सिस्टम पर बड़ा सवाल लेकर आया हूं अब कांग्रेस ने भी एक वीडियो को खूब शेयर किया है, आज मै आपके सामने एक ऐसा दर्द लेकर आया हूं, जो उत्तराखंड के हर छात्र के सीने में धड़कता है, वो युवा जो दिन-रात 15-15 घंटे पढ़ाई में खुद को झोंक देते हैं, UKSSSC Paper Leak Case लेकिन आखिरकार उनकी मेहनत की जगह 15 लाख की रिश्वत वाले पेपर खरीदने का खेल हो जाता है। ये सवाल कई जगह आपने सुना होगा लेकिन एक युआ जो कल का भविष्य है वो अभी से चिंतित है बल। दोस्तो प्रदेश में पेपर लीक पर खूब हो हल्ला हो रहा है, बेरोजगार संघ सड़क पर है, लेकिन इस बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इसमें एक नौजवान लड़का रोते हुए, गुस्से में कहता है “हम दिन-रात 15-15 घंटे लाइब्रेरी में खप रहे हैं, लेकिन ये लोग पेपर 15 लाख में बेच रहे हैं। हमारे मां-बाप के पास 15 लाख नहीं हैं, वो कहां से देंगे?” दगड़ियो ये सिर्फ एक छात्र की आवाज़ नहीं, यह उस पूरे युवा वर्ग की चीख है, जिसे बार-बार भर्ती घोटालों, पेपर लीक, और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त माफियाओं के कारण अपने भविष्य को खून के आंसू रोते देखना पड़ा है। अब मामला कुछ ऐसा हो गया बल कि 15 घंटे की मेहनत Vs. 15 लाख की दलाली। देश के कोने-कोने में युवा IAS से लेकर ग्राम विकास अधिकारी तक की तैयारी में अपनी जवानी दांव पर लगा रहे हैं।
लाखों छात्र हर दिन लाइब्रेरी, कोचिंग और सेल्फ-स्टडी में 12-15 घंटे मेहनत करते हैं, लेकिन जब परीक्षा आती है, तो सवाल पहले ही बिक चुके होते हैं। वैसे दोस्तो चिंता करनी भी जरूरी है, इससे पहले उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान — हर राज्य में भाजपा सरकारों के अंतर्गत पेपर लीक की श्रृंखलाएं अब आम होती जा रही हैं.. अब अपने उत्तराखंड में भी और इसमें सिर्फ “चंद भ्रष्ट कर्मचारी” नहीं, पूरे तंत्र की संलिप्तता की बू आने लगी है। दोस्तो जहां एक गरीब छात्र का परिवार 300-500 रुपये के फार्म भरने में कांपता है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों की कमाई करने वाले “पेपर माफिया” सत्ता के संरक्षण में मज़े कर रहे हैं। हाकम सिंह, खालिद, और न जाने कितने नाम — जिनके तार राजनीति, प्रशासन और आयोगों से जुड़े हैं। दोस्तो एक तरफ छात्र, दिन-रात तैयारी करते हैं, परिवार कर्ज में डूबता है,हर साल उम्र निकलती जा रही है, दूसरी ओर सत्ता कुछ माफियाओं को बचाती है,लीपापोती करती है,और छात्रों की आवाज़ को कुचल देती है। उसी का गुस्सा शायद इस युवा की जुबान से निकल रहै है। दोस्तो सवाल तो जायज है, सिस्टम-सरकार क्यों नहीं रोक पा रही पेपर लीक? सरकारें चाहें तो एक रात में डिजिटल सुरक्षा टाइट कर सकती हैं, सेंटरों पर निगरानी बढ़ा सकती हैं, क्योंकि अपराधी माफिया उनके अपने है। सियासी दलों का कैसे गठजोड़ होता है। उन्हें चुनावों में चंदा देना होता है।
जो सरकारें “वोट चोर” के आरोपों से उबर नहीं पाईं, अब उन पर “पेपर चोर” होने के भी आरोप हैं। बीजेपी ने जहां एक ओर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारे दिए, वहीं आज उनके ही राज में बेटियों को परीक्षा पास करने से पहले रिश्वत की सीढ़ी चढ़ने का विकल्प थमा दिया गया है। दोस्तो कांग्रेस अब इन सब को हथियार बनाकर बीजेपी पर फायर हो रही है और इस युवा के वीडियो शेयर कर रही है सवाल के साथ और चुनाव भी तो ज्यादा दूर नहीं है। दोस्तो अगर कोई सोचता है कि ये सिर्फ एक भर्ती घोटाला है, तो वे गलत हैं। ये उस युवा वर्ग की सामूहिक निराशा और क्रोध का परिणाम है, जिसे हर बार धोखा मिला है — सरकार से, सिस्टम से, और संविधान की रक्षा करने वालों सेजिसके पास 15 लाख नहीं हैं, वो सिर्फ लाइब्रेरी में नहीं — सड़कों पर भी दिखे, ये व्यवस्ता ये चाहती है। क्या आप चलते चलते इस युवा की बात दर्द को सुनिए समझिए।