जी हां दोस्तो उत्तराखंड में एक हादसे से अभिभावकों की अटकी सांसे और खतरे के साए में दिखाई दी मासूमों की जिंदगियां। एक मंजर ऐसा जो दिल दहला दे, सवाल ये भी कि ये महज एक हादसा था या इसमें लापरवाही बरती गई। School Bus Accident In Haldwani दगड़ियों स्कूल बस हादसे से थर्राया लालकुआं, 40 बच्चों की जान पर बन आई, 12 से ज्यादा घायल हो गए। पूरी खबर विस्तार से बताने जा रहा हूं और कई सवाल भी। दोस्तो उत्तराखंड के लालकुआं क्षेत्र से गुरुवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां जयपुर बीसा गांव के पास स्कूली बच्चों से भरी बस अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे खाई में जा गिरी। इस हादसे ने न केवल स्थानीय लोगों को झकझोर दिया बल्कि जिलेभर में हड़कंप मचा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मोटाहल्दू क्षेत्र के पदमपुर देवलिया गांव से निजी स्कूल की बस रामपुर रोड की ओर जा रही थी। इसी दौरान जयपुर बीसा चौराहे के समीप दूसरी स्कूली बस को साइट देने के चक्कर में चालक ने नियंत्रण खो दिया और बस सड़क के किनारे खाई में जा गिरी। दगड़ियों आपको बता दूं कि घटना के बाद बस में मौजूद 40 बच्चों में से एक दर्जन से अधिक घायल हो गए। दुर्घटना इतनी अचानक और भयावह थी कि बच्चों और राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने बस के शीशे तोड़कर बच्चों को बाहर निकाला और तत्काल पास के निजी अस्पताल पहुंचाया।
दोस्तो घायल बच्चों को हल्द्वानी के मुखानी क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहां डॉक्टर्स की निगरानी में उनका इलाज जारी है, घायल बच्चों को टिटनेस इंजेक्शन दिए गए हैं, जबकि कुछ का एक्स-रे और गंभीर जांच की जा रही है। वहीं दोस्तो खबर ये भी है कि बस हादसे में बस चालक और परिचालक को भी गंभीर चोटें आई हैं। परिचालक के पैर में फ्रैक्चर बताया जा रहा है। दोस्तो जैसे ही हादसे की खबर गांव और स्कूल तक पहुंची, बच्चों के अभिभावकों में हड़कंप मच गया। दर्जनों अभिभावक तुरंत स्कूल पहुंचे और अपने बच्चों की जानकारी लेने लगे। अस्पताल में भी अपनों को देखकर कई परिजन रो पड़े, यह दृश्य किसी भयानक फिल्म से कम नहीं था। उधर ग्राम प्रधान ने जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद कोई भी प्रशासनिक अधिकारी समय पर मौके पर नहीं पहुंचा। बच्चों को निकालने और अस्पताल पहुंचाने का काम पूरी तरह स्थानीय लोगों ने किया, ग्राम प्रधान ने कहा, “बस चालकों की लापरवाही ने ये दिन दिखाया है। कई बार ये देखा गया है कि निजी स्कूलों के बस चालक नशे की हालत में होते हैं। इससे पहले भी इस इलाके में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की नींद नहीं खुल रही, साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि जहां हादसा हुआ वहां एक नाला भी है, जो शुक्र है उस समय सूखा था। अगर पानी भरा होता, तो यह हादसा कहीं ज्यादा बड़ा और घातक साबित हो सकता था,
अब दोस्तो सवाल उठाता हूं। क्या स्कूल प्रशासन ने बसों की हालत की जांच की थी?क्या चालक और परिचालक योग्य और फिट थे?क्यों परिवहन विभाग ऐसे स्कूल वाहनों पर नजर नहीं रखता? दगड़ियो इस हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड में स्कूली बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने मांग की है कि बस दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी बस चालक, स्कूल प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, यह सोचकर कि वे सुरक्षित हैं, लेकिन अब उन्हें हर दिन डर लगा रहेगा। ये हादसा सिर्फ एक बस पलटने की घटना नहीं है यह एक चेतावनी है। अगर स्कूल प्रशासन, परिवहन विभाग और जिला प्रशासन समय रहते नहीं जागे, तो अगली बार हालात और भी भयावह हो सकते हैं। बच्चों की जिंदगी कोई एक्सपेरिमेंट नहीं है। जवाबदेही तय होनी चाहिए आज नहीं तो कब?