उत्तराखंड का बहीखाता देख कर चौंक जाएंगे | Gairsain | Budget2026 | CM Dhami | Uttarakhand News

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उत्तराखंडवासियों के लिए तैयार हो रहा है 1 लाख करोड़ का बजट, जिसमें छुपी हैं आपके हर सवाल की झलक। क्या है उत्तराखंड का बहीखाता है पूरी खबर आकड़ों के जरिए बताउंगा आपको अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों के लिए करीब 1 लाख करोड़ के बजट का खाका इसके लिए विभिन्न विभागों से मशविरा करने के साथ आम लोगों की भी राय ली जाती हैं। केंद्रीय बजट के बाद उत्तराखंड का ये बजट राज्य के लिए बेहद अहम होने जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये धामी सरकार का चुनावी साल के चलते आखिरी बजट सत्र होगा. लिहाजा करीब 1 लाख करोड़ के इस बजट को समझने के लिए राज्य की आमदनी और खर्चे को जानना भी जरूरी होगा। दोस्तो उत्तराखंड को केंद्रीय बजट से यूं तो अलग-अलग सेक्टर में काफी कुछ मिला, लेकिन धामी सरकार के प्रस्ताव की कई अहम बातें छूट भी गई. लिहाजा प्रदेश में साल 2027 के दौरान होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार के पास राज्यवासियों के लिए बजट में कुछ खास करने का मौका होगा। इसी बात को समझते हुए धामी सरकार उत्तराखंड के आगामी राज्य बजट को लेकर कुछ खास बातों पर फोकस करने जा रही है। राज्य सरकार बजट को कितना लोक लुभावना बना पाएगी? यह बजट कितना बेहतर हो सकेगा? यह प्रदेश के खर्च और कमाई पर भी निर्भर करता है।

प्रदेश के बजट को लेकर फिलहाल स्थिति क्या है। राज्य के आय -व्यय से जुड़े आंकड़े सरकार को बेहतर बजट बनाने के लिए कितनी मदद कर रहे हैं। इससे पहले प्रदेश वासियों का यह जानना जरूरी है कि राज्य की आमदनी और खर्चे किन किन रूपों में होते हैं जो बजट का आधार बनते हैं। दरअसल, आमदनी को देखा जाए तो उत्तराखंड को मिलने वाला पैसा टैक्स और नॉन टैक्स के रूप में आता है। उधर राज्य का खर्चा योजनागत और अयोजनागत मद के रूप में होता है। दोस्त सबसे पहले उत्तराखंड की कहां से कितनी कमाई होती है। टैक्स के रूप में उत्तराखंड जीएसटी, वैट, स्टांप शुल्क ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी और ट्रांसपोर्ट टैक्स से पैसा कमाता है या कहें कि इन टैक्स से राज्य को रेवेन्यू मिलता है। इसमें GST से करीब 10 हजार करोड़ की प्राप्ति होती है. VAT से 2600 करोड़ रुपए मिलते हैं। स्टांप ड्यूटी से राज्य को इतने ही यानी करीब 2600 से 3000 करोड़ रुपए मिलते हैं। एक्साइज ड्यूटी से राज्य को 5000 करोड़ रुपए प्राप्त होते हैं। ट्रांसपोर्ट टैक्स के जरिए उत्तराखंड 1500 से 2000 करोड़ रुपए कमाता है। वहीं दोस्तो नॉन टैक्स रिवेन्यू को देखें तो उत्तराखंड को खनन से 1000 करोड़ रुपए का रेवेन्यू प्राप्त होता है. इसी तरह फॉरेस्ट से 600 करोड़ रुपए मिलते हैं। पावर सेक्टर से 1000 करोड़ रूपया राज्य को मिलता है।

इसके अलावा स्कूल फीस, हॉस्पिटल और दूसरी सरकारी सेवाओं की फीस के रूप में राज्य करीब 600 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जेनरेट करता है। इसके अलावा विभिन्न विभागों को दिए जाने वाले करोड़ों रुपए के बजट को एफडी के रूप में रखने के चलते सरकार को करीब 100 करोड़ का ब्याज मिलता है। यही नहीं राज्य सरकार बिजली और पानी के टैक्स के रूप में 250 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त करती है। इतना ही नहीं दोस्तो उत्तराखंड को करीब 15 से 17000 करोड़ रुपए केंद्रीय टैक्स से प्राप्त होता है। दरअसल, दोस्तो केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों से मिलने वाले टैक्स का एक हिस्सा राज्यों में बांट देती है। इसमें केंद्र सरकार कुल प्राप्त टैक्स का 58 फ़ीसदी हिस्सा अपने पास रखती है। 42 फ़ीसदी हिस्सा राज्यों को बांट देती है। राज्य को उत्तर प्रदेश से भी पेंशनर्स की पेंशन के लिए 1000 करोड़ रुपए का बजट मिलता है। ये अलावा ये भी जान लीजिए कि कहां से कितना मिलता है पैसा। GST से करीब ₹10 हजार करोड़, VAT से ₹2600 करोड़, स्टांप ड्यूटी से करीब ₹2600 से 3000 करोड़, एक्साइज ड्यूटी से ₹5000 करोड़, ट्रांसपोर्ट टैक्स के जरिए ₹1500 से 2000 करोड़। दोस्तो अब उत्तराखंड के पास लायबिलिटी देखें तो यह भी कम नहीं हैं। प्रदेश को योजनागत और गैर योजनागत मद में भारी रकम खर्च करनी होती है। इसमें वेतन और पेंशन में ही काफी बड़ी रकम राज्य खर्च कर देता है। दोस्तो विभागीय रूप से देखे तो मुख्य रूप से शिक्षा खेलकूद और युवा कल्याण के लिए राज्य सरकार करीब 10000 करोड़ रुपए खर्च करती है।

लोक निर्माण विभाग के लिए सड़क और पुल निर्माण को लेकर हर साल प्रदेश का 3500 करोड़ रूपया खर्च हो जाता है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उत्तराखंड करीब 7000 करोड़ का बजट जारी करता है। उधर इसके अलावा प्रदेश के दूसरे विभागों के लिए भी अलग-अलग मद में सरकार बजट की व्यवस्था करती है। दोस्तो उत्तराखंड सरकार करीब 8000 करोड़ रुपए पेंशन में खर्च कर देती है। इसी तरह 17000 करोड़ रुपए राज्य कर्मचारियों के वेतन में खर्च हो जाते हैं. राज्य सरकार द्वारा लिए गए लोन पर ही हर साल 6000 करोड़ रुपए सरकार ब्याज के रूप में दे देती है। इसी लोन का 5000 करोड़ रुपया मूल धन के रूप में सरकार अदा करती है। दोस्तो उत्तराखंड शासन में वित्त सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे दिलीप जावलकर की माने तो फिलहाल वित्त विभाग तमाम विभागों से बातचीत करते हुए बजट का खाका तैयार कर रहा है। उम्मीद है कि हर बार की तरह समय पर बजट की रूपरेखा को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। दोस्तो प्रदेश में इस बार बजट सत्र ग्री ष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में होने जा रहा है। इस बार का यह सत्र इसलिए भी खास है क्योंकि प्रदेश में साल 2027 की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। इस रूप में देखा जाए तो यह धामी सरकार का आखिरी बजट सत्र होगा जिसमें सरकार जनता से जुड़े लोक लुभावने विषयों को अपने बजट में लाने की कोशिश भी कर सकती है।