दोस्तो क्या उत्तराखंड कांग्रेस का अंदरूनी घमासान अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गया है? क्या पार्टी हाईकमान को अब बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है?आखिर क्यों प्रदेश के कई नेता कांग्रेस नेतृत्व के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं? क्या ये सिर्फ बयानबाजी है या फिर पार्टी के भीतर गहरी खाई बन चुकी है? और हां क्या हाईकमान अब सख्त कदम उठाएगा? और अगर उठाया, तो किस पर गिरेगी गाज? इन्हीं बड़े सवालों के जवाब रिपोर्ट के जरिए। जी हां दोस्तो ये तस्वीर यहां से विवाद का वो बंवडर कांग्रेस में उठा जो अब शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। दोस्तो उत्तराखंड कांग्रेस में इस सिरफुटोबल ने केंद्रीय नेत्रत्व के माथे पर भी पसीना लाने का काम कर दिया है। दोस्तो एक तरफ उत्तराखंड कांग्रेस के नेता एक दूसरे के सर पर चढ़ कर नाच रहा हैं तो वहीं अब कांग्रेस हाईकमान भी बड़ा फैसला ले चुका है और अब खबर बड़ी ये कि उत्तराखंड प्रदेश नेतृत्व से कांग्रेस के हालात संभलते नहीं संभल रहे हैं इसलिए हाईकमान ने ये फैसला लिया कि कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमार शैलजा उत्तराखंड आएंगी और तावड़तोड़ बैठकें भी होंगी। वैसे कहा तो ये जा रहा है कि पार्टी की संगठनात्मक रणनीती पर बात होगी, लेकिन यहां बात तो हद पार कर चुकी है ना तो फिर क्या होगा।
दोस्तो उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा 8 अप्रैल को अपने पांच दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर आ रही हैं। इस दौरान कुमारी शैलजा पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार बैठकें करके संगठनात्मक रणनीति तैयार करेंगी। साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी विस्तार से मंथन किया जाएगा। दोस्तो पार्टी का कहना है कि कुमारी शैलजा 8 अप्रैल को रुद्रपुर पहुंचकर पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगी। इसके बाद दो बजे से जिला कांग्रेस कमेटी उधमसिंहनगर, महानगर कांग्रेस कमेटी रुद्रपुर और महानगर कांग्रेस कमेटी काशीपुर के पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में भाग लेंगी। 9 अप्रैल को सुबह दस बजे से महानगर कांग्रेस कमेटी कार्यालय स्वराज आश्रम हल्द्वानी में नैनीताल जनपद के सभी विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की बैठक में भाग लेंगी। उसके बाद दोस्तो बारी गढवाल मंडल की होगी जहां वो पार्टी की मौजूदा गतिविधियों और चुनावी तैयारियों पर मंथन करेंगी दोस्तो सबसे कुमारी शैलजा कोटद्वार पहुंचेंगी। जहां शाम पांच बजे से कोटद्वार जनपद व कोटद्वार महानगर कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगी। 10 अप्रैल को सुबह दस बजे से कोटद्वार जनपद एवं कोटद्वार महानगर कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद हरिद्वार के लिए के लिए निकलेंगी। दोस्तो बताया ये जा रहा है कि कुमारी शैलजा तीन बजे से जयराम आश्रम में हरिद्वार महानगर कांग्रेस कमेटी, हरिद्वार ग्रामीण, रुड़की ग्रामीण एवं रूड़की महानगर कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में प्रतिभाग करेंगी. साथ ही हरिद्वार में सायंकालीन गंगा आरती में प्रतिभाग करेंगी। इसके बाद वे देहरादून के लिए प्रस्थान करेंगी।
इसके बाद दोस्तो कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा 11 अप्रैल को नगर कांग्रेस कमेटी मसूरी में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करेंगी. तीन बजे देहरादून महानगर कांग्रेस कमेटी, पछुवादून एवं परवादून जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने के बाद शाम पांच बजे से प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय देहरादून में युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, अल्पसंख्यक विभाग, अनुसूचित जाति विभाग एवं पूर्व सैनिक विभाग के पदाधिकारियों की बैठक लेंगी। और इसके बाद दोस्तो 12 अप्रैल को देहरादून में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन की ओर से आयोजित विशाल ’जय भीम-जय हिंद’ कार्यक्रम में प्रतिभाग करेंगी। इसके बाद वे नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी। दोस्तो कहा ये भी जा रहा है कि कुमारी शैलजा अपने दौरे के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों पर भी विस्तार से चर्चा करेंगी। उनका यह दौरा निश्चित रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा। कार्यकर्ता आने वाले विधानसभा चुनाव के नये जोश के साथ खड़ा रहेगा लेकिन दोस्तो सवाल तो मेरा ये था कि क्या वो कांग्रेस में हो रही मौजूदा सिरफुटोबल को शांत करने के लिए कोई कदम उठायेगी या नहीं, लेकिन दोस्तो ये सियासत है यहां कहा कुछ जाता है किया कुछ जाता है।
अब कांग्रेस वाले सीधे तो नहीं कहेंगे कि कुमारी शैलजा क्लास लगाने आ रही है प्रदेश के नेताओं की क्योंकि दोस्तो जो रायता कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने बीते कुछ दिन फैलाा है। उसे अगर समेट सकता है तो वो हैं कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व ऐसे में दोस्तो कांग्रेस की गुटबाजी को पाटना कांग्रेस हाईकमान के लिए टेढी खीर साबित होने वाला है। एक तरफ जहां बीजेपी एक बार फिर सरकार रीपीड करने के लिए जमीन स्तर पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस ऐसा लगता है चुनाव हारने के लिए एक दूसरे अपने ही नेताओं में उलझी हुई है तो साफ है। उत्तराखंड कांग्रेस में मचा सियासी घमासान अब सिर्फ प्रदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज दिल्ली दरबार तक पहुंच चुकी है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि अब हाईकमान को खुद मैदान में उतरना पड़ रहा है।कुमारी शैलजा का दौरा भले ही संगठनात्मक मजबूती के नाम पर हो, लेकिन असली मकसद क्या है—गुटबाजी खत्म करना या नेताओं की “क्लास” लगाना ये आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या कांग्रेस अपने अंदरूनी विवादों को सुलझा पाएगी? या फिर यही खींचतान 2027 चुनाव में पार्टी की राह और मुश्किल कर देगी?फिलहाल नजरें टिकी हैं हाईकमान के फैसलों पर क्योंकि अब जो भी होगा, वही तय करेगा उत्तराखंड कांग्रेस का भविष्य।