जी हां दोस्तो हल्दवानी का बनभूलपुरा सच में यह खाली हो जाएगा? हो जाएगा तो फिर वो 5 हजार से ज्यादा लोग कहां जाएंगे। इस बात को लेकर दोस्तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अतिक्रणकारियों में मचा हड़ंकप, और अब उनकी दलील है – ‘हमें हटाने से पहले कहीं रहने के लिए घर दें! एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बढ़ा दी बेचैनी, तो दूसरी तरफ खड़ा हो गय़ा बपड़ा सवाल – कैसे खाली होगी होगी 30 हेक्टेयर भूमि। दोस्तो कई बार सुप्रीम कोर्ट में बनभूलपुरा की जमीन का विवाद पर सुनवाई टलती रही और अब फैसला आया है तो इस फैसले ने अतिक्रमणकारियों की बैचैनी को तो बढ़ाया ही है साथ ही सरकार और सिस्टम को भी ये सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्यो इतने लोगों का रहने का इंतजाम कहां और कैसे होगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट बनभूलपुरा की जमीन को ना सिर्फ सरकारी भूमि या कहूं रेलवे की भूमि माना है। इसके अलावा ये भी टास्क उत्तराखंड सरकार के साथ ही केन्द्र सरकार को दे दिया है कि आप लोगों की रहने की व्यवस्था करेंगे, ये सब कैसे होगा बल। दोस्तो हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण मामले को लेकर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि आने वाली सुनवाई में बड़ा फैसला ये कि जमीन रेलवे की है ना कि अतिक्रमण कारियों की वो जैसे चाहे उसका इस्तेमाल करेगा, लेकिन दोस्तो बनभूलपुरा में रेलवे स्टेशन से सटी हुई तकरीबन 30 हेक्टेयर जमीन पर बसे हुए लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मंगलवार को टकटकी लगाए बैठे थे। दोस्तो बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख काफी हद तक साफ था।
दोस्तो जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने यहां रह रहे लोगों के प्रधानमंत्री आवास योजना में सामाजिक और आर्थिक सर्वे का आदेश दिया, लोग मायूस हो गए। लोगों को लग रहा है कि अब वह ज्यादा दिन तक इस जमीन में नहीं रह पाएंगे। ऐसे में इन लोगों की अपील है कि उन्हें यहां से हटाने से पहले कहीं घर दे दिया जाए। दोस्तो यहां मै आपको बता दूं कि आप कई चैनेल में ये देख रहे होंगे कि बनभूल पुरा को खाली कराया जाएगा अतिक्रमण हटेगा हालांकि ये बात सच है लेकिन कोर्ट ने नर्मी से इस बात को कहा है कि आप सर्वे कराएंगे रहने की व्यवस्था होगी। उसके बाद कहीं जा कर बनभूलपुरा को खाली कराया जाएगा, लेकिन आज नहीं तो कल खाली तो होना ही है। ये बात का आभास तो बनभूलपुरा में अतिक्रमण कर सालों से बैठे लोगों को भी था। अब कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद अतिक्रमणकारियों में बेचैनी बढ़ना लाजमी है। दोस्तो रेलवे की जमीन पर कल 3614 पक्के स्ट्रक्चर बने हुए हैं, जिनमें घरों से लेकर मस्जिद और मंदिर तक शामिल हैं। साथ ही कई झुग्गी-झोपड़ियां भी हैं। इन 3614 स्ट्रक्चर में कुल मिलाकर 5365 परिवार रहते हैं। दोस्तो ऐसे में अगर इनके विस्थापन या हटाने का आदेश आने वाले दिनों में होता है, तो तकरीबन 30 से 35 हजार लोगों का प्रभावित होना तय है। इधर दोस्तो प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश का इंतजार है। वहीं दोस्तो सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च से अतिक्रमण वाले इलाके में रह रहे 5365 परिवारों के सामाजिक और आर्थिक सर्वे का निर्देश दिया है। इसी के आधार पर तय होगा कि यह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने के लिए योग्य हैं या नहीं। लेकिन दोस्तो इस सबके बीच बनभूलपुरा इलाके में प्रशासन ने सुरक्षा को और चाक-चौबंद किया है। प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट के लिखित फैसले का इंतजार है।
दोस्तो सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि झुग्गियों में रहने वालों के प्रति पूरी हमदर्दी है, लेकिन बेहतर और सुरक्षित जगह पर रहने का अधिकार सबका है। दोस्तो यहां सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि अवैध कब्जा हटाना जरूरी है और यह उत्तराखंड के अन्य अतिक्रमण मामलों पर लागू नहीं होगा। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में होगी, तब तक रेलवे जमीन से अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई नहीं होगी। दोस्तों, बनभूलपुरा का मामला सिर्फ एक जमीन का विवाद नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की जिंदगी और उनके भविष्य का सवाल है।सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है – अवैध कब्जा हटाना जरूरी है, लेकिन उसके साथ-साथ लोगों की सुरक्षित रहने की व्यवस्था भी होगी।यानी, फैसला सख्त है, लेकिन इंसानियत को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अब सवाल सिर्फ यह है – प्रशासन और सरकार इन 5,365 परिवारों के लिए कहां और कैसे सुरक्षित विकल्प सुनिश्चित करेंगेअगली सुनवाई अप्रैल 2026 में है, और तब तक बनभूलपुरा में किसी तरह की कार्रवाई नहीं होगी। इस मामले पर नज़र बनाए रखें, क्योंकि बनभूलपुरा की जमीन की लड़ाई केवल न्याय की नहीं, बल्कि इंसानियत की भी है।