ में 611 बूथ में BJP 611 यानी 100 फीसदी बीएलए बना चुकी है जबकि कांग्रेस यहां पर महज 211 बीएलए ही बना पाई है। बागेश्वर जिले में 381 बूथ में BJP ने 215 और कांग्रेस ने 330 बीएलए बनाए हैं। अल्मोड़ा जिले में 920 बूथ में BJP ने 494 तो कांग्रेस ने 613 बीएलए बनाए हैं। दोस्तो इसी सिसलिले को आगे बढ़ाते हैं तो आंकड़े ये बताने के लिए काफी हैं कि कौन से जिले में बीजेपी कांग्रेस में कितनी बड़ी फाइट हो रही है क्योंकि चंपावत नैनीताल उधम सिंह नगर का हाल भी बेहाल है। इसी तरह चंपावत जिले में 344 बूथ में BJP ने सभी 344 एजेंट नामित किए तो कांग्रेस 307 एजेंट बना पाई। नैनीताल जिले में 1010 बूथ में BJP ने 920 और कांग्रेस ने 643 बीएलए बनाए। इसी तरह उधम सिंह नगर जिले में 1464 बूथ में BJP महज 285 बीएलए बना पाई तो कांग्रेस ने 609 एजेंट बनाए हैं। दोस्तो इस तरह कुल संख्या देखें तो प्रदेश भर में 11,733 बूथ में BJP 7165 बीएलए बना पाई तो कांग्रेस ने 7968 बीएलए बनाए हैं। जिससे साफ है कि कांग्रेस BJP के मुकाबले 803 बीएलए ज्यादा बनाने में कामयाब रही है।
इस मामले पर कांग्रेस का कहना है कि BJPजो खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहती है, वह प्री एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान बूथ एजेंट तक तय नहीं कर पा रही है। जबकि इस मामले में कांग्रेस भाजपा से कई आगे निकल चुकी है और अधिकतर सीटों के लिए एजेंट के नाम दिए जा चुके हैं। अब आपको बताता हूं जिन सीटों पर BJP नहीं कर पाई बीएलए नियुक्त गौर करिए। दोस्तो राज्य में ऐसी 19 विधानसभा सीटें हैं, जहां पर BJP एक भी बीएलए का नाम नहीं दे पाई है। विधानसभा सीटों की बात करें तो इसमें चकराता, विकासनगर, धर्मपुर, राजपुर रोड, देहरादून कैंट, ज्वालापुर, रुड़की, मंगलौर, हरिद्वार ग्रामीण, यमकेश्वर, लैंसडाउन, द्वाराहाट, सल्ट, रानीखेत, बाजपुर, गदरपुर, रुद्रपुर, सितारगंज और नानकमत्ता में कोई बीएलए नामित नहीं हो पाया है। दोस्तो खास बात है कि इन 19 सीटों में से विकासनगर, धर्मपुर, राजपुर रोड, देहरादून कैंट, रुड़की, यमकेश्वर, लैंसडाउन, सल्ट, रानीखेत, गदरपुर, रुद्रपुर, सितारगंज और नानकमत्ता यानी 13 विधानसभा सीटों पर भाजपा के ही विधायक हैं लेकिन फिर भी भाजपा इन सीटों पर पीछे नजर आ रही है। इसी क्रम में कांग्रेस की बीएलए नियुक्ति न करवा पाने वाली विधानसभा सीटें देखें तो इसमें चकराता, विकास नगर, राजपुर रोड, झबरेड़ा, डीडीहाट, पिथौरागढ़, खटीमा, नानकमत्ता, सितारगंज और किच्छा कुल 10 विधानसभाओं में पार्टी एक भी बीएलए तय नहीं कर पाई है।
वहीं इन 10 सीटों में से चकराता, झबरेड़ा, पिथौरागढ़, खटीमा और किच्छा यानी कुल 5 सीटों पर कांग्रेस दल के ही विधायक हैं लेकिन फिर भी बीएलए नियुक्त कर पाने में पीछे हैं। दोस्तो इस मामले पर BJP का अपना अलग रुख है पार्टी की मानें तो, अभी BJP की तरफ से विभिन्न सीटों पर बीएलए के नाम दिए जा रहे हैं। कांग्रेस को इस मामले पर अपनी तैयारी देखनी चाहिए. BJP अपने स्तर से बीएलए को लेकर काम कर रही है। दोस्तो, प्री-एसआईआर की इस प्रक्रिया ने उत्तराखंड में राजनीतिक रण को पूरी तरह उजागर कर दिया है। आंकड़े साफ दिखा रहे हैं कि कांग्रेस इस बार बूथ स्तर पर बीजेपी से आगे निकल गई है, लेकिन बीजेपी भी कम नहीं है – कई सीटों पर एजेंट नामित करने का काम अभी जारी है। असल जंग अब केवल बीएलए बनाने की नहीं, बल्कि मैदान में पकड़ बनाने की है। 19 सीटों पर बीजेपी अभी भी खाली है, और कांग्रेस ने जहां पकड़ बनाई, वहीं कुछ सीटों पर खुद पीछे रही। दोस्तो, चुनाव से पहले यह लड़ाई और भी रोचक होने वाली है, क्योंकि हर बूथ, हर एजेंट और हर संख्या का असर सीधे वोटिंग मशीन तक जाएगा। इसलिए आने वाले समय में इन आंकड़ों और रणनीतियों पर नजर रखना बेहद जरूरी है – क्योंकि यही बताएंगे कि किसकी चाल चलेगी और किसकी मजबूत पकड़ बनेगी।