उत्तराखंड में अब QR कोड जानिए पेड़ पौधो की पूरी जानकारी | Uttarakhand News

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QR कोड का इस्तेमाल कहा होता… इसके बारे में सबको है जानकारी… QR कोड को स्कैन करने के साथ ही पैसे हो जाते हैं ट्रांसफर
अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों ने अब इसी QR कोड का किया ऐसा इस्तेमाल… चंद मिनटों में हो जाएगा ज्ञान का ट्रांसफर !
QR कोड को स्कैन कीजिए… लीजिए ऐसी जानकारी जिसके बारे में अबतक आप रह जाते थे अंजान… इसलिए तो इस तकनीक की हो रही चर्चा

जमाना बदल रहा है… आधुनिक दौर में नए नए तकनीक का इस अंदाज में इस्तेमाल हो रहा है… जिसके बारे में अब से एक दशक पहले आप में से किसी ने शायद ही ही सोचा होगा… अब देखिए जब से QR कोड आया है… तबसे हममें से ज्यादातर इसका इस्तेमाल लेन देन के लिए ही करते हैं… सीधी और सरल भाषा में कहते तो QR कोड को स्कैन करके हम अपने रुपयों को लेन देन करते हैं… लेकिन अब इसी QR कोड को स्कैन करने के बाद लोग राह चलते हुए भी एक ऐसे में क्षेत्र में ज्ञान की दुनिया में जा सकते हैं… जहां अबसे लोग जाना तो चाहते थे… बहुत कुछ जानना चाहते थे… लेकिन चाहकर उस ज्ञान से अंजान रह जाते थे… लेकिन अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों ने इसी QR कोड का एक बेहतरीन इस्तेमाल किया है…
पहले उत्तराखंड में अब तक कई पेड़ देखे होंगे जिनकी उम्र बहुत ज्यादा होती है… और उनमें कई खासियत भी होती है… लेकिन कई बार किसी पेड़ को देखकर उसके नाम या उसकी खासियत जानने को लेकर आपकी जिज्ञासा काफी जागती होगी… जीहां अक्सर जब हम घूमने-फिरने जाते हैं तो इस दौरान कई ऐसे पेड़-पौधे दिखते हैं, जिनकी जानकारी हमें नहीं होती है… लेकिन, उनके बारे में जाने को लेकर हम उत्साहित होते हैं… अब ये आसान होता हुआ नजर आ रहा है… चलिए आपकी इस इच्छा की पूर्ति कही हो या ना हो उत्तराखंड में आने वाले दिनों में जरूर पूरा होगी… बस QR कोड स्कैन करने की जरूरत है… पेड़-पौधों के बारे में आपको किसी से पूछताछ करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सभी पेड़ पौधों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं… क्यूआर कोड स्कैन करते ही उस पेड़ या पौधे का नाम, प्रजाति, औषधीय गुण आदि की जानकारी मोबाइल पर आ जाएगी…
अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना परिसर का वनस्पति विज्ञान विभाग परिसर के साथ ही पर्यटक स्थलों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर औषधीय पौधों पर क्यूआर कोड लगाएगा… इस कोड को स्कैन कर पौधे की आयु और उसके गुणों के बारे में पता चलेगा… इसकी शुरुआत विभाग में स्थापित बॉटनिकल गार्डन से हुई है…परिसर के बॉटनी गार्डन में पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं…. इसमें 50 से ज्यादा पेड़ों की जानकारी कोड स्कैन करते ही आपके फोन पर आ जाएगी… भविष्य में शहर के पर्यटन स्थलों और मंदिरों के आसपास के पेड़-पौधों पर भी इस तरह के क्यूआर कोड लगाए जाएंगे….विभाग ने अल्मोड़ा शहर समेत नगर समेत पर्यटन स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर गींगो बाइलोबा, साइकस, टैक्सस, सिकोया उतीस, तुलसी, बेल पत्र, एलोवेरा, पीपल, गुड़हल चौड़े, बुरांश, रोजमेरी, तिमूर, तेजपत्ता आदि पौधों की करीब 300 दुर्लभ प्रजातियां पर क्यूआर कोड लगाएगा… इसके लिए विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है। स्वीकृति मिलने पर इन पौधों का संरक्षण होने के साथ ही पर्यटक इनके महत्व को जान सकेंगे…
QR कोड स्कैन के माध्यम से पेड़-पौधे की जानकारी अब आपके फोन पर उपलब्ध हो जाएगी… इससे पहले तक लोगों को विशेषज्ञ से किसी पेड़ आदि की जानकारी लेनी पड़ती थी… अब मोबाइल में सिर्फ स्कैन करने से ही पेड़ पौधे की पूरी जानकारी निकल जाएगी… अभी इसकी शुरुआत वनस्पति विज्ञान विभाग के गार्डन से हुई है… अगर पर्यटन विभाग या वन विभाग उनको आर्थिक रूप से मदद करेगा तो वो लोग अल्मोड़ा के जो पर्यटक स्थल और धार्मिक स्थल हैं, उनके आसपास पेड़-पौधों पर स्कैनर लगाएंगे…. इससे बाहर से आने वाले पर्यटक आसानी से पेड़ पौधों की जानकारी ले सकेंगे…