जी हां दोस्तो बनभूलपुरा का क्या होगा, क्या बनभूलपुरा से हेटेगा अतिक्रमण या फिर सुप्रीम फैसले से मिलेगी राहत। ये अब बस जल्द सुप्रीम कोर्ट साफ कर देगा लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले पुलिसिया तैयारी क्या कहती है। आखिर क्यों कोर्ट के फैसले से पहले ही शुरू हो गई किलेबंदी, कैसे पुलिस ने पूरे इलाके को घेरा और निकाला फ्लैग मार्च। Banbhulpura encroachment दोस्तो बेहद संवेदनसील मामले पर बात एक बार फिर शुरू होने वाली है, अगर सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया। जमीन रेलवे की है खाली करिए, तब क्या होगा। दोस्तो हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे अतिक्रमण को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा अलर्ट जारी कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अहम फैसला आने वाला है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए मैदान में हैं। ये बन बनभुलपुरा का वो इलाका है, जो सालों पहले सरकारी जमीन पर कब्जा करके बसाया गया। यहां पक्के-कच्चे मकान सब हैं। यहां दुकान बाजार भी है, यहां पानी, बिजली भी हैं। यहां सकड़ को आप देखेगे तो ये भी कच्ची नहीं पक्की सड़क दिखाई देती है, लेकिन ये ही वो इलाका है, जो विवादों में है। ये ही बनभूलपुरा है, जहां रेलवे पुलिस की टीम की गस्त बीते दिन से बढ़ गई है और इसी पर सुप्रीम फैसले का इतजार है।
बनभूलपुरा अतिक्रमण मामले में 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट अपना संभावित फैसला सुना सकता है। शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने कमर कस ली है। बनभूलपुरा को जीरो जोन बनाया गया है। इसके अलावा भारी पुलिस फॉर्स की तैनाती के साथ साथ रूट डायवर्ट किया गया है। दोस्तो पुलिस प्रशासन अलर्ट पर है। ssp द्वारा जनपद के पुलिस अधिकारियों संग बैठक कर आवश्यक निर्देश जारी किए है। जरा इस पर भी गौर कीजिए संपूर्ण प्रभावित क्षेत्र की बैरिकेडिंग, बनभूलपुरा की लोकल आईडी न होने पर कोर क्षेत्र में प्रवेश वर्जित रहेगाबनभूलपुरा और हल्द्वानी क्षेत्र में BDS द्वारा चेकिंग, संभावित उपद्रवियों के विरुद्ध मुचलका पाबंद की कार्रवाई, पुलिस द्वारा सघन चेकिंग अभियान, संदिग्धों पर कड़ी कार्रवाई दोस्तो पुलिस प्रशान का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा। नैनीताल पुलिस हर मोर्चे पर तैयार है, फील्ड के साथ साथ सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर बनाए हुए है। किसी भी प्रकार से भ्रामक सूचना फैलाने, भड़काऊ संदेश प्रचारित करने तथा कानून व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दोस्तो हल्द्वानी के बनभूलपुरा में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन के साथ रेलवे पुलिस बल द्वारा फ्लैग मार्च निकाला गया, जिसमें एडीएम विवेक राय, सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल चौहान, एसपी सिटी मनोज कत्याल के नेतृत्व में फ्लैग मार्च निकाला गया।
इस दौरान प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों का कहना है सुप्रीम कोर्ट में पूरे मामले को लेकर फैसला आना है ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है सोशल मीडिया पर भी पुलिस नजर बनाए हुए हैं लोगों से अपील की जा रही है सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करें किसी भी तरह से कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ होने नहीं दिया जाएगा अराजक तत्वों के साथ कड़ाई से निपटने के लिए पुलिस पूरी तरह से तैयार है। जी हां दोस्तो इंताजाम कड़े दिखाई दे रहे है, 29 एकड़ जमीन, 500 परिवार हल्द्वानी में जहां बवाल हुआ, क्या वहां से हटेगा अतिक्रमण? ये वो सवाल जिसका जवाब जल्द मिल जाएगा। उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की 29 एकड़ जमीन पर 500 से अधिक परिवार अपना आशियाना बनाकर यहां रह रहे हैं। वहीं, कोर्ट की सुनवाई से पहले हल्द्वानी पुलिस अलर्ट मोड में आ गई है। बनभूलपुरा में 400 से ज्यादा पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। इलाके में ड्रोन से निगरानी की जा रही है। बाहरी लोगों और वाहनों की स्क्रीनिंग के लिए जगह-जगह चेकिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। दोस्तो इस पूरे मामले को थोड़ा ऐसे भी समझ लीजिए। बनभूलपुरा और गफूर बस्ती में रेलवे भूमि अतिक्रमण को लेकर विवाद की शुरुआत 2007 में हुई थी, जब हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। प्रशासन ने शुरुआती तौर पर केवल 0.59 एकड़ भूमि ही मुक्त कराई. इसके बाद 2013 में गौला नदी से अवैध खनन से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका के दौरान रेलवे भूमि का मुद्दा फिर उभर आया दोस्तो मामला यही शांत नहीं हुआ।
इसके बाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में रेलवे को दस हफ्तों में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए, लेकिन अतिक्रमणकारियों और प्रदेश सरकार ने भूमि को नजूल भूमि बताकर कार्रवाई रोकने की कोशिश की. जनवरी 2017 में हाईकोर्ट ने यह दावा खारिज कर दिया। दोस्तो अतिक्रमणकारियों और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में सभी पक्षों को हाईकोर्ट में अपने दावे पेश करने के निर्देश दिए, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही। मार्च 2022 में एक और जनहित याचिका दाखिल की गई, जिसमें रेलवे पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया। हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। दोस्तो तक तो बवाल की चिंगारी नहीं सुलगी थी, लेकिन जब मामला फरवरी 2024 तक पहुंचा तो नगर निगम द्वारा इलाके में एक अवैध मदरसा और नमाज स्थल ढहाने के बाद हिंसा भड़क उठी। पथराव, आगजनी और हमले में 6 लोगों की मौत और 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासन को कर्फ्यू और गोली मारने के आदेश तक लागू करने पड़े। वहीं अब दोस्तो बीते कड़वे अनुभव को लिए पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर इस बार सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही आ चुका है। ये सवाल सिर्फ एक है क्या बनभूलपुरा में लगेगा बुलडोजर या बचेगा आशियाना, सुप्रीम कोर्ट तय करेगा, थोड़ा इंतजार कीजिए।